फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   In the collision of two trucks Three dead, one injured

दो ट्रकों की भिड़ंत में तीन मरे, एक घायल

Sat, 17 Sep 2016 11:38 PM IST
ब्यूरो /शाहजहांपुर
ब्यूरो /शाहजहांपुर Updated Sat, 17 Sep 2016 11:38 PM IST
विज्ञापन
In the collision of two trucks Three dead, one injured
दो ट्रकों की भिड़ंत में तीन मरे - फोटो : श्‍ााहजहांपुर उत्‍तर प्रदेश्‍ा

विज्ञापन
बदायूं-फर्रुखाबाद हाईवे पर गांव जखिया के पास शनिवार की सुबह दो ट्रकों की आमने-सामने भिड़ंत में एक ट्रक के मालिक समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक ट्रक में सवार गल्ला व्यापारी गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को इलाज के लिए बदायूं अस्पताल भेजा गया, जहां हालत गंभीर होने पर उसे बरेली रेफर कर दिया गया। हादसे के बाद सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। इससे करीब पांच किलोमीटर लंबा जाम लग गया और लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा।
शनिवार सुबह छह बजे गांव जखिया के पास हाईवे पर दो ट्रकों की आमने-सामने से जबरदस्त भिड़ंत हो गई। तेज आवाज सुनकर ग्रामीण घरों के बाहर आ गए। दोनों ट्रकों के अगले हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए थे और उनमें सवार लोग फंस गए थे। पुलिस ने दोनों ट्रक में फंसे लोगों को निकलवाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली तो जेसीबी मशीन मंगानी पड़ी, जिसकी मदद से दोनों ट्रकों को हटाकर ट्रक में फंसे लोगों को बाहर निकाला। इनमें पुवायां के गांव सकरापुर निवासी ट्रक मालिक 26 वर्षीय कासिब उर्फ वारिश पुत्र अयुब और इसी गांव के ट्रक चालक 26 वर्षीय इशरत खां पुत्र मोबीन खां और दूसरे ट्रक के चालक बदायूं के थाना मूसझाग क्षेत्र के गांव धिलौर निवासी 30 रामभनज पाल पुत्र लटूरी पाल की मौत हो चुकी थी। तीनों के शव जेसीबी से ट्रक हटाने के बाद बाहर निकाले गए। हादसे में गंभीर रूप से घायल गल्ला व्यापारी कलान क्षेत्र के गांव रुकनपुर निवासी सर्वेश राठौर को तुरंत बदायूं जिला अस्पताल भेज दिया गया।
विज्ञापन

शवों को निकालने में काफी
करनी पड़ी मशक्कत 

आमने-सामने से हुई टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों ट्रक बुरी तरह से फंस गए, जिस ट्रक में वारिश और इशरत सवार थे। उस ट्रक में लोहे के गार्डर भरे हुए थे। टक्कर के बाद लोहे के गार्डर के दबाव से वारिश और इशरत बुरी तरह से फंस गए। जेसीबी मशीन से ट्रक को काटकर शवों को बाहर निकाला गया। पुलिस को शव निकालने में डेढ़ घंटे से अधिक का समय लगा। ट्रक में फंसे वारिश और इशरत के शव बुरी तरह से कुचल चुके थे। मृतकों के पास मिले मोबाइल से पुलिस ने मृतकों के परिवार वालों को सूचना दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

खुद ट्रक चला रहे थे
ट्रक मालिक वारिश
जिस ट्रक में इशरत और वारिश सवार थे उस ट्रक को वारिश ही चला रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वारिश को नींद आ गई, जिससे हादसा हो गया था। जब ट्रक से दोनों को निकाला गया तो वारिश चालक की सीट पर बैठे मिले थे।
दो दिन बाद इशरत की बहन की है शादी
चालक इशरत के पिता मोबीन खां की काफी समय पहले मौत हो चुकी है। वह अपने बड़े भाई असलम के साथ रहता था और ट्रक चलाकर परिवार की गृहस्थी चलाने में मदद करता था। इशरत के दो छोटे भाई नुसरत और मुन्ना हैं। इशरत की मौत की खबर पाकर दोनों भाई रोते बिलखते शाहजहांपुर के लिए रवाना हो गए। पोस्टमार्टम के बाद देर शाम दोनों के शव गांव पहुंचे तो तमाम लोगों की आंखें नम हो उठीं। आगामी सोमवार को इशरत की बहन सुनेहरी की शादी होनी है। उसकी शादी लखीमपुर के गांव महमंदपुर तय हुई थी। घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। दो दिन पहले ही इशरत दिल्ली से लोहे के गार्डर लादने गया था। हेल्पर नहीं होने की वजह से ट्रक मालिक वारिश उसके साथ चले गए। इशरत की मौत से खुशी के घर में मातम छा गया है। बहन का रो-रोककर बुरा हाल है।
रामभजन के घर
में मचा कोहराम

दूसरे ट्रक के चालक रामभजन की मौत की खबर सुनकर घर में कोहराम मच गया। मृतक की पत्नी नंदी और मां वसुधा का रो-रोककर बुरा हाल है। रामभजन के तीन बेटे पांच वर्षीय श्यामवीर, तीन वर्षीय आशीष और एक महीने का एक पुत्र हैं। रामभजन अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था।
पांच किलोमीटर
लंबा लगा जाम

हादसे के बाद सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग र्गइं। दो घंटे के बाद पुलिस दुर्घटनाग्रस्त ट्रकों को सड़क हटवा पाई। इस बीच सड़क के दोनों तरफ करीब पांच किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। काफी मशक्कत के बाद पुलिस यातायात को सामान्य कर पाई।

छह महीना पहले ही
वारिश ने खरीदा था ट्रक
पुवायां। वारिश के पिता अयूब अली खेती करते हैं। उन्होंने बेटे की मंशा के अनुसार अप्रैल में ही ट्रक खरीद कर दिया था। बेटे की मौत की खबर सुनकर उनके आंसू रोके नहीं रुक रहे थे। अयूब अली का कहना था कि उन्हें पता होता कि ट्रक बेटे का काल बन जाएगा तो वह कभी भी ट्रक नहीं खरीदते। अयूब की मां साकरून बेगम, बड़ा भाई कासिम, छोटा भाई स्वाले, कोहिनूर, बहन रूबी और आफरीन भी वारिस की मौत से बेहद गमजदा हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed