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दोनाली कट्टे से हमला करता था कार्तिक
ब्यूरो/शाहजहांपुर
Updated Fri, 15 Apr 2016 11:50 PM IST
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Firing
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शहर की बिटिया से दुराचार के मामले में जेल में बंद आसाराम के खिलाफ गवाही देने वालों की सुपारी लेकर हत्या करने वाला कार्तिक हलदर खास किस्म का कट्टा इस्तेमाल करता था। आसाराम के पक्ष में गवाहों के न टूटने पर कार्तिक ने शाहजहांपुर के गवाह कृपाल सिंह और राजकोट में अमृत प्रजापति को इसी खास कट्टे से मौत के घाट उतारा था। उसने यह कट्टा दोनाली रायफल का बट और नली काटकर बनाया था। इस रायफल को उसने नक्सलियों को असलहे बेचने वाले गिरोह से खरीदा था। इसकी पुष्टि गुजरात में उससे पूछताछ के दौरान हुई। वहां पूछताछ पूरी होने के बाद कार्तिक हो शाहजहांपुर लाए जाने के लिए कोर्ट में वारंट दाखिल कर दिया गया है।
गुजरात एटीएस द्वारा गिरफ्तार कार्तिक से कई चरणों में पूछताछ हुई। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, कार्तिक ने उसी दोनाली कट्टे से कृपाल से पहले राजकोट में 23 मई 2014 को अमृत प्रजापति को मौत के घाट उतारा था। अमृत आसाराम द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली यौनवर्धक दवाओं का राजदार था। इसी कास कट्टे से कार्तिक ने शाहजहांपुर में गवाह कृपाल सिंह पर 10 जुलाई 2014 को फायर झोंका था। कृपाल की उपचार के दौरान अगले दिन 11 जुलाई 2014 को बरेली के निजी अस्पताल में मौत हो गई थी। गुजरात में एटीएस की पूछताछ और विवेचना में यह भी पता चला है कि कार्तिक एक विशेष तरह के कारतूस का इस्तेमाल करता था जो शरीर में घुसते ही तीन टुकड़ों में टूटकर शरीर को अंदर से छलनी करता है। कृपाल प्रकरण में यही बात सामने आई थी। सूत्रों के अनुसार, पकड़े जाने से पहले उसने नक्सलियों को हथियार सप्लाई करने वालों से एके 47 खरीदने का सौदा किया था। आगे के शिकारों को वह उसी से निशाना बनाने की सोच रहा था लेकिन डील फाइनल होने से पहले ही वह गुजरात एटीएस को हत्थे चढ़ गया।
कृपाल प्रकरण में कई अहम सूचनाएं मिल रही हैं। गुजरात एटीएस की पूछताछ और रिमांड खत्म होने पर उसे शाहजहांपुर लाने के लिए कोर्ट में वारंट दाखिल किया गया। वारंट के तामील होने का इंतजार है। यहां लाकर उससे पूछताछ के बाद ही उससे जुड़ी जानकारियों के बारे में अधिकृत तौर पर कोई टिप्पणी की जा सकती है।
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- राजेश कुमार, एसपी सिटी, शाहजहांपुर
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गुजरात एटीएस द्वारा गिरफ्तार कार्तिक से कई चरणों में पूछताछ हुई। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, कार्तिक ने उसी दोनाली कट्टे से कृपाल से पहले राजकोट में 23 मई 2014 को अमृत प्रजापति को मौत के घाट उतारा था। अमृत आसाराम द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली यौनवर्धक दवाओं का राजदार था। इसी कास कट्टे से कार्तिक ने शाहजहांपुर में गवाह कृपाल सिंह पर 10 जुलाई 2014 को फायर झोंका था। कृपाल की उपचार के दौरान अगले दिन 11 जुलाई 2014 को बरेली के निजी अस्पताल में मौत हो गई थी। गुजरात में एटीएस की पूछताछ और विवेचना में यह भी पता चला है कि कार्तिक एक विशेष तरह के कारतूस का इस्तेमाल करता था जो शरीर में घुसते ही तीन टुकड़ों में टूटकर शरीर को अंदर से छलनी करता है। कृपाल प्रकरण में यही बात सामने आई थी। सूत्रों के अनुसार, पकड़े जाने से पहले उसने नक्सलियों को हथियार सप्लाई करने वालों से एके 47 खरीदने का सौदा किया था। आगे के शिकारों को वह उसी से निशाना बनाने की सोच रहा था लेकिन डील फाइनल होने से पहले ही वह गुजरात एटीएस को हत्थे चढ़ गया।
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कृपाल प्रकरण में कई अहम सूचनाएं मिल रही हैं। गुजरात एटीएस की पूछताछ और रिमांड खत्म होने पर उसे शाहजहांपुर लाने के लिए कोर्ट में वारंट दाखिल किया गया। वारंट के तामील होने का इंतजार है। यहां लाकर उससे पूछताछ के बाद ही उससे जुड़ी जानकारियों के बारे में अधिकृत तौर पर कोई टिप्पणी की जा सकती है।
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- राजेश कुमार, एसपी सिटी, शाहजहांपुर