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हरेवा गांव के दलित कर सकते है पलायन

Wed, 20 Jan 2016 08:35 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Wed, 20 Jan 2016 08:35 PM IST
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Dalit villagers have Hrewa getaway

हरेवा में मंगलवार रात हुए झगड़े के बाद पुलिस कार्रवाई से आहत पीड़ित पक्ष गांव से पलायन करने की तैयारी में है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस प्रशासन एकतरफा कार्रवाई करेगा तो वे गांव में कैसे रह पाएंगे?

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मंगलवार शाम करीब आठ बजे कश्यप बिरादरी की लड़की को बहला फुसलाकर ले जाने के आरोपी संतोष को शौच करने जाते समय दूसरे पक्ष के लोगों ने घेर लिया और पिटाई कर दी थी। इसके बाद धानुक बिरादरी के सोनेलाल और पोखे के बीच कहासुनी हो गई। तभी कश्यप पक्ष के दूसरे लोग धानुक बस्ती की ओर पहुंचकर धमकाने लगे। इसी बीच सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंच गई और दोनों पक्षों को समझाकर शांत कर दिया। धानुक बिरादरी के रामासरे ने बताया कि पुलिस के जाते ही उनकी बस्ती की ओर कश्यप लोग इकट्ठे होकर दोबारा जा धमके। इसकी सूचना पर पुलिस दोबारा मौके पर पहुंची और धानुक बिरादरी के संतोष, पोखे व सोनेलाल को पकड़कर कोतवाली ले गई। रामासरे का कहना है कि उन्हें कश्यप लोगों ने धमकाया था, लेकिन पुलिस ने कश्यप पक्ष के किसी व्यक्ति को नहीं पकड़ा। रामासरे का यह भी कहना है कि उनकी बिरादरी का सोनेलाल विरोधी पक्ष कश्यप बिरादरी के लोगों से मिला है। संतोष के साथ हुई मारपीट होने के बाद संतोष व पोखे की सोनेलाल से कहासुनी होने लगी। तभी सोनेलाल की मदद करने के उद्देश्य से कश्यप लोगों ने इकट्ठे होकर धानुक बस्ती पर धावा बोल दिया। बावजूद इसके पुलिस ने कश्यप पक्ष के किसी भी व्यक्ति को नहीं पकड़ा। बुधवार को पुलिस ने संतोष, पोखे व सोनेलाल का शांतिभंग की आशंका में में लिखा पढ़ी कर चालान कर दिया। धानुक पक्ष के लोगों का कहना है कि गांव मे कश्यप बिरादरी ज्यादा होने के कारण वह लोग वैसे ही सहमें हुए हैं ऐसे में पुलिस की एकतरफा कार्यवाही से उन लोगों का गांव में रहना मुश्किल हो जाएगा।
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पिछले साल सुर्खियों में रहा हरेवा गांव
14 मई 2015 हरेवा का धानुक बिरादरी का संतोष गांव की कश्यप बिरादरी की लड़की को बहला फुसलाकर ले गया था। इसके प्रतिशोध में लड़की पक्ष के लोगों ने 16 मई को धानुक बिरादरी की पांच महिलाओं को निर्वस्त्र करके गांव मे घुमाया। इस घटना के बाद हरेवा गांव सुर्खियों में छाया रहा। इस मामले में तत्कालीन एसपी का तबादला होने के साथ ही तत्कालीन कोतवाल और हल्का दरोगा को सस्पेंड कर दिया गया था।
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हरेवा में चौकी खोलने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में
हरेवा कांड के बाद 21 मई को गांव पहुंचे अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुलिया ने दलितों की सुरक्षा के लिए वहां पुलिस चौकी खुलवाने की घोषणा की थी। आला अधिकारियों ने भी चौकी न खुलने तक गांव में पुलिस तैनात रखने का वायदा किया था। मगर मामला शांत होने के बाद पुलिस गांव से हटा ली गई। इसके अलावा पीड़ित दलित परिवार को प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस मुहैया कराने का भी आश्वासन दिया था, जो नहीं दिया गया।

कोट
झगड़ा धानुक पक्ष के लोगों के बीच हुआ था, जिनके खिलाफ शांतिभंग की आशंका में कार्रवाई की गई है। इस मामले में कश्यप बिरादरी के लोगों से कोई लेना देना नहीं है।
- यतेंद्र भारद्वाज
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