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विद्रोह के बाद जंगल में 20 किमी पैदल चलना पड़ा

Fri, 12 Apr 2019 02:23 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 12 Apr 2019 02:23 AM IST
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विद्रोह के बाद जंगल में 20 किमी पैदल चलना पड़ा
तिलहर (शाहजहांपुर)। नेपाल से वापस लौटे मजदूरों ने वहां हुए जुल्म की दास्तां भी सुनाई। बताया उनको वहां पीने का साफ पानी तक मयस्सर नहीं हो रहा था। भट्ठा मालिक न सिर्फ प्रताड़ित करता था, बल्कि मेहनमाना भी नहीं देता था। तीन अप्रैल को सभी 78 मजदूरों ने बगावत करते हुए भट्ठा मालिक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मजदूर घर वापसी की मांग पर अड़ गए तो भट्ठा मालिक को भी झुकना पड़ा। इसके बाद 75 मजदूरों को छोडने को वह तैयार हो गया।
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वापस आए मजदूरों ने बताया कि उनको नेपाल के जिला डांग के तुलसीपुर थाने के गांव बनकट्टा में ईंट के भट्ठे पर बंधक बनाया गया था। वहां से वह करीब 20 किलोमीटर जंगल में पैदल चलने के बाद तुलसीपुर पहुंचे। तुलसीपुर से नेपालगंज के लिए बस मिली। नेपालगंज से रुपैडिया पहुंचे और वहां से शाहजहांपुर आए। भट्ठा मालिक मजदूरी नहीं देता था। कुछ रुपये महिलाओं ने बचा कर रखे थे। यह रुपये किराये में काम आए। मजदूरों ने बताया कि गांव विक्रमपुर निवासी अशोक पुत्र मलखान, बरहा मोहब्बतपुर का बुधवान पुत्र उदय और भानपुर पिपरिया का सुखपाल पुत्र राजेश भट्ठा मालिक के कब्जे में हैं। बुधवार को इंस्पेक्टर संजय राय से मुलाकात के बाद मजदूरों ने तीनों साथियों की वापसी के साथ उनकी मजदूरी का भुगतान कराने की मांग की। इंस्पेक्टर ने बताया कि मजदूरों की वापसी के लिए पहले ही मंत्रालय से पत्राचार चल रहा है। बाकी मजदूरों की वापसी भी जल्द हो जाएगी।
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एसपी बोले-नए सिरे से करना होगा पत्राचार
शाहजहांपुर। नेपाल में बंधक तीन मजदूरों की वहां से वापसी के लिए अब पुलिस-प्रशासन को केंद्रीय गृह मंत्रालय से नए सिरे से पत्राचार करना होगा। एसपी डॉ. एस चन्नप्पा ने भी यह बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की वापसी को लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं की जा रही है। उन्होंने बताया कि वापस लौटे मजदूरों ने बताया कि उनके तीन साथी अब भी वहां फंसे हुए हैं। ऐसे में इन तीनों की वापसी के लिए पुलिस-प्रशासन को केंद्रीय गृह और विदेश मंत्रालय से नए सिरे से पत्राचार करना होगा।
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