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हत्या में अभियुक्त को उम्र कैद
Updated Wed, 12 Jul 2017 08:11 PM IST
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शाहजहांपुर। वर्ष 2012 में मीरानपुर कटरा क्षेत्र के गांव परशुरामपुर में हुए हत्याकांड में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश एहसानुल्लाह खान ने आरोपी को दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा व अर्थ दंड से दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मीरानपुर कटरा क्षेत्र के गांव लिधौआ निवासी ऐवरन कश्यप ने दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया था कि थाना गढ़िया रंगीन क्षेत्र के गांव बरी प्रसिद्धपुर निवासी उनका भांजा सुखलाल बचपन से ही उसके घर में रहा और यहीं उसका लालन-पोषण हुआ। छह जून वर्ष 2012 की शाम लगभग छह बजे उसके गांव का अशोक भांजे को सिद्धार्थ विश्वकर्मा के यहां दरवाजा बनवाने की बात कहकर साइकिल पर बैठाकर चला गया। लगभग साढ़े आठ बजे अशोक ने भांजे की साइकिल लाकर घर पर दी और कहा कि सुखलाल की परशुरामपुर में जागन जाटव ने चाकू व लाठी से प्रहार करके हत्या कर दी है। इस पर वह परिवार के साथ गांव परशुरामपुर जाकर देखा तो गांव के बाहर सुखलाल की लाश खून से लथपथ पड़ी थी। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट अशोक व जागन के खिलाफ दर्ज कर विवेचना के बाद जागन के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय भेज दिया। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश एहसानुल्लाह खान ने सरकारी वकील अमित सिंह वर्मा की ओर से प्रस्तुत सात गवाहों के बयान, पुलिस द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों का अवलोकन करने व बचाव पक्ष की ओर से दलीलों को सुनने के बाद आरोपी जागन जाटव को दोषी पाते हुए उसे आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया है। जुर्माने की धनराशि में से 40 हजार रुपये बतौर प्रतिकर मृतक सुखलाल के विधिक उत्तराधिकारी को दिलाने का आदेश दिया।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार मीरानपुर कटरा क्षेत्र के गांव लिधौआ निवासी ऐवरन कश्यप ने दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया था कि थाना गढ़िया रंगीन क्षेत्र के गांव बरी प्रसिद्धपुर निवासी उनका भांजा सुखलाल बचपन से ही उसके घर में रहा और यहीं उसका लालन-पोषण हुआ। छह जून वर्ष 2012 की शाम लगभग छह बजे उसके गांव का अशोक भांजे को सिद्धार्थ विश्वकर्मा के यहां दरवाजा बनवाने की बात कहकर साइकिल पर बैठाकर चला गया। लगभग साढ़े आठ बजे अशोक ने भांजे की साइकिल लाकर घर पर दी और कहा कि सुखलाल की परशुरामपुर में जागन जाटव ने चाकू व लाठी से प्रहार करके हत्या कर दी है। इस पर वह परिवार के साथ गांव परशुरामपुर जाकर देखा तो गांव के बाहर सुखलाल की लाश खून से लथपथ पड़ी थी। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट अशोक व जागन के खिलाफ दर्ज कर विवेचना के बाद जागन के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय भेज दिया। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश एहसानुल्लाह खान ने सरकारी वकील अमित सिंह वर्मा की ओर से प्रस्तुत सात गवाहों के बयान, पुलिस द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों का अवलोकन करने व बचाव पक्ष की ओर से दलीलों को सुनने के बाद आरोपी जागन जाटव को दोषी पाते हुए उसे आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया है। जुर्माने की धनराशि में से 40 हजार रुपये बतौर प्रतिकर मृतक सुखलाल के विधिक उत्तराधिकारी को दिलाने का आदेश दिया।
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