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रामविलास के हत्यारों का पता लगाने में पस्त पुलिस ने बंद की फाइल, 50 हजार का इनाम भी नहीं आया काम

Mon, 29 Nov 2021 12:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 29 Nov 2021 12:45 AM IST
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खुटार (शाहजहांपुर)। खुटार थाने से कुछ दूर पशु अस्पताल में बुजुर्ग रामविलास की हत्या के 22 महीने बाद भी पुलिस हत्या आरोपियों का कोई पता नहीं लगा सकी है। रामविलास की चाकू से गोद कर हत्या की गई थी। पस्त होकर पुलिस ने लिखा है कि गवाह और सबूत नहीं मिलने के कारण मामला बंद किया जा रहा है, लेकिन जांच प्रचलित रहेगी।
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खुटार के गांव मठोकर टोडरपुर निवासी 70 वर्षीय रामविलास 27 जनवरी को घर से बैंक से वृद्धावस्था पेंशन के रुपये निकालने की कहकर साइकिल से निकले थे। 28 जनवरी को खुटार के पशु अस्पताल के परिसर में रामविलास का रक्त रंजित शव पड़ा मिला था। पुलिस को रामविलास की जेब से 2020 रुपये, बैंक की पासबुक मिली थी। पोस्टमार्टम में रामविलास की चाकू से घायल होने के कारण अत्यधिक रक्तस्राव हो जाने के कारण मौत का खुलासा हुआ था।
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हत्याकांड का खुलासा करने के लिए क्राइम ब्रांच और पुलिस को लगाया था, लेकिन अभी तक हत्यारों का कोई सुराग नहीं लग सका है। मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी तेजपाल सिंह को हटाकर जयशंकर सिंह को थाना प्रभारी बनाया था। जयशंकर सिंह ने दस सितंबर 2020 को फाइल का बंद कर दिया।
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पहले पोस्टमार्टम ही नहीं कराना चाहते थे घर वाले
रामविलास का शव मिलने के बाद भाई रामटहल ने शव की शिनाख्त की थी। रामटहल ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार करते हुए पुलिस से शव सुपुर्दगी में देने को कहा था, लेकिन पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम शव देने से इनकार कर दिया था। पोस्टमार्टम के बाद रामविलास के पुत्र कमलेश की ओर से अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
लखनऊ और दिल्ली में रहते हैं रामविलास के पुत्र
रामविलास के चार पुत्र संतबली, कमलेश, विनोद, कृपाल कृष्ण हैं। पुत्रों के साथ ही पुत्री सोना की भी शादी हो चुकी है। संतबली और विनोद लखनऊ में रहकर फर्नीचर का काम करते हैं। कमलेश दिल्ली में टेंट हाउस पर काम करता है। कृपाल कृष्ण मानसिक मंदित है। रामविलास तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उनसे छोटे रामटहल और जयराम हैं। रामविलास के हिस्से में ढाई एकड़ जमीन थी। रामविलास की पत्नी की कई वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है, रामविलास अपने भाई रामटहल के साथ एक ही मकान में रहते थे और खुटार में मट्ठा आदि बेचकर गुजर करते थे।
इनाम भी रखा, लेकिन फिर भी नहीं लगा हत्यारों का पता
रामविलास के हत्यारों का पता लगाने में नाकाम रहने के बाद पुलिस ने दस अप्रैल 2020 को हत्यारों का पता बताने वालों पर 50 हजार रुपये का इनाम भी रखा था। पुलिस के इनाम की घोषणा करने के साथ ही स्पष्ट हो चला था कि इस मामले में पुलिस ने हथियार डाल दिए हैं।

मेरे पास रामविलास हत्याकांड को बंद किए जाने की कोई फाइल नहीं आई है। मामला पुराना होने के कारण पूरे मामले की जानकारी भी नहीं है। पता कराया जाएगा। - बीएस वीरकुमार, सीओ पुवायां
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