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दुष्कर्म में दोषी को दस साल की कैद, तीन आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
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शाहजहांपुर। प्रथम फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद कमर ने दुष्कर्म के मामले में एक दोषी को दस वर्ष के कारावास और 30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया है। तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
सरकारी वकील संजीव सिंह और उमेश चंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि 16 फरवरी, 2011 की सुबह वादी की पुत्री को गांव का मोनू सिंह बहला-फुसलाकर ले गया था। गांव के लोगों ने पुत्री को ले जाते देखा था। वादी की तहरीर के आधार पर मोनू सिंह के विरुद्ध 20 फरवरी को मदनापुर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना के दौरान पीड़िता के बयानों के आधार पर धारा 376 की वृद्धि की गई।
पीड़िता के बयान होने के बाद मदनापुर क्षेत्र के एक गांव निवासी रामनिवास, साधू सिंह उर्फ कृष्णपाल सिंह, राम उर्फ दिनेश और मोनू सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र अदालत भेजा गया। फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात एवं सरकारी वकील के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी मोनू सिंह को दोषी पाते हुए उसे दस वर्ष के कारावास और 30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया। साक्ष्य के अभाव में रामनिवास, साधू सिंह और राम उर्फ दिनेश को बरी कर दिया गया।
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सरकारी वकील संजीव सिंह और उमेश चंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि 16 फरवरी, 2011 की सुबह वादी की पुत्री को गांव का मोनू सिंह बहला-फुसलाकर ले गया था। गांव के लोगों ने पुत्री को ले जाते देखा था। वादी की तहरीर के आधार पर मोनू सिंह के विरुद्ध 20 फरवरी को मदनापुर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। विवेचना के दौरान पीड़िता के बयानों के आधार पर धारा 376 की वृद्धि की गई।
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पीड़िता के बयान होने के बाद मदनापुर क्षेत्र के एक गांव निवासी रामनिवास, साधू सिंह उर्फ कृष्णपाल सिंह, राम उर्फ दिनेश और मोनू सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र अदालत भेजा गया। फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात एवं सरकारी वकील के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी मोनू सिंह को दोषी पाते हुए उसे दस वर्ष के कारावास और 30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया। साक्ष्य के अभाव में रामनिवास, साधू सिंह और राम उर्फ दिनेश को बरी कर दिया गया।
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