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घटिया बीज विक्रेताओं के बिक्री लाइसेंस निलंबित, नोटिस जारी
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शाहजहांपुर। महाराष्ट्र की कंपनी के घटिया गौरी ब्रांड बीज की बिक्री करने के मामले में प्रशासन ढिलाई देने के मूड में नहीं है। धान का घटिया बीज बेचने के आरोपी तीन दुकानदारों के बिक्री लाइसेंस जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक ने निलंबित कर दिए हैं। साथ ही उन्हें नोटिस जारी कर विभाग से बीज सत्यापित नहीं कराने के बारे में 15 दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा गया है। संबंधित बीज विक्रेताओं के संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर संबंधित विक्रेताओं के बिक्री लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएंगे। मामले मेें कंपनी के निदेशकों समेत सात बीज विक्रेताओं के खिलाफ पहले ही रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है।
यह है मामला
गत 17 सितंबर को गौरी बीज के धान की बालियों में दाना नहीं पड़ने की कृषि विभाग को पहली शिकायत मीरानपुर कटरा क्षेत्र के गांव रमापुर उत्तरी से आए 33 किसानों से मिली थी। इसी तरह की दूसरी शिकायत पांच दिन बाद गढ़िया रंगीन के 20 किसानों से मिली। अगले दिन गांव करकौर (जैतीपुर) के किसानों ने भी कृषि विभाग से इसी आशय की शिकायत की तो जिला कृषि अधिकारी ने कृषि पर्यवेक्षकों की टीमें बनाकर संबंधित किसानों के खेतों की स्थलीय जांच कराई। जांच में इन शिकायतों की पुष्टि होने के साथ यह भी स्पष्ट हुआ कि जनपद के कुल 177 किसानों की 1070 हेक्टेयर में बोई गई गौरी धान की फसल खराब हुई है। इस पर 23 सितंबर को सदर कोतवाली में बीज निर्माता कंपनी, इस कंपनी के सात निदेशक और सात विक्रेताओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
दुकानदारों ने गांवों तक भेजा बीज
किसानों के बयान और संबंधित विक्रेताओं से पूछताछ में यह भी पता चला कि कई दुकानदारों ने खुद अपने कर्मचारियों को कई गांवों में भेजकर किसानों को गौरी ब्रांड धान बीज सप्लाई कराया। किसानों को झांसा दिया गया कि इस बीज से प्रति बीघा पांच-छह क्विंटल के बजाय आठ क्विंटल तक धान निकलेगा। अधिक उपज के लोभ में कई किसानों ने घर बैठे बीज खरीद लिया। मामले मेें कंपनी के निदेशकों समेत जिन दुकानदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, उनमें बरेली स्थित जय दुर्गा बीज भंडार के संचालक पुष्पेंद्र माहेश्वरी, वहीं के मेसर्स सुनील पाठक बीज भंडार के सुनील पाठक, फरीदपुर (बरेली) स्थित सुनील कुमार बीज भंडार के सुनील अग्रवाल, चंदौसी (संभल) स्थित बालाजी ट्रेडर्स के मयंक अग्रवाल, किसान कृषि रक्षा केंद्र गढ़िया रंगीन के नत्थू लाल गुप्ता, वहीं स्थित जय मां बीज भंडार के अमित कुमार और जैतीपुर स्थित कश्यप एग्रो एजेंसी के संचालक विजय कुमार शामिल हैं। इनमें से जनपद की तीनों दुकानेें निलंबित कर दी गई हैं।
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मुआवजा मिलने में लगेगा थोड़ा वक्त
जिन किसानों को घटिया बीज से फसली क्षति हुई है, उन्हें नुकसान की भरपाई और मुआवजा के लिए अलग से कोई आवेदन नहीं करना होगा क्योंकि उनके दाना रहित बालियों वाले खेतों का सत्यापन कराया जा चुका है, लेकिन भुगतान मिलने में एक से दो माह का वक्त लग सकता है। अधिकारियों के अनुसार जिसे क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं, वहां सरकारी खरीद शुरू होने के बाद शासन से नियत मानक के अनुरूप नमी वाले धान की क्रय केंद्रों पर आवक होने पर क्रॉप कटिंग कराकर प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादकता का आकलन किया जाएगा। इसी उत्पादकता के आधार पर प्रभावित क्षेत्र की फसल का अनुमान लगाकर समर्थन मूल्य के आधार पर किसानों को भुगतान कराया जाएगा। मुआवजा का भुगतान इस पर भी निर्भर करेगा कि दर्ज रिपोर्ट पर पुलिस कब तक आरोप पत्र दाखिल करती है।
बीज सत्यापित कराकर किसान करें बुआई
जिला कृषि अधिकारी डॉ. पाठक ने किसानों को सलाह दी है कि फसल कोई भी बोनी हो, जहां तक संभव हो राजकीय गोदामों से बीज खरीदें और खुले बाजार में केवल उन्हीं विश्वसनीय विक्रेताओं से बीज की खरीद करें, जिनकी बाजार में अच्छी साख हो और बीज की गुणवत्ता को लेकर पहले कभी कोई दिक्कत नहीं हुई हो। उन्होंने कहा कि बीज खरीदते समय दुकानदार से खरीद लेना किसान अपनी आदत बना लें, क्योंकि ऐसी दशा मेें कोई धोखाधड़ी होने पर त्वरित कार्रवाई हो सकेगी। डीएओ डॉ. पाठक के अनुसार बीज खरीदने के बाद ब्लॉक स्तर पर एडीओ (कृषि) से बीज की गुणवत्ता का सत्यापन कराना भी भविष्य में मुश्किलों से बचा सकता है। ग्राम पंचायत व न्यायपंचायत मुख्यालय पर तैनात विभाग के तकनीकी सहायकों, बीटीएम (ब्लॉक टेक्नालॉजी मैनेजर) और एटीएम (असिस्टेंट टेक्नालॉजी मैनेजर) भी बीज की गुणवत्ता परखने में सक्षम है।
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यह है मामला
गत 17 सितंबर को गौरी बीज के धान की बालियों में दाना नहीं पड़ने की कृषि विभाग को पहली शिकायत मीरानपुर कटरा क्षेत्र के गांव रमापुर उत्तरी से आए 33 किसानों से मिली थी। इसी तरह की दूसरी शिकायत पांच दिन बाद गढ़िया रंगीन के 20 किसानों से मिली। अगले दिन गांव करकौर (जैतीपुर) के किसानों ने भी कृषि विभाग से इसी आशय की शिकायत की तो जिला कृषि अधिकारी ने कृषि पर्यवेक्षकों की टीमें बनाकर संबंधित किसानों के खेतों की स्थलीय जांच कराई। जांच में इन शिकायतों की पुष्टि होने के साथ यह भी स्पष्ट हुआ कि जनपद के कुल 177 किसानों की 1070 हेक्टेयर में बोई गई गौरी धान की फसल खराब हुई है। इस पर 23 सितंबर को सदर कोतवाली में बीज निर्माता कंपनी, इस कंपनी के सात निदेशक और सात विक्रेताओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
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दुकानदारों ने गांवों तक भेजा बीज
किसानों के बयान और संबंधित विक्रेताओं से पूछताछ में यह भी पता चला कि कई दुकानदारों ने खुद अपने कर्मचारियों को कई गांवों में भेजकर किसानों को गौरी ब्रांड धान बीज सप्लाई कराया। किसानों को झांसा दिया गया कि इस बीज से प्रति बीघा पांच-छह क्विंटल के बजाय आठ क्विंटल तक धान निकलेगा। अधिक उपज के लोभ में कई किसानों ने घर बैठे बीज खरीद लिया। मामले मेें कंपनी के निदेशकों समेत जिन दुकानदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, उनमें बरेली स्थित जय दुर्गा बीज भंडार के संचालक पुष्पेंद्र माहेश्वरी, वहीं के मेसर्स सुनील पाठक बीज भंडार के सुनील पाठक, फरीदपुर (बरेली) स्थित सुनील कुमार बीज भंडार के सुनील अग्रवाल, चंदौसी (संभल) स्थित बालाजी ट्रेडर्स के मयंक अग्रवाल, किसान कृषि रक्षा केंद्र गढ़िया रंगीन के नत्थू लाल गुप्ता, वहीं स्थित जय मां बीज भंडार के अमित कुमार और जैतीपुर स्थित कश्यप एग्रो एजेंसी के संचालक विजय कुमार शामिल हैं। इनमें से जनपद की तीनों दुकानेें निलंबित कर दी गई हैं।
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मुआवजा मिलने में लगेगा थोड़ा वक्त
जिन किसानों को घटिया बीज से फसली क्षति हुई है, उन्हें नुकसान की भरपाई और मुआवजा के लिए अलग से कोई आवेदन नहीं करना होगा क्योंकि उनके दाना रहित बालियों वाले खेतों का सत्यापन कराया जा चुका है, लेकिन भुगतान मिलने में एक से दो माह का वक्त लग सकता है। अधिकारियों के अनुसार जिसे क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं, वहां सरकारी खरीद शुरू होने के बाद शासन से नियत मानक के अनुरूप नमी वाले धान की क्रय केंद्रों पर आवक होने पर क्रॉप कटिंग कराकर प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादकता का आकलन किया जाएगा। इसी उत्पादकता के आधार पर प्रभावित क्षेत्र की फसल का अनुमान लगाकर समर्थन मूल्य के आधार पर किसानों को भुगतान कराया जाएगा। मुआवजा का भुगतान इस पर भी निर्भर करेगा कि दर्ज रिपोर्ट पर पुलिस कब तक आरोप पत्र दाखिल करती है।
बीज सत्यापित कराकर किसान करें बुआई
जिला कृषि अधिकारी डॉ. पाठक ने किसानों को सलाह दी है कि फसल कोई भी बोनी हो, जहां तक संभव हो राजकीय गोदामों से बीज खरीदें और खुले बाजार में केवल उन्हीं विश्वसनीय विक्रेताओं से बीज की खरीद करें, जिनकी बाजार में अच्छी साख हो और बीज की गुणवत्ता को लेकर पहले कभी कोई दिक्कत नहीं हुई हो। उन्होंने कहा कि बीज खरीदते समय दुकानदार से खरीद लेना किसान अपनी आदत बना लें, क्योंकि ऐसी दशा मेें कोई धोखाधड़ी होने पर त्वरित कार्रवाई हो सकेगी। डीएओ डॉ. पाठक के अनुसार बीज खरीदने के बाद ब्लॉक स्तर पर एडीओ (कृषि) से बीज की गुणवत्ता का सत्यापन कराना भी भविष्य में मुश्किलों से बचा सकता है। ग्राम पंचायत व न्यायपंचायत मुख्यालय पर तैनात विभाग के तकनीकी सहायकों, बीटीएम (ब्लॉक टेक्नालॉजी मैनेजर) और एटीएम (असिस्टेंट टेक्नालॉजी मैनेजर) भी बीज की गुणवत्ता परखने में सक्षम है।