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छत्तीसगढ़ में फंसे मजदूर वापस पहुंचे घर खिले चेहरे
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जैतीपुर। छत्तीसगढ़ में फंसे शाहजहांपुर के 30 मजदूर सोमवार को सरकारी बसों में अपने घर लौट आए। इनमें गढ़िया रंगीन से 20, ग्राम केसीनगला से दो, मोहटा, जिगनिया, खिरिया रतन, इमलिया खुर्द के एक-एक और मलरिया मिर्जापुर गांव से चार मजदूर हैं।
करीब तीन महीने पहले सभी 30 मजदूर छत्तीसगढ़ के जिला कबीरधाम के ग्राम भगतपुर स्थित एक गुड़ कारखाने में काम करने गए थे। वहां दो महीने काम सही चला। फिर कोरोना की वजह से कारखाना बंद हो गया। पूरे देश में लॉकडाउन होने से वे के चलते उन्हें कोई आशा नहीं जगी, छत्तीसगढ़ में फंस गए। जब राज्य सरकारों ने प्रवासी मजदूरों को वापस बुलाने का फैसला लिया तो उन्हें घर लौटने की उम्मीद जगी। इसके लिए वहां के प्रशासन द्वारा फार्म भरवाया गया है और ऑनलाइन पास के लिए आवेदन किया।
मजदूर सुशील शर्मा ने बताया वहां उनके पास खाने के लिए रुपये तक नहीं बचे। कारखाना मालिक भी उनका हाल जानने नहीं आया। ना ही वहां के प्रशासन ने राशन और खाने का कोई इंतजाम किया। तब इन मजदूरों ने फोन पर एसडीएम तिलहर को अपनी पीड़ा बताई। इसके दो दिन बाद कारखाना मालिक ने सभी मजदूरों को उत्तर प्रदेश की सीमा सोनभद्र तक एक गाड़ी में पहुंचा दिया। वहां से यूपी सरकार ने भेजी बस में सभी मजदूर सोमवार को तिलहर पहुंच गए। जांच के बाद सभी को गढ़िया रंगीन के शेल्टर होम मैं रखा गया है।इनमें रामलड़ैते, रूपा, मुस्कान, पवन, शिल्पी, दुर्गा, अरमान ,शिव शंकर, गुड्डू, अशोक, अंकुल अनिल, सुशील शर्मा, नेक्सू यादव, नन्हे शर्मा, अभिषेक शर्मा, पवन शर्मा, मुलायम यादव, विजय यादव, रिंकू, सूरजपाल, आकाश, कल्लू यादव, गोविंद, रामवीर, मिथुन, सुभाष, रामवीर शामिल हैं।
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करीब तीन महीने पहले सभी 30 मजदूर छत्तीसगढ़ के जिला कबीरधाम के ग्राम भगतपुर स्थित एक गुड़ कारखाने में काम करने गए थे। वहां दो महीने काम सही चला। फिर कोरोना की वजह से कारखाना बंद हो गया। पूरे देश में लॉकडाउन होने से वे के चलते उन्हें कोई आशा नहीं जगी, छत्तीसगढ़ में फंस गए। जब राज्य सरकारों ने प्रवासी मजदूरों को वापस बुलाने का फैसला लिया तो उन्हें घर लौटने की उम्मीद जगी। इसके लिए वहां के प्रशासन द्वारा फार्म भरवाया गया है और ऑनलाइन पास के लिए आवेदन किया।
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मजदूर सुशील शर्मा ने बताया वहां उनके पास खाने के लिए रुपये तक नहीं बचे। कारखाना मालिक भी उनका हाल जानने नहीं आया। ना ही वहां के प्रशासन ने राशन और खाने का कोई इंतजाम किया। तब इन मजदूरों ने फोन पर एसडीएम तिलहर को अपनी पीड़ा बताई। इसके दो दिन बाद कारखाना मालिक ने सभी मजदूरों को उत्तर प्रदेश की सीमा सोनभद्र तक एक गाड़ी में पहुंचा दिया। वहां से यूपी सरकार ने भेजी बस में सभी मजदूर सोमवार को तिलहर पहुंच गए। जांच के बाद सभी को गढ़िया रंगीन के शेल्टर होम मैं रखा गया है।इनमें रामलड़ैते, रूपा, मुस्कान, पवन, शिल्पी, दुर्गा, अरमान ,शिव शंकर, गुड्डू, अशोक, अंकुल अनिल, सुशील शर्मा, नेक्सू यादव, नन्हे शर्मा, अभिषेक शर्मा, पवन शर्मा, मुलायम यादव, विजय यादव, रिंकू, सूरजपाल, आकाश, कल्लू यादव, गोविंद, रामवीर, मिथुन, सुभाष, रामवीर शामिल हैं।
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