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महंगाई: दालों और खाद्य तेलों के दाम चढ़ने से बिगड़ा घरेलू बजट
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शाहजहांपुर। पिछले साल लॉकडाउन के बाद से खाद्य तेलों और दालों के दाम लगातार उछल रहे हैं। इससे मध्य आय वर्गीय परिवारों के लोग बेहद परेशान हैं। पिछले वर्ष अगस्त तक अरहर की दाल के दाम 60 से 65 रुपये प्रति किलो थे, जो अब बढ़कर 100-110 रुपये प्रति किलो हो गए है।
अरहर के अलावा मसूर, उड़द, चना, मूंग, लोबिया आदि दालों के दाम भी पिछले दो माह में 10 से 15 फीसदी चढ़ गए हैं। यही नहीं, पिछले वर्ष इन्हीं दिनों में 85 से 90 रुपये किलो बिकने वाला सरसों तेल 145 से 150 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। किराना के थोक कारोबारियों का कहना है कि दक्षिण-मध्य भारत के राज्यों मेें हुई भारी वर्षा से सरसों और दालों के उत्पादन में कमी आई है। वहां से इन वस्तुओं का ढुलाई भाड़ा बढ़ने से चीजों के थोक और फुटकर दाम बढ़े हैं।
हरी सब्जियां थोड़ी सस्ती हुई हैं, लेकिन दालें और तेल की कीमतें बेकाबू हो रही हैं। आम आदमी दाल-रोटी पर निर्भर रहता है। इन चीजों की खरीदारी करना लोगों की मजबूरी है। - भरत सिंह, मोहल्ला अंजान चौकी
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पिछले साल लॉकडाउन लगने पर सरकार ने गरीबों का पेट भरने की बहुत चिंता की, लेकिन अब आम आदमी की कोई परवाह नहीं की जा रही। दालों और खाद्य तेलों के दाम नियंत्रित करने की जरूरत है। - अमरनाथ, मोहल्ला खलील शर्की
किराना कारोबारी की बात
पिछले वर्ष मानसून सीजन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि दक्षिणी राज्यों में भारी वर्षा से आई बाढ़ के कारण दलहन और तिलहन की फसलें खराब हो गईं। इन वस्तुओं पर महंगाई लाने की बाकी कसर डीजल के बेतहाशा बढ़े दामों ने पूरी कर दी, जिसका सीधा असर माल भाड़ा पर पड़ा है। - रामा गुप्ता, बहादुरगंज गल्ला मंडी
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अरहर के अलावा मसूर, उड़द, चना, मूंग, लोबिया आदि दालों के दाम भी पिछले दो माह में 10 से 15 फीसदी चढ़ गए हैं। यही नहीं, पिछले वर्ष इन्हीं दिनों में 85 से 90 रुपये किलो बिकने वाला सरसों तेल 145 से 150 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। किराना के थोक कारोबारियों का कहना है कि दक्षिण-मध्य भारत के राज्यों मेें हुई भारी वर्षा से सरसों और दालों के उत्पादन में कमी आई है। वहां से इन वस्तुओं का ढुलाई भाड़ा बढ़ने से चीजों के थोक और फुटकर दाम बढ़े हैं।
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हरी सब्जियां थोड़ी सस्ती हुई हैं, लेकिन दालें और तेल की कीमतें बेकाबू हो रही हैं। आम आदमी दाल-रोटी पर निर्भर रहता है। इन चीजों की खरीदारी करना लोगों की मजबूरी है। - भरत सिंह, मोहल्ला अंजान चौकी
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पिछले साल लॉकडाउन लगने पर सरकार ने गरीबों का पेट भरने की बहुत चिंता की, लेकिन अब आम आदमी की कोई परवाह नहीं की जा रही। दालों और खाद्य तेलों के दाम नियंत्रित करने की जरूरत है। - अमरनाथ, मोहल्ला खलील शर्की
किराना कारोबारी की बात
पिछले वर्ष मानसून सीजन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि दक्षिणी राज्यों में भारी वर्षा से आई बाढ़ के कारण दलहन और तिलहन की फसलें खराब हो गईं। इन वस्तुओं पर महंगाई लाने की बाकी कसर डीजल के बेतहाशा बढ़े दामों ने पूरी कर दी, जिसका सीधा असर माल भाड़ा पर पड़ा है। - रामा गुप्ता, बहादुरगंज गल्ला मंडी