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हाईटेंशन लाइनों से फसलें जलने पर विद्युत विभाग करेगा क्षतिपूर्ति
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शाहजहांपुर। इन दिनों तेज हवा के कारण ग्रामीण क्षेत्रों मेें खेतों के ऊपर से निकलीं हाईटेंशन लाइनों के तार टकराने से उनमें स्पार्किंग से गेहूं की कटने को तैयार फसल में आग लगने की घटनाएं एकाएक बढ़ गई हैं। पावर कारपोरेशन के अभियंताओं का कहना है कि संबंधित किसानों से ऐसे मामलों में मिलने वाली शिकायतों और दावों की विद्युत सुरक्षा विभाग से जांच कराई जाती है और उसमें विभाग की लापरवाही प्रमाणित होने पर समुचित मुआवजा दिया जाता है।
इस वर्ष जिले के लगभग चार लाख से ज्यादा किसानों ने 2.73 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल तैयार की है। फसल को असमय बारिश, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, बिजली गिरने से नुकसान होने की दशा में किसानों को फसल बीमा योजना से क्षतिपूर्ति करने का प्रावधान है। ऋणी किसानों का फसली बीमा स्वत: हो जाता है, लेकिन गैर ऋणी किसानों को फसलों पर बीमा सुरक्षा पाने के लिए आवेदन करना होता है।
इस योजना में बिजली लाइनों से आग लगने पर फसलों को होने वाली क्षति को शामिल नहीं किया गया है।
पावर कारपोरेशन के अधिशासी अभियंता (ग्रामीण) वेद प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि यदि बिजली के तार टूटने या फिर स्पार्किंग से लगी आग की चपेट मेें आकर फसल जलकर नष्ट होती है तो संबंधित किसान को अपने क्षेत्र के उपखंड अभियंता को भू स्वामित्व के प्रमाण (खसरा-खतौनी) सहित लिखित प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा। एसडीओ एक निर्धारित प्रारूप पर नुकसान और उसके कारण का ब्योरा अंकित कर जांच के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय को भेज दिया जाता है। जांच मेें विभाग की लापरवाही प्रमाणित होने पर संबंधित किसान को राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा दिया जाता है।
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विद्युत विभाग के एसडीओ से जारी निर्धारित प्रपत्र में दर्शाए गए स्थान पर विद्युत सुरक्षा विभाग के अभियंताओं से लाइन की जांच कराई जाती है। जांच में विभाग की कमी से फसल जलने की पुष्टि होने पर इसी आशय की रिपोर्ट संबंधित एसडीओ को भेज दी जाती है, लेकिन विद्युत विभाग क्षति का आकलन तहसील के अधिकारियों से कराता है। तहसीलदार के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम जली फसल के आसपास वाले खेत की क्रॉप कटिंग कराकर प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादकता का आकलन करता है और तहसील की इसी रिपोर्ट के आधार पर विद्युत विभाग के स्तर से मुआवजा स्वीकृत होता है।
-रामसूरत राठौर, सहायक निदेशक (सेवानिवृत्त), विद्युत सुरक्षा विभाग
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इस वर्ष जिले के लगभग चार लाख से ज्यादा किसानों ने 2.73 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल तैयार की है। फसल को असमय बारिश, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, बिजली गिरने से नुकसान होने की दशा में किसानों को फसल बीमा योजना से क्षतिपूर्ति करने का प्रावधान है। ऋणी किसानों का फसली बीमा स्वत: हो जाता है, लेकिन गैर ऋणी किसानों को फसलों पर बीमा सुरक्षा पाने के लिए आवेदन करना होता है।
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इस योजना में बिजली लाइनों से आग लगने पर फसलों को होने वाली क्षति को शामिल नहीं किया गया है।
पावर कारपोरेशन के अधिशासी अभियंता (ग्रामीण) वेद प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि यदि बिजली के तार टूटने या फिर स्पार्किंग से लगी आग की चपेट मेें आकर फसल जलकर नष्ट होती है तो संबंधित किसान को अपने क्षेत्र के उपखंड अभियंता को भू स्वामित्व के प्रमाण (खसरा-खतौनी) सहित लिखित प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा। एसडीओ एक निर्धारित प्रारूप पर नुकसान और उसके कारण का ब्योरा अंकित कर जांच के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय को भेज दिया जाता है। जांच मेें विभाग की लापरवाही प्रमाणित होने पर संबंधित किसान को राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा दिया जाता है।
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विद्युत विभाग के एसडीओ से जारी निर्धारित प्रपत्र में दर्शाए गए स्थान पर विद्युत सुरक्षा विभाग के अभियंताओं से लाइन की जांच कराई जाती है। जांच में विभाग की कमी से फसल जलने की पुष्टि होने पर इसी आशय की रिपोर्ट संबंधित एसडीओ को भेज दी जाती है, लेकिन विद्युत विभाग क्षति का आकलन तहसील के अधिकारियों से कराता है। तहसीलदार के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम जली फसल के आसपास वाले खेत की क्रॉप कटिंग कराकर प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादकता का आकलन करता है और तहसील की इसी रिपोर्ट के आधार पर विद्युत विभाग के स्तर से मुआवजा स्वीकृत होता है।
-रामसूरत राठौर, सहायक निदेशक (सेवानिवृत्त), विद्युत सुरक्षा विभाग