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चिन्मयानंद के खिलाफ दुष्कर्म के पुराने मामले की पत्रावली सीजेएम कोर्ट भेजी गई
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शाहजहांपुर। चिन्मयानंद के खिलाफ चल रहे दुष्कर्म के पुराने मामले की पत्रावली शुक्रवार को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट को नियमानुसार कार्यवाही के लिए भेज दी गई।
एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट एडीजे तृतीय किरनपाल सिंह ने आदेश दिया कि चिन्मयानंद के खिलाफ चल रहे दुष्कर्म के पुराने मामले की पत्रावली का अवलोकन करने से जानकारी मिली कि यह पत्रावली इससे पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में विचाराधीन थी। इलाहाबाद में एमपी-एमएलए की स्पेशल कोर्ट स्थापित होने पर यह पत्रावली दो अप्रैल 2019 को बिना सत्र न्यायालय को सुपुर्द किए स्पेशल कोर्ट इलाहाबाद भेज दी गई थी। जब जिला स्तर पर स्पेशल कोर्ट खोली गई तो पत्रावली यहां स्थानांतरित कर दी गई। इस पत्रावली में चिन्मयानंद के खिलाफ दुष्कर्म और धमकी देने का आरोप पत्र दाखिल किया गया, जो सत्र न्यायालय में विचारणीय है। लिहाजा धारा 209 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत सत्र सुपुर्दगी के होने पर मामले के विचारण की कार्यवाही की जा सकती है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा अभी तक चिन्मयानंद के इस मामले को सत्र न्यायालय के सुपुर्द नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में पत्रावली नियमानुसार कार्यवाही के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में वापस किया जाना उचित एवं न्याय संगत है। कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देशित किया जाता है कि इस पत्रावली को नियमानुसार सत्र न्यायालय के सुपुर्द करें। इसके बाद पत्रावली सीजेएम कोर्ट भेज दी गई।
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एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट एडीजे तृतीय किरनपाल सिंह ने आदेश दिया कि चिन्मयानंद के खिलाफ चल रहे दुष्कर्म के पुराने मामले की पत्रावली का अवलोकन करने से जानकारी मिली कि यह पत्रावली इससे पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में विचाराधीन थी। इलाहाबाद में एमपी-एमएलए की स्पेशल कोर्ट स्थापित होने पर यह पत्रावली दो अप्रैल 2019 को बिना सत्र न्यायालय को सुपुर्द किए स्पेशल कोर्ट इलाहाबाद भेज दी गई थी। जब जिला स्तर पर स्पेशल कोर्ट खोली गई तो पत्रावली यहां स्थानांतरित कर दी गई। इस पत्रावली में चिन्मयानंद के खिलाफ दुष्कर्म और धमकी देने का आरोप पत्र दाखिल किया गया, जो सत्र न्यायालय में विचारणीय है। लिहाजा धारा 209 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत सत्र सुपुर्दगी के होने पर मामले के विचारण की कार्यवाही की जा सकती है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा अभी तक चिन्मयानंद के इस मामले को सत्र न्यायालय के सुपुर्द नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में पत्रावली नियमानुसार कार्यवाही के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में वापस किया जाना उचित एवं न्याय संगत है। कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देशित किया जाता है कि इस पत्रावली को नियमानुसार सत्र न्यायालय के सुपुर्द करें। इसके बाद पत्रावली सीजेएम कोर्ट भेज दी गई।
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