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चार माह गुजर गए किताबें मिलीं न ड्रेस
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परिषदीय प्राथमिक विद्यालय महमंद जलालनगर कन्या में बिना स्कूली ड्रेस के बच्चे । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। मुख्यमंत्री भले ही बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में कॉन्वेंट जैसी पढ़ाई का दावा करें मगर यह धरातल पर उतरता नहीं दिख रहा। सत्र शुरू होने के बावजूद बच्चों को अभी तक न किताबें मिलीं हैं और न ही ड्रेस। आलम यह है कि पुरानी किताबों से बच्चे पढ़ रहे हैं। एक किताब से कई बच्चे पढ़ते हैं। इस बार एक जुलाई के बजाय बीते अप्रैल में ही परिषदीय विद्यालय खुल गए। किताबें न होने से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति ढर्रे पर नहीं आ रही। नई ड्रेस और नई किताब का इंतजार भी खत्म नहीं हुआ है। स्कूल में शिक्षकों की कमी भी है।
एक ही किताब से पढ़ती मिलीं छात्राएं
कंपोजिट विद्यालय रोटी गोदाम में एक ही किताब से तीन छात्राएं पढ़ती मिली। छात्राओं ने बताया कि उनमें से एक के ही पास पुरानी किताब है। सहायक अध्यापिका खुशबू सबूर ने बताया कि कंपोजिट विद्यालय में 306 बच्चे पंजीकृत हैं, इनमें जूनियर के पंजीकृत 156 बच्चों में 65 उपस्थित हैं। संविलियन विद्यालय परिसर में चल रहे कटिया टोला, बहादुरगंज, रंगीन चौपाल के प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति आधी से भी कम रहती है।
बच्चों को पढ़ा रहा था बाहरी व्यक्ति
कंपोजिट विद्यालय रोटी गोदाम में कक्षा चार व पांच के बच्चों को एक बाहरी व्यक्ति पढ़ाता मिला। वह शिक्षक की कुर्सी पर बैठा था और बच्चे शोरगुल कर रहे थे। उसने बताया कि वह कक्षा में बच्चों की देखरेख करने आता है। कक्षा के बच्चों के पास भी किताबें और ड्रेस नहीं थी। बच्चों ने बताया कि वह पुरानी किताबों से ही पढ़ रहे हैं।
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बिना ड्रेस के मिले पुख्ता तालाबा के बच्चे
प्राथमिक विद्यालय पुख्ता तालाब के बच्चों के पास भी किताबों का अभाव मिला। अधिकांश बच्चे बिना स्कूल ड्रेस के ही विद्यालय आए हुए थे। विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोहम्मद मुख्ताक ने बताया कि पंजीकृत 87 बच्चों में 41 बच्चे उपस्थित हैं। एक शिक्षामित्र गीता देवी हैं। इसी परिसर में प्राथमिक विद्यालय तारीन टिकली एक शिक्षामित्र अर्शी परवीन के भरोसे चलता मिला। इनमें पंजीकृत 51 बच्चों में से 33 ही आए। शिक्षक नियुक्त करने की आवश्यकता है।
महमंद जलालनगर कन्या में बैठने की जगह कम
परिषदीय प्राथमिक विद्यालय महमंद जलालनगर कन्या में बिना स्कूली ड्रेस के बच्चे पढ़ने आए हुए थे। उनके पास किताबें भी नहीं थी। कुछ बच्चों के पास किताबें थी, उनसे ही दूसरे बच्चे भी पढ़ते मिले। विद्यालय की प्रधानाध्यापक सुम्बुल खान ने बताया कि पंजीकृत 59 बच्चों में 20 ही उपस्थित हैं। इसी परिसर में चल रहे प्राथमिक विद्यालय बाडूजई सेकेंड कन्या में पंजीकृत 61 बच्चों में 34 उपस्थिति रही। स्कूल में बच्चों के बैठने की जगह भी कम है।
पुरानी किताब से ही पढ़ाई कर रहे हैं। ड्रेस भी नहीं बनी है। उनके मम्मी-पापा के खाते में अभी ड्रेस के लिए रुपये नहीं आए हैं। जब रुपये आएंगे तब ही ड्रेस खरीद पाएंगे। - सुमन, छात्रा
टीचर ने पुरानी किताब दी है, उसी से पढ़ाई कर रहे हैं। मेरी सहेली सोनाक्षी के पास किताब नहीं है, उसको साथ में पढ़ा लेते हैं। पुरानी ड्रेस पहनकर स्कूल आते हैं। - नेहा, छात्रा
किताब और ड्रेस कुछ भी नहीं है। स्कूल में दोस्तों के साथ पढ़ते हैं। टीचर ब्लैकबोर्ड पर लिखकर और पुरानी किताबों से पढ़ाते हैं। पढ़ाई करना अच्छा लगता है। - लद्दाख, छात्र
मैंने इस साल कक्षा चार में प्रवेश लिया है। रोजाना पढ़ने के लिए स्कूल आते हैं, टीचर पढ़ाती है। लेकिन मेरे पास किताब नहीं है। दूसरे की किताब से पढ़ते हैं। - चांदनी, छात्रा
बच्चों को पुस्तकें उपलब्ध कराना प्राथमिकता में है। सत्यापन सूची भेज दी गई है। महीने के अंत तक पुस्तकें मिलने की पूरी संभावना है। पुस्तकों की आपूर्ति होते ही बच्चों को उपलब्ध करा दी जाएंगी। - सुरेंद्र सिंह, बीएसए
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एक ही किताब से पढ़ती मिलीं छात्राएं
कंपोजिट विद्यालय रोटी गोदाम में एक ही किताब से तीन छात्राएं पढ़ती मिली। छात्राओं ने बताया कि उनमें से एक के ही पास पुरानी किताब है। सहायक अध्यापिका खुशबू सबूर ने बताया कि कंपोजिट विद्यालय में 306 बच्चे पंजीकृत हैं, इनमें जूनियर के पंजीकृत 156 बच्चों में 65 उपस्थित हैं। संविलियन विद्यालय परिसर में चल रहे कटिया टोला, बहादुरगंज, रंगीन चौपाल के प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति आधी से भी कम रहती है।
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बच्चों को पढ़ा रहा था बाहरी व्यक्ति
कंपोजिट विद्यालय रोटी गोदाम में कक्षा चार व पांच के बच्चों को एक बाहरी व्यक्ति पढ़ाता मिला। वह शिक्षक की कुर्सी पर बैठा था और बच्चे शोरगुल कर रहे थे। उसने बताया कि वह कक्षा में बच्चों की देखरेख करने आता है। कक्षा के बच्चों के पास भी किताबें और ड्रेस नहीं थी। बच्चों ने बताया कि वह पुरानी किताबों से ही पढ़ रहे हैं।
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बिना ड्रेस के मिले पुख्ता तालाबा के बच्चे
प्राथमिक विद्यालय पुख्ता तालाब के बच्चों के पास भी किताबों का अभाव मिला। अधिकांश बच्चे बिना स्कूल ड्रेस के ही विद्यालय आए हुए थे। विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोहम्मद मुख्ताक ने बताया कि पंजीकृत 87 बच्चों में 41 बच्चे उपस्थित हैं। एक शिक्षामित्र गीता देवी हैं। इसी परिसर में प्राथमिक विद्यालय तारीन टिकली एक शिक्षामित्र अर्शी परवीन के भरोसे चलता मिला। इनमें पंजीकृत 51 बच्चों में से 33 ही आए। शिक्षक नियुक्त करने की आवश्यकता है।
महमंद जलालनगर कन्या में बैठने की जगह कम
परिषदीय प्राथमिक विद्यालय महमंद जलालनगर कन्या में बिना स्कूली ड्रेस के बच्चे पढ़ने आए हुए थे। उनके पास किताबें भी नहीं थी। कुछ बच्चों के पास किताबें थी, उनसे ही दूसरे बच्चे भी पढ़ते मिले। विद्यालय की प्रधानाध्यापक सुम्बुल खान ने बताया कि पंजीकृत 59 बच्चों में 20 ही उपस्थित हैं। इसी परिसर में चल रहे प्राथमिक विद्यालय बाडूजई सेकेंड कन्या में पंजीकृत 61 बच्चों में 34 उपस्थिति रही। स्कूल में बच्चों के बैठने की जगह भी कम है।
पुरानी किताब से ही पढ़ाई कर रहे हैं। ड्रेस भी नहीं बनी है। उनके मम्मी-पापा के खाते में अभी ड्रेस के लिए रुपये नहीं आए हैं। जब रुपये आएंगे तब ही ड्रेस खरीद पाएंगे। - सुमन, छात्रा
टीचर ने पुरानी किताब दी है, उसी से पढ़ाई कर रहे हैं। मेरी सहेली सोनाक्षी के पास किताब नहीं है, उसको साथ में पढ़ा लेते हैं। पुरानी ड्रेस पहनकर स्कूल आते हैं। - नेहा, छात्रा
किताब और ड्रेस कुछ भी नहीं है। स्कूल में दोस्तों के साथ पढ़ते हैं। टीचर ब्लैकबोर्ड पर लिखकर और पुरानी किताबों से पढ़ाते हैं। पढ़ाई करना अच्छा लगता है। - लद्दाख, छात्र
मैंने इस साल कक्षा चार में प्रवेश लिया है। रोजाना पढ़ने के लिए स्कूल आते हैं, टीचर पढ़ाती है। लेकिन मेरे पास किताब नहीं है। दूसरे की किताब से पढ़ते हैं। - चांदनी, छात्रा
बच्चों को पुस्तकें उपलब्ध कराना प्राथमिकता में है। सत्यापन सूची भेज दी गई है। महीने के अंत तक पुस्तकें मिलने की पूरी संभावना है। पुस्तकों की आपूर्ति होते ही बच्चों को उपलब्ध करा दी जाएंगी। - सुरेंद्र सिंह, बीएसए