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Shahjahanpur News: बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे को नगर पंचायत ने बना दिया डंपिंग ग्राउंड
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अल्हागंज। यातायात के लिहाज से अति व्यस्त बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे को नगर पंचायत ने डंपिंग ग्राउंड बना दिया है। हाईवे के किनारे दोनों दिशाओं में करीब दो किमी के दायरे में घरों से निकलने वाला कूड़ा-कचरा डाला जा रहा है। यही नहीं, कचरे के ढेर से उठती दुर्गंध और उसे जलाए जाने से धुंआ वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। हाईवे के किनारे लगे कूड़े के अंबार से सरकार के स्वच्छता अभियान पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
हाईवे के बाइपास से बरेली की ओर बढ़ते या फिर फर्रुखाबाद की ओर रुख करते ही हाईवे की पटरियां घरेलू कूड़े-कचरे के ढेर से घिरी दिखती हैं। गंदगी के इन ढेरों पर खाने की तलाश में छुट्टा पशु मंडराते रहते हैं। जहां एक ओर सरकार प्रदूषण की रोकथाम के लिए पराली जलाने वाले किसानों पर सख्ती कर रही है, वहीं हाईवे के किनारे घरेलू कचरा खुलेआम जलाया जा रहा है। कूड़े के ढेर से उठता जहरीला धुआं उधर से निकलने वाले राहगीरों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
नगर पंचायत प्रशासन का दावा है कि घरों और बाजारों से रोजाना निकलने वाला करीब तीन टन कचरा हाईवे के किनारे गढ़िया मंगोला गांव में बनाए गए एमआरएफ केंद्र (मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर) भेजा जा रहा है, लेकिन गंदगी से घिरे हाईवे के फुटपाथ सच्चाई खुद बयां कर रहे हैं। नगर पंचायत के कर्मचारियों को कई बार मृत पशुओं को भी खुले में कचरे के ढेर पर फेंकते हुए देखा जा चुका है। चूंकि, हाईवे से देवस्थान मार्ग जुड़ा है, इसलिए मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को काफी असुविधा होती है।
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नगर पंचायत के पास घरेलू कूड़ा कचरा इकट्ठा करने के लिए ऐसी कोई जगह नहीं है, जिसे डंपिंग ग्राउंड बनाया जा सके। नगर का कूड़ा-कचरा निस्तारण के लिए वाहनों से एमआरएफ सेंटर भेजा जाता है। हाईवे के किनारे कूड़ा जलाने वालों की प्रशासन को जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
-शैलेश कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत अल्हागंज
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हाईवे के बाइपास से बरेली की ओर बढ़ते या फिर फर्रुखाबाद की ओर रुख करते ही हाईवे की पटरियां घरेलू कूड़े-कचरे के ढेर से घिरी दिखती हैं। गंदगी के इन ढेरों पर खाने की तलाश में छुट्टा पशु मंडराते रहते हैं। जहां एक ओर सरकार प्रदूषण की रोकथाम के लिए पराली जलाने वाले किसानों पर सख्ती कर रही है, वहीं हाईवे के किनारे घरेलू कचरा खुलेआम जलाया जा रहा है। कूड़े के ढेर से उठता जहरीला धुआं उधर से निकलने वाले राहगीरों के लिए मुसीबत बना हुआ है।
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नगर पंचायत प्रशासन का दावा है कि घरों और बाजारों से रोजाना निकलने वाला करीब तीन टन कचरा हाईवे के किनारे गढ़िया मंगोला गांव में बनाए गए एमआरएफ केंद्र (मेटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर) भेजा जा रहा है, लेकिन गंदगी से घिरे हाईवे के फुटपाथ सच्चाई खुद बयां कर रहे हैं। नगर पंचायत के कर्मचारियों को कई बार मृत पशुओं को भी खुले में कचरे के ढेर पर फेंकते हुए देखा जा चुका है। चूंकि, हाईवे से देवस्थान मार्ग जुड़ा है, इसलिए मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को काफी असुविधा होती है।
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नगर पंचायत के पास घरेलू कूड़ा कचरा इकट्ठा करने के लिए ऐसी कोई जगह नहीं है, जिसे डंपिंग ग्राउंड बनाया जा सके। नगर का कूड़ा-कचरा निस्तारण के लिए वाहनों से एमआरएफ सेंटर भेजा जाता है। हाईवे के किनारे कूड़ा जलाने वालों की प्रशासन को जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
-शैलेश कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत अल्हागंज