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ग्राम निधि घोटाला : कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की पंचायतीराज निदेशक से संस्तुति
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शाहजहांपुर। कलान में नगर पंचायत का गठन होने के बाद इसमें शामिल की गई ग्राम पंचायत रफियाबाद के ग्राम निधि खाते से सरकारी डोंगल के जरिये 15.77 लाख रुपये की धनराशि गबन कर उसे अलग-अलग बैंक खातों में भेजने के मामले में फंसे सरकारी कर्मचारियों पर अब विभागीय स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक रही है। अधिकारियों के अनुसार गबन में नामजद सभी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पंचायती राज निदेशक को डीएम के माध्यम से संस्तुति भेजी गई है।
इसकी शासन स्तर पर शिकायत की गई थी। पंचायती राज विभाग के देवीपाटन मंडल के उप निदेशक आरएस चौधरी के स्तर से की गई जांच में शिकायत सही पाई गई थी। बाद में पंचायती राज निदेशक के आदेश पर जिला पंचायत राज अधिकारी पवन कुमार ने कलान थाने में ब्लॉक प्रमुख रुचि वर्मा, उनके पति राहुल वर्मा, अतिरिक्त जिला कार्यक्रम प्रबंधक (एडीपीएम) देवी लाल मौर्य, संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर केशरी नंदन, पंचायत सचिव अरुण निगम, गोंडा स्थानांतरित हो चुके एडीओ पंचायत धनराज पटेल, निर्माण सामग्री आपूर्ति करने वाले कारोबारी पंकज कुमार, संजीव कुमार, गुड्डू और पीयूष गुप्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 7/ के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस ने आरंभिक विवेचना में मामला गबन का पाते हुए एफआईआर से भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा हटा दी थी। गत शुक्रवार को प्रथम दृष्टया गबन के दोषी पाए गए एडीपीएम व कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भिजवा दिया था। बीते दिन डीएम के निर्देश पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने कलान के एडीओ पंचायत प्रेम सागर यादव को मिर्जापुर ब्लॉक स्थानांतरित कर उनका अतिरिक्त प्रभार पंचायत सचिव अजीत कुमार को सौंप दिया। पंचायत सचिव ने बुधवार को कलान ब्लॉक कार्यालय जाकर एडीओ का प्रभार संभाल लिया।
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जेल भेजे जा चुके संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर केशरी नंदन को डीएम के आदेश पर डीपीआरओ पवन कुमार ने बीते दिन सेवा से बर्खास्त कर दिया। उन्होंने बताया कि कंप्यूटर ऑपरेटर को सेवामुक्त कर उसे नियोक्ता कंपनी को भेज दिया है। डीएम के निर्देशानुसार घोटाले के कई आरोपियों से गबन की गई धनराशि की वसूली कराने के लिए उनके बैंक खाते फ्रीज करा दिए हैं। अब घोटाले में फंसे शेष तीनों कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इनमें एडीपीएम देवी लाल मौर्य समेत तबादले पर जा चुके एडीओ धनराज पटेल और ग्राम पंचायत सचिव अरुण निगम शामिल हैं। बताया कि पंचायत सचिव पहले भी निलंबित हो चुके हैं।
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इसकी शासन स्तर पर शिकायत की गई थी। पंचायती राज विभाग के देवीपाटन मंडल के उप निदेशक आरएस चौधरी के स्तर से की गई जांच में शिकायत सही पाई गई थी। बाद में पंचायती राज निदेशक के आदेश पर जिला पंचायत राज अधिकारी पवन कुमार ने कलान थाने में ब्लॉक प्रमुख रुचि वर्मा, उनके पति राहुल वर्मा, अतिरिक्त जिला कार्यक्रम प्रबंधक (एडीपीएम) देवी लाल मौर्य, संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर केशरी नंदन, पंचायत सचिव अरुण निगम, गोंडा स्थानांतरित हो चुके एडीओ पंचायत धनराज पटेल, निर्माण सामग्री आपूर्ति करने वाले कारोबारी पंकज कुमार, संजीव कुमार, गुड्डू और पीयूष गुप्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 7/ के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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पुलिस ने आरंभिक विवेचना में मामला गबन का पाते हुए एफआईआर से भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा हटा दी थी। गत शुक्रवार को प्रथम दृष्टया गबन के दोषी पाए गए एडीपीएम व कंप्यूटर ऑपरेटर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भिजवा दिया था। बीते दिन डीएम के निर्देश पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने कलान के एडीओ पंचायत प्रेम सागर यादव को मिर्जापुर ब्लॉक स्थानांतरित कर उनका अतिरिक्त प्रभार पंचायत सचिव अजीत कुमार को सौंप दिया। पंचायत सचिव ने बुधवार को कलान ब्लॉक कार्यालय जाकर एडीओ का प्रभार संभाल लिया।
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जेल भेजे जा चुके संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर केशरी नंदन को डीएम के आदेश पर डीपीआरओ पवन कुमार ने बीते दिन सेवा से बर्खास्त कर दिया। उन्होंने बताया कि कंप्यूटर ऑपरेटर को सेवामुक्त कर उसे नियोक्ता कंपनी को भेज दिया है। डीएम के निर्देशानुसार घोटाले के कई आरोपियों से गबन की गई धनराशि की वसूली कराने के लिए उनके बैंक खाते फ्रीज करा दिए हैं। अब घोटाले में फंसे शेष तीनों कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इनमें एडीपीएम देवी लाल मौर्य समेत तबादले पर जा चुके एडीओ धनराज पटेल और ग्राम पंचायत सचिव अरुण निगम शामिल हैं। बताया कि पंचायत सचिव पहले भी निलंबित हो चुके हैं।