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समय से निकाल लेते तो बच सकती थी दोनों की जान

Mon, 26 Jul 2021 01:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 26 Jul 2021 01:00 AM IST
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accident
शाहजहांपुर। बेटे को बचाने के लिए मेंथा प्लांट के टैंक में घुसी महिला और उसी गांव के ग्रामीण की मौत हो गई थी। परिजन का कहना है कि अग दोनों को समय से बाहर निकाल लिया जाता तो उनकी जान बच सकती थी।
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धियरिया गांव निवासी वीरपाल की कई साल पहले मौत हो गई थी। इससे परिवार का पालन पोषण उनकी पत्नी विद्यावती करती थीं। उन्होंने गांव में मेंथा प्लांट लगा रखा था। शनिवार शाम करीब सात बजे विद्यावती का बड़ा बेटा रहीस सफाई करने के लिए टैंक में घुसा। बताते है कि टैंक में गैस होने के कारण रहीस की तबीयत बिगड़ने लगी। उसके चिल्लाने पर वहां मौजूद विद्यावती और प्लांट पर मजदूरी करने वाला गांव वहीं का मुरली हड़बड़ा गए और बिना सोचे समझे वे दोनों भी टैंक में घुस गए। दोनों ने मिलकर रहीस को बाहर निकाल दिया। इस दौरान शोरशराबा सुनकर एकत्र हुए ग्रामीण रहीस का हालचाल पूछने में लग गए। मगर टैंक में मौजूद विद्यावती और मुरली को बाहर निकालने का ख्याल उन लोगों के दिमाग मे नहीं आया। इस बीच टैंक में मौजूद वे दोनों बाहर निकलने की जद्दोजहद करते रहे लेकिन जहरीली गैस के प्रभाव से वे दोनों बेहोश हो गए।
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छोटे बेटे सेवाराम ने बताया कि 10-15 मिनट बाद जब ध्यान आया कि उसकी मां विद्यावती और मुरली अभी टैंक में ही हैं। सब लोग टैंक की तरफ गए तो टैंक में दोनों बेहोश पड़े थे। गांव से सीढ़ी मंगाने के बाद उन दोनों को टैंक से बाहर निकालने के बाद अस्पताल ले जाया गया। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टर ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। सभी लोगों को बहुत अफसोस था कि अगर समय रहते दोनों को निकाल लिया होता तो शायद जान न जाती। पोस्टमार्टम के बाद रविवार दोपहर दोनों शव गांव पहुंचे तो रोते-बिलखते परिजन अपनी लापरवाही को भी कोस रहे थे। विद्यावती के दो बेटे और एक बेटी शादीशुदा हैं। मां की मौत ने उन सभी को अंदर तक झकझोर दिया। पिता की मौत के समय वे सभी छोटे थे तब विद्यावती ने दोहरी जिम्मेदारी का निर्वहन कर बच्चो को पिता की कमी का अहसास नहीं होने दिया। मेहनत कर गांव में प्लांट लगाया और सभी की शादी कर उनका घर बसाया। प्लांट ही परिवार की आमदनी का जरिया था लेकिन वह विद्यावती की मौत का सबब साबित हुआ।
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मैंथा क्रिस्टल कई रासायनिक प्रक्रियाएं अपनाने के बाद तैयार होता है और इस दौरान मैंथा टैंक से कई गैसें उत्सर्जित होती हैं। इसलिए यह कहना कठिन है कि किस गैस के असर से टैंक में घुसे लोगों की मौत हुई, लेकिन इतना तय है कि उसमें जो भी गैस होगी, वह विषाक्त रही होगी। हो सकता है कि टैंक में पहले से पड़े फसल अपशिष्ट अपघटित होकर सड़ने से उत्पन्न गैस की रासायनिक क्रिया से घातक गैस बनी हो, लेकिन यह मामले की जांच से स्पष्ट होगा।
- शिवशंकर गौतम, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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