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Shahjahanpur News: हाईवे पर हुए हादसे में युवक की मौत
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मनोज का फाइल फोटो। स्रोत: परिजन
शाहजहांपुर। लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर तिलहर थाना क्षेत्र में नगरिया चौकी स्थित एक पेट्रोल पंप के पास शुक्रवार रात ट्रक की टक्कर लगने से तिलहर थाना क्षेत्र के रोशनपुर गांव निवासी बाइक सवार मनोज (27) की मौत हो गई। इसके एक घंटे बाद तिलहर के निजी अस्पताल में मृतक की पत्नी सरस्वती ने बेटे को जन्म दिया। गम और खुशी के इस माहौल में हर किसी की आंख से आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
सेवाराम ने बताया कि बेटे मनोज की शादी करीब पांच साल पूर्व सरस्वती से हुई थी। बहू गर्भवती थी। शुक्रवार रात प्रसव पीड़ा होने पर बेटा बहू को लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज गया। वहां सरस्वती को भर्ती नहीं किया गया। स्टाफ ने डॉक्टर न होने की बात कही। कहा कि ऑपरेशन होगा, लेकिन इस समय यहां कोई डॉक्टर नहीं है।
इसके बाद बेटे ने कार बुक की। मनोज ने पत्नी को तिलहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए परिवार की महिलाओं के साथ कार से भेज दिया। वह खुद पीछे बाइक से चल दिया। बेटे मनोज के साथ दूसरी बाइक से बड़ा बेटा रमेश भी तिलहर की ओर जा रहा था। दोनों की बाइकें काफी दूरी पर थीं।
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सेवाराम ने बताया कि रात करीब 12 बजे नगरिया मोड़ स्थित पेट्रोल पंप के पास किसी वाहन की टक्कर लगने से मनोज बाइक से काफी दूर जाकर गिरा। गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पीछे चल रहे बेटे रमेश के जरिये हादसे की जानकारी हुई। सीओ ज्योति यादव ने बताया कि युवक की मौत के मामले में हादसा किस वाहन से हुआ, इसका पता लगाया जा रहा है।
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लापरवाही : बहू को भर्ती कर लिया होता तो यह दिन नहीं देखना पड़ता
राजकीय मेडिकल कॉलेज में रात के समय काफी अव्यवस्था रहती है। खासतौर पर महिला अस्पताल में अधिकारियों के निगरानी न करने से डॉक्टर ड्यूटी से नदारद रहते हैं। बहुत इमरजेंसी पड़ने पर कॉल करने पर उपलब्ध होते हैं। ऐसे में स्टाफ भी मरीजों को टरकाता रहता है। सेवाराम ने बताया कि बेटे की मौत के एक घंटे बाद बहू ने ऑपरेशन से एक बेटे को जन्म दिया है। बहू को बेटे की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। कुछ समझ में नहीं आ रहा कि यह बात बहू को कैसे बताएं, लेकिन बहू बार-बार अपने पति के बारे में पूछ रही है। सेवाराम ने इस हादसे का जिम्मेदार मेडिकल कॉलेज को भी ठहराया है। उनका कहना है कि अगर बहू को भर्ती कर लिया जाता तो शायद यह हादसा टल जाता। इतना बड़ा अस्पताल और कोई सुविधा नहीं। बेटा करीब एक घंटा बहू को लिए मेडिकल कॉलेज में ही रहा। वहीं, मृतक के शव को देख मां रामजानकी, भाई रमेश व रामवीर का रो-रोकर हाल बेहाल हो गया है।
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सेवाराम ने बताया कि बेटे मनोज की शादी करीब पांच साल पूर्व सरस्वती से हुई थी। बहू गर्भवती थी। शुक्रवार रात प्रसव पीड़ा होने पर बेटा बहू को लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज गया। वहां सरस्वती को भर्ती नहीं किया गया। स्टाफ ने डॉक्टर न होने की बात कही। कहा कि ऑपरेशन होगा, लेकिन इस समय यहां कोई डॉक्टर नहीं है।
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इसके बाद बेटे ने कार बुक की। मनोज ने पत्नी को तिलहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए परिवार की महिलाओं के साथ कार से भेज दिया। वह खुद पीछे बाइक से चल दिया। बेटे मनोज के साथ दूसरी बाइक से बड़ा बेटा रमेश भी तिलहर की ओर जा रहा था। दोनों की बाइकें काफी दूरी पर थीं।
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सेवाराम ने बताया कि रात करीब 12 बजे नगरिया मोड़ स्थित पेट्रोल पंप के पास किसी वाहन की टक्कर लगने से मनोज बाइक से काफी दूर जाकर गिरा। गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पीछे चल रहे बेटे रमेश के जरिये हादसे की जानकारी हुई। सीओ ज्योति यादव ने बताया कि युवक की मौत के मामले में हादसा किस वाहन से हुआ, इसका पता लगाया जा रहा है।
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लापरवाही : बहू को भर्ती कर लिया होता तो यह दिन नहीं देखना पड़ता
राजकीय मेडिकल कॉलेज में रात के समय काफी अव्यवस्था रहती है। खासतौर पर महिला अस्पताल में अधिकारियों के निगरानी न करने से डॉक्टर ड्यूटी से नदारद रहते हैं। बहुत इमरजेंसी पड़ने पर कॉल करने पर उपलब्ध होते हैं। ऐसे में स्टाफ भी मरीजों को टरकाता रहता है। सेवाराम ने बताया कि बेटे की मौत के एक घंटे बाद बहू ने ऑपरेशन से एक बेटे को जन्म दिया है। बहू को बेटे की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। कुछ समझ में नहीं आ रहा कि यह बात बहू को कैसे बताएं, लेकिन बहू बार-बार अपने पति के बारे में पूछ रही है। सेवाराम ने इस हादसे का जिम्मेदार मेडिकल कॉलेज को भी ठहराया है। उनका कहना है कि अगर बहू को भर्ती कर लिया जाता तो शायद यह हादसा टल जाता। इतना बड़ा अस्पताल और कोई सुविधा नहीं। बेटा करीब एक घंटा बहू को लिए मेडिकल कॉलेज में ही रहा। वहीं, मृतक के शव को देख मां रामजानकी, भाई रमेश व रामवीर का रो-रोकर हाल बेहाल हो गया है।

मनोज का फाइल फोटो। स्रोत: परिजन