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माता-पिता और गुरु के ऋण से कभी मुक्त नहीं हो सकते
Updated Wed, 06 Sep 2017 05:55 PM IST
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मीरानपुर कटरा (शाहजहांपुर)। स्टेशन रोड स्थित भूमिसेन महाराज देवस्थान पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक बालकृष्ण महाराज ने कहा कि पुत्र अपने माता-पिता और गुरु के ऋण से कभी मुक्त नहीं हो सकता। स्वयं श्रीकृष्ण ने अपने माता-पिता से भी यही कहा है। जो पुत्र अपने माता-पिता की सेवाएं आदर-सम्मान के साथ नहीं करता, वे चाहें जो भी हों नरक को प्राप्त होते हैं।
कथावाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण ने गोपियों को ज्ञान संदेश देने के लिए उद्धव जी को उनके पास भेजा था, परंतु गोपियों के निष्काम प्रेम ने उन्हें जीत लिया। इसलिए निष्काम भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ और भगवान की कृपा प्राप्त करने का एकमात्र माध्यम है। इस अवसर पर कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की मनोहर झांकी सजाई गई। कथा में श्रोताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
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कथावाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण ने गोपियों को ज्ञान संदेश देने के लिए उद्धव जी को उनके पास भेजा था, परंतु गोपियों के निष्काम प्रेम ने उन्हें जीत लिया। इसलिए निष्काम भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ और भगवान की कृपा प्राप्त करने का एकमात्र माध्यम है। इस अवसर पर कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की मनोहर झांकी सजाई गई। कथा में श्रोताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
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