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नवदिया बंकी जंगल से खेत में आया बाघ
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खेत की रखवाली कर रहे किसान के मचान के नीचे पहुंचा बाघ, दहशत
बंडा (शाहजहांपुर)। नवदिया बंकी क्षेत्र में एक बार फिर बाघ की दस्तक से दहशत का माहौल है। गेहूं की फसल की रखवाली कर रहे के जंगल से निकल कर बाघ खेतों में आ गया। इससे वहां अफरा तफरी मच गई। फसल की रखवाली कर रहे श्रमिकों और किसानों ने शोर मचाया तो बाघ वापस जंगल में चला गया। बाघ देखे जाने से जंगल के आसपास बसे गांवों के लोगों में दहशत है।
गांव गहलुईया के अमरीक सिंह और गुरजीत सिंह के खेत में श्रमिक हरिश्चंद्र और पाला रखवाली का काम करते हैं। जंगली पशुओं से फसल को बचा रहे श्रमिकों ने खेत में ऊंचे मचान बना रखे हैं। श्रमिक मचानों पर ही हरते हैं। मचान के नीचे आग आदि भी जलाकर रखी जाती है। जिससे वन्य पशु खेतों से दूर रहते हैं। हरिश्चंद्र और पाला ने बताया कि रविवार रात बाघ उनके मचान के पास आ गया। आहट होने पर उन लोगों ने टार्च की रोशनी डाली तो बाघ देखकर दोनों के होश फाख्ता हो गए।
श्रमिकों के शोर मचाने पर बाघ जंगल की ओर चला गया। उधर शोर सुनकर गांव में भी खलबली मच गई। बाघ के कारण पहले से ही आशंकित गांव के लोगों ने जमकर पटाखे चलाए और शोर मचाया। फार्म मालिक ने मोबाइल से हरिश्चंद्र से जानकारी ली। दोनों को सुरक्षित जान लोगों ने चैन की सांस ली। सोमवार को तमाम लोग खेतों में पहुंचे और बाघ के पगमार्क देखकर वनकर्मियों को सूचना दी। सूचना के बाद भी कोई वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। फारेस्ट गार्ड सत्यपाल ने बताया कि बाघ देखे जाने के संबंध में उन्हें सूचना नहीं दी गई है। गांव गहलुइया, नवदिया बंकी, बरीबरा आदि के लोगों ने बाघ को जंगल के अंदर खदेड़े जाने की मांग की है।
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बंडा (शाहजहांपुर)। नवदिया बंकी क्षेत्र में एक बार फिर बाघ की दस्तक से दहशत का माहौल है। गेहूं की फसल की रखवाली कर रहे के जंगल से निकल कर बाघ खेतों में आ गया। इससे वहां अफरा तफरी मच गई। फसल की रखवाली कर रहे श्रमिकों और किसानों ने शोर मचाया तो बाघ वापस जंगल में चला गया। बाघ देखे जाने से जंगल के आसपास बसे गांवों के लोगों में दहशत है।
गांव गहलुईया के अमरीक सिंह और गुरजीत सिंह के खेत में श्रमिक हरिश्चंद्र और पाला रखवाली का काम करते हैं। जंगली पशुओं से फसल को बचा रहे श्रमिकों ने खेत में ऊंचे मचान बना रखे हैं। श्रमिक मचानों पर ही हरते हैं। मचान के नीचे आग आदि भी जलाकर रखी जाती है। जिससे वन्य पशु खेतों से दूर रहते हैं। हरिश्चंद्र और पाला ने बताया कि रविवार रात बाघ उनके मचान के पास आ गया। आहट होने पर उन लोगों ने टार्च की रोशनी डाली तो बाघ देखकर दोनों के होश फाख्ता हो गए।
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श्रमिकों के शोर मचाने पर बाघ जंगल की ओर चला गया। उधर शोर सुनकर गांव में भी खलबली मच गई। बाघ के कारण पहले से ही आशंकित गांव के लोगों ने जमकर पटाखे चलाए और शोर मचाया। फार्म मालिक ने मोबाइल से हरिश्चंद्र से जानकारी ली। दोनों को सुरक्षित जान लोगों ने चैन की सांस ली। सोमवार को तमाम लोग खेतों में पहुंचे और बाघ के पगमार्क देखकर वनकर्मियों को सूचना दी। सूचना के बाद भी कोई वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। फारेस्ट गार्ड सत्यपाल ने बताया कि बाघ देखे जाने के संबंध में उन्हें सूचना नहीं दी गई है। गांव गहलुइया, नवदिया बंकी, बरीबरा आदि के लोगों ने बाघ को जंगल के अंदर खदेड़े जाने की मांग की है।
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