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गुजरा साल, बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिला आशियाना

Tue, 28 Jun 2022 11:12 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jun 2022 11:12 PM IST
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Year passed, flood victims did not get shelter
एमबीडी एमबीडी बांध पर शरण लिए गायघाट दक्षिणी गांव के लोग।संवाद - फोटो : KHALILABAD
गुजरा साल, बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिला आशियाना
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पिछले साल घाघरा की कटान से नदी में समा गए थे 34 परिवारों के मकान और खेत
एमबीडी बांध पर प्लास्टिक की पन्नी तान कर गुजर कर रहे बाढ़ पीड़ित
धनघटा(संतकबीरनगर)। पिछले साल घाघरा नदी की कटाने से बेघर हुए 34 परिवार खानाबदोश की जिंदगी गुजारने को विवश हैं। कुछ बाढ़ पीड़ित एमबीडी बांध पर प्लास्टिक की पन्नी तान कर रह रहे हैं तो कुछ परिवार तिघरा में किराए के मकान में रह रहे हैं। प्रशासन इन्हें बसने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करा पाया है। बाढ़ पीड़ितों का दर्द है कि एक साल बाद भी प्रशासन उन्हें बसाने के लिए इंतजाम नहीं कर पाया है।
पिछले तीन वर्षों से कटान करती हुई घाघरा नदी पहले गायघाट दक्षिणी, रामपुर दक्षिणी, दौलतपुर, औराडाड़, कंचनपुर आदि गांवों के किसानों की खेती योग्य भूमि अपने में समाहित कर लिया। उसके बाद कटान करते हुए घाघरा नदी गायघाट दक्षिणी को निशाने पर ले लिया। पिछले वर्ष नदी की कटान से गायघाट दक्षिणी निवासी वुद्धिराम, सुरेंद्र, दिलीप, ईशदेव, रविंद्र, मिठाई, धर्मेंद्र, नंदू, ताराचंद, सुंदर, रामप्रीत, प्रदीप, नागेंद्र, मुन्नर, बालेंद्र, उषा देवी, जगदीश, मोरनी, राजू, श्याम पति, बहादुर, विफन, दूधनाथ, पार्वती, इंदल और पलटन का मकान धारा में समा गई। तभी से इन परिवारों के कुछ लोग एमबीडी बांध पर प्लास्टिक की पन्नी के नीचे रहकर जीवन बिता रहे हैं। वहीं कुछ लोग तिघरा आदि जगहों पर किराए के मकान में रह रहे हैं।
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पीड़ित ईशदेव, रविंद्र, पार्वती, इंदर ने बताया कि खेत और मकान नदी की धारा में समा जाने के बाद न तो खाने का ठिकाना है और न ही रहने का इंतजाम। करीब एक वर्ष से इधर-उधर रहकर पेट पाल रहे हैं। बसने के लिए जमीन देने का वादा प्रशासन के लोग करते चले आ रहे हैं, लेकिन साल गुजरने को हैं और अब तक जमीन नहीं दिया। ठंडी, गर्मी और बरसात में जब परेशानी उठानी पड़ती है तो आंखों से आंसू निकलते हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि कोटे की दुकान से अनाज मिल जाता है। इससे रोटी नसीब हो जा रही है, लेकिन इस तरह का जीवन कब तक चलेगा।
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ग्राम प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू का कहना है कि जिन लोगों का मकान पिछले वर्ष नदी की कटान से कट गया है, उनके बसने के लिए जमीन की तलाश प्रशासन के लोग पूरी नहीं कर पाए। जिन 14 लोगों को जमीन दी गई है, वहां बसने लायक नहीं है। इसीलिए पीड़ित परिवार उस जमीन पर घर नहीं बनवा रहे हैं। नदी ने इस वर्ष भी कटान करना शुरू कर दिया है। इससे लोग अपना-अपना मकान उजाड़ रहे हैं। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष भी कटान उसी तरह हुई तो गायघाट दक्षिणी गांव पूरी तरह नदी की धारा में समा जाएगा। संवाद

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कोट
जिन लोगों का मकान पिछले वर्षों घाघरा नदी की कटान से कट गया था, उनमें से 14 परिवार के बसने के लिए जमीन की व्यवस्था कर दी गई है। शेष लोगों को जल्द जमीन उपलब्ध कराकर उन्हें बसा दिया जाएगा।
-रत्नेश तिवारी, तहसीलदार
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