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घटने लगा घाघरा नदी का जलस्तर
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धनघटा में घट रहा घाघरा नदी का जलस्तर।
- फोटो : KHALILABAD
घटने लगा घाघरा नदी का जलस्तर
- तटवर्ती गांव के लोगों ने ली राहत की सांस
धनघटा। दो दिन तेजी के साथ घाघरा नदी के जलस्तर में वृद्धि होने के बाद शुक्रवार को नदी का पानी घटता देख नदी के तटवर्ती गांव के लोगों ने राहत की सांस ली। गांव वालों का कहना है कि जिस तरह पानी बढ़ रहा था, उसे देख कर यही प्रतीत हो रहा था कि नदी तबाही मचाएगी।
बुधवार से घाघरा नदी के जलस्तर में वृद्धि होनी शुरू हुई तो बृहस्पतिवार की शाम तक नदी का पानी 78.700 सेंटीमीटर पर पहुंच गया। नदी का पानी बढ़ने से गांव की तरफ फैलने लगा। पानी फैलता देख गायघाट दक्षिणी, चपरा पूर्वी, जगदीशपुर, दौलतपुर, चकदहा, खाले पुरवा, ढोल बजा समेत एमबीडी बांध नदी के बीच बसे 37 गांव के लोग बाढ़ की आशंका से भयभीत होने लगे। गांव वालों का कहना था कि नदी इसी तरह बढ़ी तो दो से तीन दिनों के भीतर कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे, लेकिन शुक्रवार सुबह नदी के जलस्तर में गिरावट शुरू हुई तो शाम तक 15 सेंटीमीटर घटकर नदी का पानी 78. 550 सेंटी मीटर पर पहुंच गया। नदी का पानी कम होने से गांव के लोग राहत महसूस करने लगे। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीश चंद्र ने बताया कि दो दिन जलस्तर बढ़ा था, उसके बाद कम होना शुरू हो गया। नदी के पानी से कहीं पर कोई नुकसान नहीं है।
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- तटवर्ती गांव के लोगों ने ली राहत की सांस
धनघटा। दो दिन तेजी के साथ घाघरा नदी के जलस्तर में वृद्धि होने के बाद शुक्रवार को नदी का पानी घटता देख नदी के तटवर्ती गांव के लोगों ने राहत की सांस ली। गांव वालों का कहना है कि जिस तरह पानी बढ़ रहा था, उसे देख कर यही प्रतीत हो रहा था कि नदी तबाही मचाएगी।
बुधवार से घाघरा नदी के जलस्तर में वृद्धि होनी शुरू हुई तो बृहस्पतिवार की शाम तक नदी का पानी 78.700 सेंटीमीटर पर पहुंच गया। नदी का पानी बढ़ने से गांव की तरफ फैलने लगा। पानी फैलता देख गायघाट दक्षिणी, चपरा पूर्वी, जगदीशपुर, दौलतपुर, चकदहा, खाले पुरवा, ढोल बजा समेत एमबीडी बांध नदी के बीच बसे 37 गांव के लोग बाढ़ की आशंका से भयभीत होने लगे। गांव वालों का कहना था कि नदी इसी तरह बढ़ी तो दो से तीन दिनों के भीतर कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे, लेकिन शुक्रवार सुबह नदी के जलस्तर में गिरावट शुरू हुई तो शाम तक 15 सेंटीमीटर घटकर नदी का पानी 78. 550 सेंटी मीटर पर पहुंच गया। नदी का पानी कम होने से गांव के लोग राहत महसूस करने लगे। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीश चंद्र ने बताया कि दो दिन जलस्तर बढ़ा था, उसके बाद कम होना शुरू हो गया। नदी के पानी से कहीं पर कोई नुकसान नहीं है।
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