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धन निकासी के बाद भी नहीं बने शौचालय
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Mon, 21 May 2018 11:49 PM IST
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कई जगहों पर नहीं मिला शौचालयों का निर्माण और प्रयोग
- फोटो : अमर उजाला
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हैंसर। दो अक्टूबर तक गांव को खुले में शौच मुक्त किए जाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान को पलीता लगाने में न तो ग्राम प्रधान कोर कसर छोड़ रहे और न ही सेक्रेट्री। गांवो में आधा-अधूरा शौचालय निर्माण कराने के बाद उसे ओडीएफ घोषित कर दिए जाने का खेल विकास खंड हैंसर बाजार और पौली में खेला जा रहा है। इस बात को गांव के लोग जिम्मेदारों के समक्ष रखना भी शुरू कर दिए हैं, लेकिन जिम्मेदार काम के दबाव में होने की बात कह कर ग्रामीणों की बातों को अनसुना कर दे रहे हैं। जिससे गांव के लोगों को शौचालय निर्माण में भारी घपलेबाजी होने का संदेह हो रहा है।
ग्राम पंचायतों को ओडीएफ बनाने के लिए पहले छोटे-छोटे मजरों का चयन करके उसे ओडीएफ बनाने का लक्ष्य रखा गया।
इन राजस्व गांवों में घर-घर शौचालय हो इसके लिए ग्राम पंचायत में धन भी भेज दिया गया है, लेकिन किसी गांव में शौचालय के लिए गड्ढा तो किसी में दीवार खड़ी होने के बाद धन की निकासी भी कर ली गई। जब काम पूरा कराने की बारी आई तो मजदूर न मिलने की बात कहते हुए शौचालय निर्माण में ढिलाई बरती जाने लगी। उधर जब शौचालय निर्माण पूरा कराकर गांव को ओडीएफ घोषित करने का दबाव बढ़ा तो आनन-फानन में उन गांवों को ओडीएफ भी कागज में घोषित कर दिया गया। विकास खंड हैंसर बाजार में गायघाट, रामपुर, मनकापार, नेतवापुर, मदरा समेत 65 गांवों को ओडीएफ गांव के रूप में घोषित किया जा चुका है। जबकि इन गांवों में धरातल की हालत कुछ और ही है। किसी भी गांव मे शौचालय का निर्माण उस तरह नहीं किया जा सका है, जो प्रयोग करने योग्य हो। ओडीएफ के रूप में घोषित किए गए गांव के निवासी शिवप्रसाद, कृष्णदेव, कमलेश, सूरज और मनोज आदि का कहना है कि उनके गांव में 80 शौचालय बनाने के लिए धन की निकासी चार माह पहले ही की गई है, लेकिन अभी तक एक भी शौचालय पूर्ण रूप से नहीं बन सका है।
इसी तरह विकास खंड पौली के मंझरिया, भोतहा, दुलमपुर, डिहवा समेत 40 गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है। गांव वालों का कहना है कि अब लाभार्थियों से कहा जा रहा है कि वह शौचालय का निर्माण पूर्ण कराएं। दूसरी तरफ एडीओ पंचायत शिवकुमार तिवारी ने कहा कि उन्हीं गांवों को ओडीएफ घोषित किया जा रहा है जिन गांवों में शत-प्रतिशत शौचालय बनकर तैयार हो गए हैं। जिन गांवों में शौचालय मद में जितना धन निकाला गया है, उन गांवों में उतने शौचालय का निर्माण तो प्रधान और सेक्रेट्री को कराना ही है। इसमें कहीं से भी शिकायत आई तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई करने में देर नहीं लगेगी।
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ग्राम पंचायतों को ओडीएफ बनाने के लिए पहले छोटे-छोटे मजरों का चयन करके उसे ओडीएफ बनाने का लक्ष्य रखा गया।
इन राजस्व गांवों में घर-घर शौचालय हो इसके लिए ग्राम पंचायत में धन भी भेज दिया गया है, लेकिन किसी गांव में शौचालय के लिए गड्ढा तो किसी में दीवार खड़ी होने के बाद धन की निकासी भी कर ली गई। जब काम पूरा कराने की बारी आई तो मजदूर न मिलने की बात कहते हुए शौचालय निर्माण में ढिलाई बरती जाने लगी। उधर जब शौचालय निर्माण पूरा कराकर गांव को ओडीएफ घोषित करने का दबाव बढ़ा तो आनन-फानन में उन गांवों को ओडीएफ भी कागज में घोषित कर दिया गया। विकास खंड हैंसर बाजार में गायघाट, रामपुर, मनकापार, नेतवापुर, मदरा समेत 65 गांवों को ओडीएफ गांव के रूप में घोषित किया जा चुका है। जबकि इन गांवों में धरातल की हालत कुछ और ही है। किसी भी गांव मे शौचालय का निर्माण उस तरह नहीं किया जा सका है, जो प्रयोग करने योग्य हो। ओडीएफ के रूप में घोषित किए गए गांव के निवासी शिवप्रसाद, कृष्णदेव, कमलेश, सूरज और मनोज आदि का कहना है कि उनके गांव में 80 शौचालय बनाने के लिए धन की निकासी चार माह पहले ही की गई है, लेकिन अभी तक एक भी शौचालय पूर्ण रूप से नहीं बन सका है।
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इसी तरह विकास खंड पौली के मंझरिया, भोतहा, दुलमपुर, डिहवा समेत 40 गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है। गांव वालों का कहना है कि अब लाभार्थियों से कहा जा रहा है कि वह शौचालय का निर्माण पूर्ण कराएं। दूसरी तरफ एडीओ पंचायत शिवकुमार तिवारी ने कहा कि उन्हीं गांवों को ओडीएफ घोषित किया जा रहा है जिन गांवों में शत-प्रतिशत शौचालय बनकर तैयार हो गए हैं। जिन गांवों में शौचालय मद में जितना धन निकाला गया है, उन गांवों में उतने शौचालय का निर्माण तो प्रधान और सेक्रेट्री को कराना ही है। इसमें कहीं से भी शिकायत आई तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई करने में देर नहीं लगेगी।
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