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सरकारें बदलीं नहीं खत्म हुआ नशा: पंजाब में दो दशक से एक ही सियासी मुद्दा, 2027 चुनाव में भी सबसे बड़ा सवाल

Fri, 04 Sep 2026 09:04 AM IST
Nivedita सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर Published by: Nivedita Updated Fri, 04 Sep 2026 09:04 AM IST
सार

करीब दो दशक से नशा पंजाब की राजनीति के केंद्र में है। 2007 चुनाव में प्रमुखता से उठा मुद्दा 2027 चुनाव में भी रहेगा। असली सवाल यही है कि कार्रवाई के आंकड़े बढ़ने के बावजूद सप्लाई नेटवर्क और नशे की उपलब्धता कितनी कम हुई।

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Punjab politics issue of drugs persisted for nearly two decades surviving changes in government
पंजाब में नशे का दलदल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब की राजनीति में नशा करीब दो दशक से ऐसा मुद्दा है जो सरकार बदलने के साथ खत्म नहीं हुआ। 2007 के बाद अकाली-भाजपा सरकार फिर 2017 में कांग्रेस और 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार आई। 

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तीनों सरकारों ने नशे के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सवाल फिर वही है कि इतने वर्षों की कार्रवाई के बाद नशे की जड़ कितनी कमजोर हुई और युवा इससे कितना दूर हुआ।
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उपलब्ध सरकारी पुलिस एनसीआरबी एनसीबी और केंद्रीय जांच एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार आप सरकार के दौरान कार्रवाई का पैमाना सबसे बड़ा दिखता है। हालांकि अधिक मामले और गिरफ्तारियां नशे की खपत का सीधा पैमाना नहीं हैं। ये पुलिस की अधिक सक्रियता और मामलों के ज्यादा पंजीकरण का नतीजा भी हो सकते हैं। अब बहस सिर्फ गिरफ्तारियों और बरामदगी की नहीं बल्कि सप्लाई लाइन और बड़े नेटवर्क को तोड़ने की है।
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अकाली-भाजपा सरकार : 6,000 करोड़ के नेटवर्क ने बढ़ाई सियासी तपिश
2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार रही। एनसीआरबी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2007 से 2011 के बीच एनडीपीएस मामलों में 30,422 गिरफ्तारियां हुईं। 2012 से 2015 के बीच 58,511 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। 2012 में 11,715 2013 में 16,821 2014 में 17,084 और 2015 में 12,171 गिरफ्तारियां हुईं। एनसीबी के अनुसार 2015 में पंजाब में 601.88 किलोग्राम हेरोइन जब्त हुई।

इसी दौर में पूर्व डीएसपी और अर्जुन पुरस्कार विजेता पहलवान जगदीश भोला को 2013 में सिंथेटिक ड्रग तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने नेटवर्क का आकार करीब 6,000 करोड़ रुपये बताया। बाद में कई बड़े नाम जांच के दायरे में आए। 2019 में भोला को सजा हुई और 2024 में धनशोधन मामले में भोला समेत 17 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए करीब 12.37 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त करने का आदेश दिया गया।

कांग्रेस से आप तक : कार्रवाई का दायरा बढ़ा पर सवाल कायम
2017 में कांग्रेस सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स बनाई। 2017 से 2021 के उपलब्ध आंकड़ों में 52,255 एनडीपीएस मामले और 68,064 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। करीब 2,412-2,415 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई। दिसंबर 2021 में अकाली नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ एनडीपीएस कानून के तहत मामला दर्ज हुआ। उन्होंने आरोपों से इनकार किया और बाद में जमानत मिली।

मार्च 2022 में भगवंत मान के नेतृत्व में आप सरकार आई और ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान शुरू किया। 2022 से 2026 तक सरकार के अनुसार 73,541 एनडीपीएस मामले दर्ज हुए और 98,596 लोग गिरफ्तार हुए। करीब 5,979 किलोग्राम हेरोइन 93 किलो आईसीई 3,583 किलो अफीम और 8.7 करोड़ फार्मा गोलियां-कैप्सूल जब्त किए गए। 772 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त या ध्वस्त करने और 54.47 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद करने का दावा है। दोषसिद्धि दर करीब 89 प्रतिशत बताई गई है।

तस्करों से पुलिस और नेताओं तक पहुंची जांच
2012 में रंजीत सिंह कंडोला उर्फ राजा कंडोला गिरफ्तार हुआ। उसकी सहयोगी वानिया खन्ना को 2 किलो हेरोइन के साथ पकड़ा गया और उसे 10 साल की सजा हुई। 2013 में एनआरआई अनूप सिंह काहलो 540 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर 16 किलो और सहयोगी की कार से 10 किलो हेरोइन मिली। इसी जांच से भोला नेटवर्क सामने आया।

भोला के साथ फार्मा कारोबारी जगजीत सिंह चहल और पूर्व अकाली नेता मनिंदर सिंह ‘बिट्टू’ औलख के नाम भी सामने आए। 2017 में पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया। उसके सरकारी क्वार्टर से 4 किलो हेरोइन 3 किलो स्मैक हथियार और नकदी मिली। उस पर ड्रग आरोपियों को बचाने के आरोप लगे। 2023 में एसएसपी राजजीत सिंह हुंदल को सेवा से बर्खास्त किया गया। वह ड्रग और भ्रष्टाचार मामलों में फरार हैं और घोषित अपराधी हो चुके हैं।

नेता, पुलिसकर्मी भी धरे गए
2020 में पूर्व एसएसबी सदस्य और अकाली नेता अनवर मसीह गिरफ्तार हुए। उनके मकान से 188-194 किलो हेरोइन और ड्रग प्रोसेसिंग लैब का सामान मिलने का मामला सामने आया। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा को 2021 में ईडी और 2023 में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया। मूल मामले में 2 किलो हेरोइन गुरदेव सिंह से मिली थी। 2024 में खैरा को हाईकोर्ट से जमानत मिली। उन्होंने आरोपों से इनकार किया।

2022 में मजीठिया ने एनडीपीएस मामले में आत्मसमर्पण किया। 2025 में आय से अधिक संपत्ति के कथित 540 करोड़ रुपये के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया। 2024 में पूर्व विधायक सतकार कौर गेहरी को 128 ग्राम हेरोइन के मामले में गिरफ्तार किया गया और भाजपा ने निष्कासित किया। 2025 में पुलिस कांस्टेबल अमनदीप कौर 17 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ी गईं और सेवा से बर्खास्त हुईं। 

खैरा के पूर्व पीएसओ जोगा सिंह को 2015 के मामले में 2025 में दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। मार्च 2026 में तरनतारन के सरपंच परमजीत सिंह उर्फ पम्मा से 18 किलो हेरोइन बरामद होने का मामला सामने आया। इसे सीमा-पार नेटवर्क से जोड़ा गया।
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