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जिले के 66 फीसदी स्कूलों में नहीं है दिव्यांगों के लिए शौचालय
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जिले के 66 फीसदी स्कूलों में नहीं है दिव्यांगों के लिए शौचालय
- दिव्यांगों को होती है परेशानी, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। सरकार जहां दिव्यागों के लिए बेहतर शिक्षा व सुविधा देने का प्रयास कर रही है, वहीं जिले के परिषदीय स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय नहीं बन पाए हैं। 1,247 परिषदीय स्कूलों में से 830 स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय नहीं हैं। जिससे दिव्यांगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में 1,247 परिषदीय स्कूल है। इसमें 250 कंपोजिट विद्यालय, 805 प्राथमिक विद्यालय और 192 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। शासन ने सभी विद्यालयों में दिव्यांगों के लिए अलग से शौचालय बनाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जिले के 830 विद्यालयों में शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है।
कायाकल्प के तहत हुए कार्य, पर नहीं बने शौचालय
जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कायाकल्प के तहत सुंदरीकरण, रंगाई-पुताई व टायल्स लगाने का कार्य हुआ। लेकिन दिव्यांगों के लिए शौचालय का निर्माण नहीं हो सका। जिसकी वजह से दिव्यांग विद्यार्थियों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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जिन स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय नहीं है, वहां पर शौचालय बनवाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए विद्यालयवार सूची सीडीओ को भेजकर ग्राम पंचायत के जरिए शौचालय बनवाने का अनुरोध किया गया है।
- अतुल कुमार तिवारी, बीएसए
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- दिव्यांगों को होती है परेशानी, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। सरकार जहां दिव्यागों के लिए बेहतर शिक्षा व सुविधा देने का प्रयास कर रही है, वहीं जिले के परिषदीय स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय नहीं बन पाए हैं। 1,247 परिषदीय स्कूलों में से 830 स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय नहीं हैं। जिससे दिव्यांगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में 1,247 परिषदीय स्कूल है। इसमें 250 कंपोजिट विद्यालय, 805 प्राथमिक विद्यालय और 192 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। शासन ने सभी विद्यालयों में दिव्यांगों के लिए अलग से शौचालय बनाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जिले के 830 विद्यालयों में शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है।
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कायाकल्प के तहत हुए कार्य, पर नहीं बने शौचालय
जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कायाकल्प के तहत सुंदरीकरण, रंगाई-पुताई व टायल्स लगाने का कार्य हुआ। लेकिन दिव्यांगों के लिए शौचालय का निर्माण नहीं हो सका। जिसकी वजह से दिव्यांग विद्यार्थियों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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जिन स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय नहीं है, वहां पर शौचालय बनवाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए विद्यालयवार सूची सीडीओ को भेजकर ग्राम पंचायत के जरिए शौचालय बनवाने का अनुरोध किया गया है।
- अतुल कुमार तिवारी, बीएसए