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Sant Kabir Nagar News: लोक गायकी और शास्त्रीय संगीत में भी निपुण थीं शारदा
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- शारदा सिन्हा के निधन से संगीत प्रेमियों में शोक की लहर
हरिहरपुर। पद्मश्री से सम्मानित लोक गायिका शारदा सिन्हा के निधन पर संगीत से जुड़े लोगों ने दुख जताया है। जवाहर नवोदय विद्यालय में संगीत शिक्षा की अलख जगा रहे संगीत शिक्षकों ने शारदा सिन्हा के निधन पर संवेदना व्यक्त करते हुए लोक गायकी की विधा के लिए अपूर्णीय क्षति बताया है।
शिक्षकों का कहना है कि शारदा सिन्हा ने लोक गायकी को भक्ति रस में पिरोकर संगीत को अहम मुकाम तक पहुंचाया। लोक गायकी के साथ ही नृत्य और शास्त्रीय संगीत में भी उन्हें महारत हासिल थी। उनकी गैर मौजूदगी संगीत प्रेमियों के लिए पीड़ादायक है।
गायिका की सुरलहरियां मन को आज भी करती हैं स्पंदित
गायिका शारदा सिन्हा के गीतों की सुरलहरियां मन को छू लेने वाली हैं। उन्होंने भक्ति व शृंगार रस के गीतों की बड़े ही खूबसूरत अंदाज में प्रस्तुति दी है। गांव हो या शहर हर जगह लोग उनकी गायकी के कायल रहे हैं। भोजपुरी लोक गीतों के जरिये लोगों के दिलों में बस गईं शारदा सिन्हा का निधन बेहद दुखद है। संगीत प्रेमियों के लिए यह सदमे जैसा है।
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- पंकज तिवारी, संगीत शिक्षक, जवाहर नवोदय विद्यालय
''केलवा के पात पर उगलें सुरुजवा '' छठ गीत से बढ़ी लोकप्रियता
पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित गायिका शारदा सिन्हा का निधन, लोक गायकी के लिए अपूर्णीय क्षति है। उनके गाए छठ पूजा के गीत ''''केलवा के पात पर उगले सुरुजवा'''' से उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ गई थी। उन्होंने भक्ति से लेकर लोक परंपराओं के प्रचलित गीतों को गाकर भोजपुरी भाषा को गायकी में अहम स्थान दिलाया। गायकी के साथ ही नृत्य और शास्त्रीय संगीत में भी उन्हें महारत हासिल थी। उनके निधन से संगीत के क्षेत्र में जो सूनापन आया है, उसकी भरपाई होना काफी मुश्किल है।
- देश दीपक मिश्र, संगीत शिक्षक, जवाहर नवोदय विद्यालय
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हरिहरपुर। पद्मश्री से सम्मानित लोक गायिका शारदा सिन्हा के निधन पर संगीत से जुड़े लोगों ने दुख जताया है। जवाहर नवोदय विद्यालय में संगीत शिक्षा की अलख जगा रहे संगीत शिक्षकों ने शारदा सिन्हा के निधन पर संवेदना व्यक्त करते हुए लोक गायकी की विधा के लिए अपूर्णीय क्षति बताया है।
शिक्षकों का कहना है कि शारदा सिन्हा ने लोक गायकी को भक्ति रस में पिरोकर संगीत को अहम मुकाम तक पहुंचाया। लोक गायकी के साथ ही नृत्य और शास्त्रीय संगीत में भी उन्हें महारत हासिल थी। उनकी गैर मौजूदगी संगीत प्रेमियों के लिए पीड़ादायक है।
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गायिका की सुरलहरियां मन को आज भी करती हैं स्पंदित
गायिका शारदा सिन्हा के गीतों की सुरलहरियां मन को छू लेने वाली हैं। उन्होंने भक्ति व शृंगार रस के गीतों की बड़े ही खूबसूरत अंदाज में प्रस्तुति दी है। गांव हो या शहर हर जगह लोग उनकी गायकी के कायल रहे हैं। भोजपुरी लोक गीतों के जरिये लोगों के दिलों में बस गईं शारदा सिन्हा का निधन बेहद दुखद है। संगीत प्रेमियों के लिए यह सदमे जैसा है।
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- पंकज तिवारी, संगीत शिक्षक, जवाहर नवोदय विद्यालय
''केलवा के पात पर उगलें सुरुजवा '' छठ गीत से बढ़ी लोकप्रियता
पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित गायिका शारदा सिन्हा का निधन, लोक गायकी के लिए अपूर्णीय क्षति है। उनके गाए छठ पूजा के गीत ''''केलवा के पात पर उगले सुरुजवा'''' से उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ गई थी। उन्होंने भक्ति से लेकर लोक परंपराओं के प्रचलित गीतों को गाकर भोजपुरी भाषा को गायकी में अहम स्थान दिलाया। गायकी के साथ ही नृत्य और शास्त्रीय संगीत में भी उन्हें महारत हासिल थी। उनके निधन से संगीत के क्षेत्र में जो सूनापन आया है, उसकी भरपाई होना काफी मुश्किल है।
- देश दीपक मिश्र, संगीत शिक्षक, जवाहर नवोदय विद्यालय