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Sant Kabir Nagar News: हैंसर में तीन गोआश्रय केंद्रों का संचालन ठप
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बंद पड़ा गौ आश्रय केंद्र कोचरी-संवाद
- खेतों को नुकसान पहुंचा रहे छुट्टा पशु
- पिछले वर्ष 20 अक्तूबर के शासनादेश के बाद अब हैंसर ब्लाॅक में चार में से सिर्फ एक गोआश्रय केंद्र का हो रहा संचालन
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। विकास खंड हैंसर बाजार के चार में तीन गोआश्रय केंद्रों का संचालन ठप है। पिछले वर्ष 20 अक्तूबर को जारी शासनादेश के अनुसार जिस केंद्र पर पशुओं की संख्या 30 से कम थी, वहां के पशुओं को बृहद गोआश्रय केंद्रों में भेजने का निर्देश हुआ। निर्देश के क्रम में हैंसर ब्लाॅक में तीन अस्थायी गोआश्रय केंद्र बंद हो गए। वहां मौजूद पशुओं को बृहद गोआश्रय केंद्र मझौरा भेज दिया गया।
दूसरी तरफ गोआश्रय केंद्र बंद होने का सीधा असर हैंसर ब्लाॅक के सिवानो में दिखाई देने लगा है। जहां दर्जनों छुट्टा गोवंश रबी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। इससे किसान चिंता में हैं। हैंसर ब्लाॅक में छुट्टा गोवंशों को अस्थायी गोआश्रय में रखने के लिए मुंडेरा शुक्ल, कोचरी, खैराटी तथा कटया में गोआश्रय केंद्र खोले गए। इसके बाद छुट्टा गोवंशों को अस्थायी गोआश्रय केंद्रों में रखने से क्षेत्र के किसानों को राहत मिली। लेकिन यह राहत बहुत दिनों तक नहीं चल सकी। गोआश्रय केंद्रों में बरती जाने वाली लापरवाही के चलते छुट्टा गोवंशों को पकड़ कर गोआश्रय केंद्रों पर न लाए जाने से अस्थायी गोआश्रय केंद्रों पर पशुओं की संख्या लगातार कम होने लगी।
इस बीच पिछले वर्ष 20 अक्तूबर को जारी शासनादेश के तहत उन गोआश्रय केंद्रों में जहां पशुओं की संख्या 30 से कम रह गई वहां के पशुओं को वृहद गोआश्रय केंद्रों में भेज दिया गया। इससे हैंसर क्षेत्र में मुंडेरा शुक्ल, खैराटी व कोचरी में अस्थायी गो आश्रय केंद्रों का संचालन ठप हो गया। दूसरी तरफ केंद्रों के बंद होने का असर यह रहा कि क्षेत्र में छुट्टा गोवंशों की बाढ़ आ गई।
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मुंडेरा शुक्ल, खैराटी, जिगिना तामा, बंसवारी गांव, बरांव, भैसहीं, औटना, डेबरी, जगदीशपुर, गोपीपुर आदि गांवों के सिवानो में छुट्टा गोवंश रबी फसलों को निशाना बना रहे हैं। क्षेत्र के राम अवध, हरिराम, फूलचंद, राम आशरे, अभिमन्यु, राम चरन आदि किसानों ने बताया कि रात में झुंड में पहुंच रहे छुट्टा गोवंश खेतों में गेहूं, सरसों, मटर आदि की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। किसानों ने कहा कि छुट्टा पशुओं की तादाद लगातार बढ़ने से फसलों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। छुट्टा पशुओं को पकड़ने में जिम्मेदार भी बेपरवाह बने हैं। अस्थायी गोआश्रय केंद्र बंद होने से क्षेत्र में छुट्टा घूम रहे गोवंशों को पकड़ने का अभियान भी बंद हो गया है।
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शासन के निर्देश के क्रम में जिन गोआश्रय केंद्रों पर 30 से काम पशु थे। उसे बंद करके वहां के पशुओं को वृहद गोआश्रय केंद्र मझौरा में भेज दिया गया है। अगर कहीं पर छुट्टा पशु हैं तो उन्हें पकड़वाया जाएगा।
-कृष्ण कुमार दुबे, बीडीओ, हैंसर
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- पिछले वर्ष 20 अक्तूबर के शासनादेश के बाद अब हैंसर ब्लाॅक में चार में से सिर्फ एक गोआश्रय केंद्र का हो रहा संचालन
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। विकास खंड हैंसर बाजार के चार में तीन गोआश्रय केंद्रों का संचालन ठप है। पिछले वर्ष 20 अक्तूबर को जारी शासनादेश के अनुसार जिस केंद्र पर पशुओं की संख्या 30 से कम थी, वहां के पशुओं को बृहद गोआश्रय केंद्रों में भेजने का निर्देश हुआ। निर्देश के क्रम में हैंसर ब्लाॅक में तीन अस्थायी गोआश्रय केंद्र बंद हो गए। वहां मौजूद पशुओं को बृहद गोआश्रय केंद्र मझौरा भेज दिया गया।
दूसरी तरफ गोआश्रय केंद्र बंद होने का सीधा असर हैंसर ब्लाॅक के सिवानो में दिखाई देने लगा है। जहां दर्जनों छुट्टा गोवंश रबी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। इससे किसान चिंता में हैं। हैंसर ब्लाॅक में छुट्टा गोवंशों को अस्थायी गोआश्रय में रखने के लिए मुंडेरा शुक्ल, कोचरी, खैराटी तथा कटया में गोआश्रय केंद्र खोले गए। इसके बाद छुट्टा गोवंशों को अस्थायी गोआश्रय केंद्रों में रखने से क्षेत्र के किसानों को राहत मिली। लेकिन यह राहत बहुत दिनों तक नहीं चल सकी। गोआश्रय केंद्रों में बरती जाने वाली लापरवाही के चलते छुट्टा गोवंशों को पकड़ कर गोआश्रय केंद्रों पर न लाए जाने से अस्थायी गोआश्रय केंद्रों पर पशुओं की संख्या लगातार कम होने लगी।
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इस बीच पिछले वर्ष 20 अक्तूबर को जारी शासनादेश के तहत उन गोआश्रय केंद्रों में जहां पशुओं की संख्या 30 से कम रह गई वहां के पशुओं को वृहद गोआश्रय केंद्रों में भेज दिया गया। इससे हैंसर क्षेत्र में मुंडेरा शुक्ल, खैराटी व कोचरी में अस्थायी गो आश्रय केंद्रों का संचालन ठप हो गया। दूसरी तरफ केंद्रों के बंद होने का असर यह रहा कि क्षेत्र में छुट्टा गोवंशों की बाढ़ आ गई।
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मुंडेरा शुक्ल, खैराटी, जिगिना तामा, बंसवारी गांव, बरांव, भैसहीं, औटना, डेबरी, जगदीशपुर, गोपीपुर आदि गांवों के सिवानो में छुट्टा गोवंश रबी फसलों को निशाना बना रहे हैं। क्षेत्र के राम अवध, हरिराम, फूलचंद, राम आशरे, अभिमन्यु, राम चरन आदि किसानों ने बताया कि रात में झुंड में पहुंच रहे छुट्टा गोवंश खेतों में गेहूं, सरसों, मटर आदि की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं। किसानों ने कहा कि छुट्टा पशुओं की तादाद लगातार बढ़ने से फसलों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। छुट्टा पशुओं को पकड़ने में जिम्मेदार भी बेपरवाह बने हैं। अस्थायी गोआश्रय केंद्र बंद होने से क्षेत्र में छुट्टा घूम रहे गोवंशों को पकड़ने का अभियान भी बंद हो गया है।
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शासन के निर्देश के क्रम में जिन गोआश्रय केंद्रों पर 30 से काम पशु थे। उसे बंद करके वहां के पशुओं को वृहद गोआश्रय केंद्र मझौरा में भेज दिया गया है। अगर कहीं पर छुट्टा पशु हैं तो उन्हें पकड़वाया जाएगा।
-कृष्ण कुमार दुबे, बीडीओ, हैंसर