{"_id":"65203f7f728780aa680f7fe8","slug":"husband-convicted-of-dowry-death-sentenced-to-14-years-rigorous-imprisonment-mother-in-law-and-father-in-law-acquitted-khalilabad-news-c-209-1-sgkp1038-3868-2023-10-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: दहेज हत्या के दोषी पति को 14 वर्ष का सश्रम कारावास, सास-ससुर हुए दोषमुक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: दहेज हत्या के दोषी पति को 14 वर्ष का सश्रम कारावास, सास-ससुर हुए दोषमुक्त
विज्ञापन
8000 रुपये अर्थदंड से दंडित, अर्थदंड न अदा करने पर पांच माह की भुगतनी होगी अतिरिक्त सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय काशिफ शेख ने दहेज हत्या के मामले में पति को दोषी पाए जाने पर 14 वर्ष का सश्रम करावास तथा 8,000 रुपये अर्थ दंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर पांच माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जबकि सास और ससुर को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
विशेष लोक अभियोजक अच्युतानंद शुक्ला ने बताया कि पीड़ित पिता विजय प्रताप सिंह का आरोप है कि उन्होंने अपनी पुत्री रेनू सिंह की शादी 24 फरवरी 2016 को अश्वनी सिंह उर्फ मोनू पुत्र गिरिजेश सिंह निवासी जिवधरा थाना बखिरा के साथ की थी। आरोप है कि पति अश्वनी, ससुर गिरिजेश सिंह व सास राजकुमारी सिंह शादी के बाद से ही दहेज में बाइक और एक लाख नकदी रुपये न देने की बात को लेकर को रेनू सिंह को मारते पीटते थे। अश्वनी का चाल चलन भी ठीक नहीं था और किसी दूसरी लड़की से उसका नाजायज संबंध भी था। जिसकी जानकारी रेनू सिंह को हो गई थी। इसी कारण अश्वनी आए दिन रेनू सिंह का शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न करता था तथा आत्महत्या के लिए हमेशा प्रेरित करता था। यह सब बातें घर आने के बाद बेटी रेनू सिंह ने उसे और परिवार के अन्य सदस्यों को भी बताई थी। 24 फरवरी 2017 को उसके पति अश्वनी ने रेनू सिंह को बुरी तरह मारा पीटा था। जिसकी जानकारी होने पर मेरे बड़े बेटे नीरज सिंह उसका इलाज कराया, लेकिन अश्वनी ने उसकी पुत्री को घर से भगा दिया। रिश्तेदारी की वजह से पुलिस में शिकायत नहीं की। कुछ दिन बाद रिश्तेदारों एवं परिवार वालों के माध्यम से बातचीत करके पुनः रेनू सिंह को अश्वनी ने बुलाया और भविष्य में ऐसी गलती नहीं करने की बात कही। 15 मार्च 2017 को दिन में 2 बजकर 22 मिनट पर मेरे बेटे नीरज सिंह के फोन पर अश्वनी ने अपने मोबाइल नंबर से फोन करके बताया कि आपकी बहन ने फांसी लगा ली है। जब वह अपने बेटे के साथ वहां पहुंचे तो अश्विनी और उसके परिवार के लोग पुलिस को सूचना देने से मना करने लगे और शव का अंतिम संस्कार करने का दबाव देने लगे। तब उसके बेटे ने 100 नंबर तथा एसओ बखिरा के मोबाइल पर फोन कर सूचना दी। पीड़ित पिता की तहरीर के आधार पर थाना बखिरा में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचक ने विवेचना के बाद पति अश्वनी सिंह उर्फ मोनू, ससुर गिरिजेश सिंह, सास राज कुमारी सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। कोर्ट में सभी आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया तथा विचारण चाहा । अभियोजन की तरफ से कुल 9 गवाहों की गवाही हुई तथा 14 अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। पत्रावली पर उपलब्ध साक्षी गण के साक्ष्य के आधार पर आरोपी अश्वनी सिंह उर्फ मोनू द्वारा ही मृतका से अतिरिक्त दहेज की मांग किए जाने एवं उक्त मांग को लेकर उसके साथ मारपीट करने वह प्रताड़ित करने का तथ्य साबित होता है। ससुर गिरीजेश सिंह व सास राजकुमारी की अपराध में प्रत्यक्ष संलिप्तता के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं आया है। इस आधार पर गिरजेश सिंह व श्रीमती राजकुमारी की अपराध में संलिप्तता और उसके द्वारा मृतका से दहेज की मांग किए जाने और उक्त मांग को लेकर मृतका को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का तथ्य साबित नहीं होता है। बचाव पक्ष के बातमें बल है। कोर्ट ने इस आधार पर गिरजेश सिंह व राजकुमारी सिंह को अपराध में दोष मुक्त कर दिया। जबकि दोष सिद्ध होने पर पति अश्विनी उर्फ मोनू सिंह को 14 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया। इसके साथ ही 8000 रुपये अर्थ दंड से भी दंडित किया। अर्थ दंड अदा करने पर पांच माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय काशिफ शेख ने दहेज हत्या के मामले में पति को दोषी पाए जाने पर 14 वर्ष का सश्रम करावास तथा 8,000 रुपये अर्थ दंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर पांच माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जबकि सास और ससुर को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
विशेष लोक अभियोजक अच्युतानंद शुक्ला ने बताया कि पीड़ित पिता विजय प्रताप सिंह का आरोप है कि उन्होंने अपनी पुत्री रेनू सिंह की शादी 24 फरवरी 2016 को अश्वनी सिंह उर्फ मोनू पुत्र गिरिजेश सिंह निवासी जिवधरा थाना बखिरा के साथ की थी। आरोप है कि पति अश्वनी, ससुर गिरिजेश सिंह व सास राजकुमारी सिंह शादी के बाद से ही दहेज में बाइक और एक लाख नकदी रुपये न देने की बात को लेकर को रेनू सिंह को मारते पीटते थे। अश्वनी का चाल चलन भी ठीक नहीं था और किसी दूसरी लड़की से उसका नाजायज संबंध भी था। जिसकी जानकारी रेनू सिंह को हो गई थी। इसी कारण अश्वनी आए दिन रेनू सिंह का शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न करता था तथा आत्महत्या के लिए हमेशा प्रेरित करता था। यह सब बातें घर आने के बाद बेटी रेनू सिंह ने उसे और परिवार के अन्य सदस्यों को भी बताई थी। 24 फरवरी 2017 को उसके पति अश्वनी ने रेनू सिंह को बुरी तरह मारा पीटा था। जिसकी जानकारी होने पर मेरे बड़े बेटे नीरज सिंह उसका इलाज कराया, लेकिन अश्वनी ने उसकी पुत्री को घर से भगा दिया। रिश्तेदारी की वजह से पुलिस में शिकायत नहीं की। कुछ दिन बाद रिश्तेदारों एवं परिवार वालों के माध्यम से बातचीत करके पुनः रेनू सिंह को अश्वनी ने बुलाया और भविष्य में ऐसी गलती नहीं करने की बात कही। 15 मार्च 2017 को दिन में 2 बजकर 22 मिनट पर मेरे बेटे नीरज सिंह के फोन पर अश्वनी ने अपने मोबाइल नंबर से फोन करके बताया कि आपकी बहन ने फांसी लगा ली है। जब वह अपने बेटे के साथ वहां पहुंचे तो अश्विनी और उसके परिवार के लोग पुलिस को सूचना देने से मना करने लगे और शव का अंतिम संस्कार करने का दबाव देने लगे। तब उसके बेटे ने 100 नंबर तथा एसओ बखिरा के मोबाइल पर फोन कर सूचना दी। पीड़ित पिता की तहरीर के आधार पर थाना बखिरा में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचक ने विवेचना के बाद पति अश्वनी सिंह उर्फ मोनू, ससुर गिरिजेश सिंह, सास राज कुमारी सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। कोर्ट में सभी आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया तथा विचारण चाहा । अभियोजन की तरफ से कुल 9 गवाहों की गवाही हुई तथा 14 अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। पत्रावली पर उपलब्ध साक्षी गण के साक्ष्य के आधार पर आरोपी अश्वनी सिंह उर्फ मोनू द्वारा ही मृतका से अतिरिक्त दहेज की मांग किए जाने एवं उक्त मांग को लेकर उसके साथ मारपीट करने वह प्रताड़ित करने का तथ्य साबित होता है। ससुर गिरीजेश सिंह व सास राजकुमारी की अपराध में प्रत्यक्ष संलिप्तता के संबंध में कोई साक्ष्य नहीं आया है। इस आधार पर गिरजेश सिंह व श्रीमती राजकुमारी की अपराध में संलिप्तता और उसके द्वारा मृतका से दहेज की मांग किए जाने और उक्त मांग को लेकर मृतका को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का तथ्य साबित नहीं होता है। बचाव पक्ष के बातमें बल है। कोर्ट ने इस आधार पर गिरजेश सिंह व राजकुमारी सिंह को अपराध में दोष मुक्त कर दिया। जबकि दोष सिद्ध होने पर पति अश्विनी उर्फ मोनू सिंह को 14 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया। इसके साथ ही 8000 रुपये अर्थ दंड से भी दंडित किया। अर्थ दंड अदा करने पर पांच माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
विज्ञापन