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Sant Kabir Nagar News: एक रुपये की पर्ची, खरीद रहे 400 की दवा
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संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में इलाज कराने आएं तो सावधान रहें। ओपीडी में डॉक्टर के कक्ष में बिचौलिए मौजूद रहते हैं। बाहर की दवाएं लिखने पर बिचौलिए मरीज को बाहर ले जाकर मेडिकल स्टोर से दवा दिलाते हैं। हर मरीज पर बिचौलियों की नजर रहती है। मरीज को बाहर मेडिकल स्टोर पर 400 से 500 की दवा मिलती है। इससे मरीजों की जेब खाली हो रही है।
सोमवार को जिला अस्पताल में मरीज एक रुपये की पर्ची कटवाकर ओपीडी में डॉक्टर के पास जा रहे थे। ओपीडी में बैठे एक डॉक्टर के कक्ष में दो लोग मौजूद रहे, और मरीज को जैसे ही डॉक्टर ने छोटी पर्ची पर दवा लिखी तो कमरे में मौजूद बाहरी व्यक्ति ने पर्ची लेकर मरीज के साथ अस्पताल गेट के मेडिकल स्टोर पर पहुंच गया और दवा दिलवाई। अस्पताल में बाहर की लिखी दवा की पर्ची लेकर निकले बंजरिया निवासी रामसुभग ने बताया कि डॉक्टर ने बाहर की दवा लिखी है। एक युवक यह दवा सस्ते में दिलाने की बात कर रहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसी तरह से अन्य मरीज भी बाहर से दवा लेने काे मजबूर थे।
बखिरा निवासी जयराम ने बताया कि डॉक्टर से अस्पताल की दवा लिखने के लिए कहा तो उन्होंने बताया कि यहां पूरी दवा नहीं मिलेगी। अगर बीमारी सही करना है तो बाहर की दवा लें। यही नहीं यहां पर पर्चा बनवाने के लिए लंबी लाइन लगती है, अगर बिचौलिए के संपर्क में आए तो वह तुरंत पर्चा बनवाकर चिकित्सकों को दिखा भी देते हैं।
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हर दवा पर रहता है कमीशन
डॉक्टर बाहर की दवा लिखते हैं, तो हर दवा पर पांच प्रतिशत कमीशन रहता है। बिचौलिए दवा पर्ची ले जाकर दुकान से दवा दिलाते हैं और डॉक्टर का कमीशन नोट हो जाता है। इसके साथ ही गेट के पास खुले मेडिकल स्टोर से डॉक्टरों की हर प्रकार से सहायता भी की जाती है।
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पत्नी को दिखाने आया था, ब्लड जांच कराई, उसके बाद डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने छह प्रकार की दवाएं लिखी हैं। यह सभी दवाएं बाहर की हैं, जो मेडिकल स्टोर पर ही मिलेगी। एक लड़के ने दवा पर छूट दिलाने की बात कही तो उन्होंने मना कर दिया। उनके रिश्तेदार की दुकान है, जहां दवा मिल जाएगी।
-देवराज निवासी, चाईकला
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बहन को दिखाने आए थे, एक छोटी पर्ची पर डॉक्टर ने दवा लिखी है, इसमें चार दवाएं हैं, बाहर से खरीदा है, तो सभी दवाएं 400 रुपये की मिली हैं, डॉक्टर को दवा दिखाने जा रहे हैं, कि सही है या नहीं। अगर अस्पताल में यह दवाएं मिलतीं तो बाहर से नहीं खरीदनी पड़ती।
- कमलेश, निवासी सियरा सांथा
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जन औषधि केंद्र की नहीं लिखते दवा
जिला अस्पताल परिसर में जन औषधि केंद्र भी खुला है, जहां बाजार भाव से 80 प्रतिशत सस्ती दर पर दवा मिलती है, लेकिन ओपीडी के डॉक्टर यहां की दवा नहीं लिखते हैं, क्योंकि उनका इसमें कमीशन नहीं होता है, यह सब सरकारी दवाएं हैं, जो मरीजों को सस्ती दर पर उपलब्ध होती है।
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ओपीडी में तैनात सभी डॉक्टरों को अस्पताल की दवा लिखने का निर्देश दिया गया है, अगर कोई बाहर की दवा लिखता है तो गलत है, इसकी जांच कराई जाएगी जो भी इसमें संलिप्त जो भी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके साथ ही बिचौलियों पर नजर रखी जा रही है।
-डॉ. महेश प्रसाद, सीएमएस
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सोमवार को जिला अस्पताल में मरीज एक रुपये की पर्ची कटवाकर ओपीडी में डॉक्टर के पास जा रहे थे। ओपीडी में बैठे एक डॉक्टर के कक्ष में दो लोग मौजूद रहे, और मरीज को जैसे ही डॉक्टर ने छोटी पर्ची पर दवा लिखी तो कमरे में मौजूद बाहरी व्यक्ति ने पर्ची लेकर मरीज के साथ अस्पताल गेट के मेडिकल स्टोर पर पहुंच गया और दवा दिलवाई। अस्पताल में बाहर की लिखी दवा की पर्ची लेकर निकले बंजरिया निवासी रामसुभग ने बताया कि डॉक्टर ने बाहर की दवा लिखी है। एक युवक यह दवा सस्ते में दिलाने की बात कर रहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसी तरह से अन्य मरीज भी बाहर से दवा लेने काे मजबूर थे।
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बखिरा निवासी जयराम ने बताया कि डॉक्टर से अस्पताल की दवा लिखने के लिए कहा तो उन्होंने बताया कि यहां पूरी दवा नहीं मिलेगी। अगर बीमारी सही करना है तो बाहर की दवा लें। यही नहीं यहां पर पर्चा बनवाने के लिए लंबी लाइन लगती है, अगर बिचौलिए के संपर्क में आए तो वह तुरंत पर्चा बनवाकर चिकित्सकों को दिखा भी देते हैं।
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हर दवा पर रहता है कमीशन
डॉक्टर बाहर की दवा लिखते हैं, तो हर दवा पर पांच प्रतिशत कमीशन रहता है। बिचौलिए दवा पर्ची ले जाकर दुकान से दवा दिलाते हैं और डॉक्टर का कमीशन नोट हो जाता है। इसके साथ ही गेट के पास खुले मेडिकल स्टोर से डॉक्टरों की हर प्रकार से सहायता भी की जाती है।
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पत्नी को दिखाने आया था, ब्लड जांच कराई, उसके बाद डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने छह प्रकार की दवाएं लिखी हैं। यह सभी दवाएं बाहर की हैं, जो मेडिकल स्टोर पर ही मिलेगी। एक लड़के ने दवा पर छूट दिलाने की बात कही तो उन्होंने मना कर दिया। उनके रिश्तेदार की दुकान है, जहां दवा मिल जाएगी।
-देवराज निवासी, चाईकला
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बहन को दिखाने आए थे, एक छोटी पर्ची पर डॉक्टर ने दवा लिखी है, इसमें चार दवाएं हैं, बाहर से खरीदा है, तो सभी दवाएं 400 रुपये की मिली हैं, डॉक्टर को दवा दिखाने जा रहे हैं, कि सही है या नहीं। अगर अस्पताल में यह दवाएं मिलतीं तो बाहर से नहीं खरीदनी पड़ती।
- कमलेश, निवासी सियरा सांथा
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जन औषधि केंद्र की नहीं लिखते दवा
जिला अस्पताल परिसर में जन औषधि केंद्र भी खुला है, जहां बाजार भाव से 80 प्रतिशत सस्ती दर पर दवा मिलती है, लेकिन ओपीडी के डॉक्टर यहां की दवा नहीं लिखते हैं, क्योंकि उनका इसमें कमीशन नहीं होता है, यह सब सरकारी दवाएं हैं, जो मरीजों को सस्ती दर पर उपलब्ध होती है।
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ओपीडी में तैनात सभी डॉक्टरों को अस्पताल की दवा लिखने का निर्देश दिया गया है, अगर कोई बाहर की दवा लिखता है तो गलत है, इसकी जांच कराई जाएगी जो भी इसमें संलिप्त जो भी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके साथ ही बिचौलियों पर नजर रखी जा रही है।
-डॉ. महेश प्रसाद, सीएमएस