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धूमधाम से मनाया गया प्रकाश पर्व, कीर्तन व अरदास का आयोजन हुआ
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गुरूद्वारे में आयोजित कार्यक्रम में भजन सुनती सिक्ख समाज की महिलाएं।संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : KHALILABAD
धूमधाम से मनाया गया प्रकाश पर्व, कीर्तन व अरदास का आयोजन हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा खलीलाबाद में शुक्रवार को सिख धर्म के छठे गुरु श्री गुरु हरगोंविद सिंह जी महाराज का प्रकाश पर्व बड़ी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। प्रात: काल पथ साहिब की समाप्ति, कीर्तन, अरदास के बाद गुरु का अटूट लंगर चलता पूरे दिन चलता रहा।
गुरुद्वारा के अध्यक्ष सरदार अजीत सिंह ने बताया कि श्री हरगोविंद सिंह महाराज का 426वां प्रकाश पर्व है। 1686 में गुरु गद्दी मिलने के बाद भविष्य में आने वाले आकस्मिक खतरों को ध्यान में रखते हुए सिख आंदोलन के स्वरूप को बदलकर संग्रामिक रूप दे दिया। वह मीरी और पीरी की शक्ति दर्शाती दो तलवार रखते थे।
1608 इसवीं में स्वर्ण मंदिर के ठीक सामने अकाल तख्त का निर्माण कराया। ग्वालियर के किले में एक वर्ष कैद रहने के पश्चात जब वह रिहा हुए तो उन्होंने 52 राजपूत राजाओं को रिहा करने की शर्त रखी। जिसे तत्कालीन शासक ने स्वीकार किया। इसीलिए गुरु साहब को बंदी छोड़ भी कहा जाता है। वह जगह-जगह सिख धर्म का प्रचार करने के लिए कई राज्यों का भ्रमण किए। इस दौरान परविंदर सिंह, धर्म सिंह, नरेंद्र सिंह, सतविंदर पाल सिंह, मनजीत सिंह, परमजीत सिंह, सीनू सिंह, हरदीप सिंह, राजेंद्र सिंह, हरभजन सिंह, ग्रंथी जोगिंदर सिंह, परमजीत कौर, कमलजीत कौर, बलवंत कौर, रविंदर कौर, जोगिंदर कौर समेत अन्य मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा खलीलाबाद में शुक्रवार को सिख धर्म के छठे गुरु श्री गुरु हरगोंविद सिंह जी महाराज का प्रकाश पर्व बड़ी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। प्रात: काल पथ साहिब की समाप्ति, कीर्तन, अरदास के बाद गुरु का अटूट लंगर चलता पूरे दिन चलता रहा।
गुरुद्वारा के अध्यक्ष सरदार अजीत सिंह ने बताया कि श्री हरगोविंद सिंह महाराज का 426वां प्रकाश पर्व है। 1686 में गुरु गद्दी मिलने के बाद भविष्य में आने वाले आकस्मिक खतरों को ध्यान में रखते हुए सिख आंदोलन के स्वरूप को बदलकर संग्रामिक रूप दे दिया। वह मीरी और पीरी की शक्ति दर्शाती दो तलवार रखते थे।
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1608 इसवीं में स्वर्ण मंदिर के ठीक सामने अकाल तख्त का निर्माण कराया। ग्वालियर के किले में एक वर्ष कैद रहने के पश्चात जब वह रिहा हुए तो उन्होंने 52 राजपूत राजाओं को रिहा करने की शर्त रखी। जिसे तत्कालीन शासक ने स्वीकार किया। इसीलिए गुरु साहब को बंदी छोड़ भी कहा जाता है। वह जगह-जगह सिख धर्म का प्रचार करने के लिए कई राज्यों का भ्रमण किए। इस दौरान परविंदर सिंह, धर्म सिंह, नरेंद्र सिंह, सतविंदर पाल सिंह, मनजीत सिंह, परमजीत सिंह, सीनू सिंह, हरदीप सिंह, राजेंद्र सिंह, हरभजन सिंह, ग्रंथी जोगिंदर सिंह, परमजीत कौर, कमलजीत कौर, बलवंत कौर, रविंदर कौर, जोगिंदर कौर समेत अन्य मौजूद रहे।
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