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Sant Kabir Nagar News: हत्या मामले में हरिहरपुर के पूर्व चेयरमैन बृजेश पाल गिरफ्तार

Fri, 03 Oct 2025 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Fri, 03 Oct 2025 11:42 PM IST
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Former Hariharpur chairman Brijesh Pal arrested in murder case
पुलिस की गिरफ्त में हरिहरपुर के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष बृजेश पपाल । स्रोत - पुलिस
नाथनगर/महुली। महुली थाने की पुलिस ने शुक्रवार को हरिहरपुर के पूर्व चेयरमैन बृजेश पाल को उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया गया। वर्ष 2006 में चुनाव प्रचार के दौरान हुई नगर पंचायत के हुई हत्या में उनपर केस दर्ज था। सत्र न्यायालय से दोषमुक्त होने के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें गत दिनों सजा सुनाई थी। इसके बाद बस्ती के सत्र न्यायाधीश ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था।
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बता दें कि शुक्रवार को महुली थाने की हरिहरपुर पुलिस चौकी के प्रभारी अशोक सिंह ने पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रहे बृजेश पाल को उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। उनको सत्र न्यायालय बस्ती ने दोषमुक्त कर दिया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में गया। वहां से उनको हत्या, गैर इरादतन हत्या समेत अन्य संगीन धाराओं में दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा के साथ ही जुर्माने की सजा गत 3 सितंबर को सुनाई गई। इसके बाद जिला व सत्र न्यायालय बस्ती ने उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया था। जिसके तहत पुलिस उनको खोज रही थी। इस गिरफ्तारी के बाद राजनीति गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
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वर्ष 2006 में नगर पंचायत चुनाव के दौरान हुई थी हत्या
संतकबीरनगर। नगर पंचायत हरिहरपुर में चुनाव प्रचार के दौरान 24 अक्टूबर 2006 की रात 10.30 बजे के करीब हरिहरपुर के वर्तमान चेयरमैन रवीन्द्र प्रताप शाही उर्फ पप्पू शाही के 25 वर्षीय चचेरे भाई पंकज कुमार शाही पुत्र ओमप्रकाश शाही, निवासी गड़ेर, थाना भलुअनी जिला देवरिया की रायफल और कट्टे से फायरिंग करके हत्या कर दी गई थी। वहीं धर्मेन्द्र प्रताप उर्फ गुड्डू शाही पुत्र प्रहलाद शाही गोली लगने से घायल हो गए थे। मामले में रविन्द्र प्रताप शाही उर्फ पप्पू शाही की तहरीर पर बृजेश पाल तथा उनके पुत्र देवेश पाल उर्फ सोनू पाल निवासी हरिहरपुर तथा रमन पाल निवासी लखनापार थाना महुली पर हत्या, हत्या के प्रयास, मारपीट, गाली देने तथा आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। सत्र न्यायालय ने 15 फरवरी 2008 को मामले में आरोपी बृजेश पाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया जबकि देवेश पाल तथा रमन पाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद सरकार ने इस प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट में अपील मंजूर हुई तथा वहां पर देवेश पाल तथा रमन पाल को अपील के दौरान जमानत मिल गई। गत 3 सितंबर को हाईकोर्ट के न्याय मूर्ति संदीप जैन तथा सौमित्र दयाल सिंह की बेंच ने अंतिम सुनवाई के दौरान निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए बृजेश पाल को भी दोषी माना तथा यह कहा कि सत्र न्यायालय ने घायल गवाह की उपस्थिति को नजरंदाज किया है। बृजेश पाल भी इसमें दोषी है। इसके बाद उन्हें हत्या के जुर्म में आजीवन तथा आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त हत्या के प्रयास के तहत सात वर्ष का कारावास तथा दो हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई। बृजेश पाल को सत्र न्यायालय में तुरंत आत्मसमर्पण करना होगा और सजा काटने के लिए जेल में रहना होगा। दोनों ही सजाएं साथ साथ चलेंगी। वहीं जमानत पर चल रहे अभियुक्त को तत्काल आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा न करने पर उनको जेल भेजने की कार्रवाई बल पूर्वक की जाएगी। उनके सारे जमानती बांड और जमानत निरस्त को भी निरस्त कर दिया गया है।
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