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दुख-दर्द को भूल आस्था में रमे बाढ़ पीड़ित
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एमबीडी बांध पर छठ पूजा करने के लिए बनाई गई वेदी।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
दुख-दर्द को भूल आस्था में रमे बाढ़ पीड़ित
धनघटा (संतकबीरनगर)। घाघरा नदी की बाढ़ और कटान से मकान नदी की धारा में समा गया। फसल नष्ट हो गई। दोनों वक्त का चूल्हा जलाने के लिए लोगों के आगे हाथ फैलाने के सिवाय कोई दूसरा उपाय नहीं। रहने के लिए मकान नहीं, लेकिन आस्था में कमी नहीं दिखी। पीड़ित अपने दर्द को भगवान को समर्पित करते हुए छठ माता के पूजा पाठ में रम गए हैं।
जगह न होने पर एमबीडी बांध पर पिंड बनाकर आस्था के साथ मातारानी के प्रार्थना में लगे हैं। छठ पर्व धूमधाम से मनाने के लिए चहुंओर धूम मची है। इस पर्व पर फल का विशेष महत्व होता है। अपने क्षमता के अनुसार इसकी तैयारी चार से छह दिन पहले से करते हुए व्रती खरीदारी शुरू कर देते हैं। ऐसे में बाढ़ पीड़ित भी अपने को पीछे न रखते हुए तैयारी शुरू कर दिए।
बाढ़ प्रभावित गांव सियर कला निवासी नीता कहती है कि बाढ़ और नदी की कटान से खेत खलियान, मकान, दुकान सब बर्बाद हो गया। रहने और खाने का ठिकाना नहीं रह गया है, लेकिन हम लोग उसी आस्था और श्रद्धा के साथ छठ मइया की पूजा करेंगी, जिस आस्था और श्रद्धा से पहले किया करते थे। रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बाढ़ प्रभावित गांवों की काफी संख्या में महिलाएं एमबीडी बांध पर बनाई गई वेदी एमबीडी बांध के उत्तर बनाए गए अमृत सरोवर के किनारे महिलाएं पहुंचना शुरू कर दी थी।
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ग्राम प्रधान कन्हैया लाल यादव ने बताया कि गायघाट दक्षिणी, तिघरा, मौर , सियर कला की महिलाओं को पूजा पाठ करने के लिए एमबीडी बांध और अमृत सरोवर के किनारे सफाई कराई गई है। वहां पर वेदी का निर्माण भी हो चुका है। नदी की बाढ़ के कारण किसी की आस्था प्रभावित न हो इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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धनघटा (संतकबीरनगर)। घाघरा नदी की बाढ़ और कटान से मकान नदी की धारा में समा गया। फसल नष्ट हो गई। दोनों वक्त का चूल्हा जलाने के लिए लोगों के आगे हाथ फैलाने के सिवाय कोई दूसरा उपाय नहीं। रहने के लिए मकान नहीं, लेकिन आस्था में कमी नहीं दिखी। पीड़ित अपने दर्द को भगवान को समर्पित करते हुए छठ माता के पूजा पाठ में रम गए हैं।
जगह न होने पर एमबीडी बांध पर पिंड बनाकर आस्था के साथ मातारानी के प्रार्थना में लगे हैं। छठ पर्व धूमधाम से मनाने के लिए चहुंओर धूम मची है। इस पर्व पर फल का विशेष महत्व होता है। अपने क्षमता के अनुसार इसकी तैयारी चार से छह दिन पहले से करते हुए व्रती खरीदारी शुरू कर देते हैं। ऐसे में बाढ़ पीड़ित भी अपने को पीछे न रखते हुए तैयारी शुरू कर दिए।
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बाढ़ प्रभावित गांव सियर कला निवासी नीता कहती है कि बाढ़ और नदी की कटान से खेत खलियान, मकान, दुकान सब बर्बाद हो गया। रहने और खाने का ठिकाना नहीं रह गया है, लेकिन हम लोग उसी आस्था और श्रद्धा के साथ छठ मइया की पूजा करेंगी, जिस आस्था और श्रद्धा से पहले किया करते थे। रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए बाढ़ प्रभावित गांवों की काफी संख्या में महिलाएं एमबीडी बांध पर बनाई गई वेदी एमबीडी बांध के उत्तर बनाए गए अमृत सरोवर के किनारे महिलाएं पहुंचना शुरू कर दी थी।
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ग्राम प्रधान कन्हैया लाल यादव ने बताया कि गायघाट दक्षिणी, तिघरा, मौर , सियर कला की महिलाओं को पूजा पाठ करने के लिए एमबीडी बांध और अमृत सरोवर के किनारे सफाई कराई गई है। वहां पर वेदी का निर्माण भी हो चुका है। नदी की बाढ़ के कारण किसी की आस्था प्रभावित न हो इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।