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बाढ़ के पानी से घिरे 22 गांव
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धनघटा के सियर कला गांव में घुसा बाढ़ का पानी।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
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बाढ़ के पानी से घिरे 22 गांव
24 घंटे में 20 सेंटीमीटर घटी घाघरा नदी, फिर भी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रही
अमर उजाला ब्यूरो
धनघटा/संतकबीरनगर। एमबीडी बांध और घाघरा नदी के बीच बसे 22 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इन गांवों के लोगों ने अपने पशुओं के साथ बांध पर शरण ली है। 24 घंटे में घाघरा नदी 20 सेंटीमीटर घटी है, लेकिन अब भी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
बुधवार की शाम से नदी के जलस्तर में वृद्धि शुरू हुई। रविवार को घाघरा नदी खतरे के निशान से 45 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। जबकि सोमवार को घटकर 25 सेंटीमीटर पर पहुंच गई। 24 घंटे में 20 सेंटीमीटर नदी घटी। इधर, घाघरा नदी में बाढ़ आने से गायघाट दक्षिणी, चकदहा, गुनवतिया, भौवापार, सरैया, खरैया, सियर कला समेत 22 गांव जलमग्न हो गए। 17 गांवों के करीब 200 परिवार घर छोड़कर पशुओं के साथ एमबीडी बांध पर पहुंच गए। प्रशासन की ओर से तिघरा स्थित शरणालय में बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन का इंतजाम किया गया है। पीड़ित राम अजोर, प्रभावती, संतराम, लालचंद, रामकिशोर, जयकरन, राम लौट, कैलाश, गोविंद, सुंदरा देवी, उदय भान, संदीप, सुनीता, पार्वती ने बताया कि सबसे अधिक समस्या पशुओं के चारे की है। फसल बर्बाद हो गई है। तहसील प्रशासन की ओर से पशुओं के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने बताया कि घाघरा नदी में आई बाढ़ से 22 गांव जलमग्न हो गए हैं। प्रभावित गांव के लोग घर से पलायन करके एमबीडी बांध पर आ गए हैं। पशुओं के साथ लोग बांध पर निवास कर रहे हैं, लेकिन उनके भोजन की व्यवस्था शिविर में की गई है। बाढ़ पीड़ितों के आवागमन के लिए 26 नावें लगाई गई हैं। नदी का जलस्तर घट रहा है। उम्मीद है कि दो से तीन दिनों में स्थिति और सुधर जाएगी। उसके बाद लोग धीरे-धीरे अपने घरों को लौटने लगेंगे। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीश चंद्र ने बताया कि नदी के जलस्तर में कमी आई है, फिर भी नदी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बांध पूरी तरह से सुरक्षित है।
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24 घंटे में 20 सेंटीमीटर घटी घाघरा नदी, फिर भी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रही
अमर उजाला ब्यूरो
धनघटा/संतकबीरनगर। एमबीडी बांध और घाघरा नदी के बीच बसे 22 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इन गांवों के लोगों ने अपने पशुओं के साथ बांध पर शरण ली है। 24 घंटे में घाघरा नदी 20 सेंटीमीटर घटी है, लेकिन अब भी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
बुधवार की शाम से नदी के जलस्तर में वृद्धि शुरू हुई। रविवार को घाघरा नदी खतरे के निशान से 45 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। जबकि सोमवार को घटकर 25 सेंटीमीटर पर पहुंच गई। 24 घंटे में 20 सेंटीमीटर नदी घटी। इधर, घाघरा नदी में बाढ़ आने से गायघाट दक्षिणी, चकदहा, गुनवतिया, भौवापार, सरैया, खरैया, सियर कला समेत 22 गांव जलमग्न हो गए। 17 गांवों के करीब 200 परिवार घर छोड़कर पशुओं के साथ एमबीडी बांध पर पहुंच गए। प्रशासन की ओर से तिघरा स्थित शरणालय में बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन का इंतजाम किया गया है। पीड़ित राम अजोर, प्रभावती, संतराम, लालचंद, रामकिशोर, जयकरन, राम लौट, कैलाश, गोविंद, सुंदरा देवी, उदय भान, संदीप, सुनीता, पार्वती ने बताया कि सबसे अधिक समस्या पशुओं के चारे की है। फसल बर्बाद हो गई है। तहसील प्रशासन की ओर से पशुओं के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है। तहसीलदार रत्नेश तिवारी ने बताया कि घाघरा नदी में आई बाढ़ से 22 गांव जलमग्न हो गए हैं। प्रभावित गांव के लोग घर से पलायन करके एमबीडी बांध पर आ गए हैं। पशुओं के साथ लोग बांध पर निवास कर रहे हैं, लेकिन उनके भोजन की व्यवस्था शिविर में की गई है। बाढ़ पीड़ितों के आवागमन के लिए 26 नावें लगाई गई हैं। नदी का जलस्तर घट रहा है। उम्मीद है कि दो से तीन दिनों में स्थिति और सुधर जाएगी। उसके बाद लोग धीरे-धीरे अपने घरों को लौटने लगेंगे। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सतीश चंद्र ने बताया कि नदी के जलस्तर में कमी आई है, फिर भी नदी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बांध पूरी तरह से सुरक्षित है।
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