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Sant Kabir Nagar News: डकैती के पांच आरोपी साक्ष्य के अभाव में 15 वर्ष बाद बरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम गजेंद्र की अदालत ने डकैती व लूटी गई संपत्ति को बेइमानी से प्राप्त करने के मामले में आरोपी बनाए गए शमशेर, अवधेश उर्फ गब्बू, पवन बरनवाल, असगर, विछन को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ पाते हुए दोषमुक्त कर दिया।
राजदेव के प्रार्थनापत्र पर थाना धर्मसिंघवा में 2010 केस दर्ज हुआ। 11 अगस्त 2010 की रात लगभग 1:30 बजे राजदेव का परिवार घर में सोया था। घर के पीछे उसका लड़का राजकुमार राय को दरवाजे में खट-खट की आवाज सुनाई दी। देखा कि दरवाजा खुला है। कुछ बदमाश घर का सामान इधर-उधर कर रहे हैं। यह देख कर उसका परिवार जाग गया, तो टॉर्च और लैंप की रोशनी में उसके लड़के राजकुमार ने इटौवा के बैजनाथ व टुनटुन जो उसके गांव व आसपास के गांव आते-जाते हैं, को देखा और पहचाना अन्य की देखने के बाद पहचान की बात कही।
बदमाश जाते समय उसके घर में लड़की की शादी के लिए रखा जेवर, रुपया 21000 नगद और उसकी पत्नी का जेवर और लगभग 25 साड़ियां उठा ले गए। विरोध करने पर रॉड व डंडे से प्रहार किया और उसके परिवार वालों को भी मारापीटा।
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तहरीर के आधार पर केस दर्ज हुआ। विवेचक ने दो आरोपियों बैजनाथ व टुनटुन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। परंतु दूसरे विवेचक ने दोनों आरोपियों का नाम विवेचना से निकाल दिया। पांच अन्य आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया।
अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम गजेंद्र की अदालत में पक्षों की दलील सुनने कहा कि डकैती में प्राप्त मोबाइल को कोर्ट में नहीं प्रस्तुत किया गया और न ही आरोपियों को गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी व कर्मचारी को और न ही मोबाइल की सीडीआर को प्रस्तुत किया। अपर सत्र न्यायाधीश गजेंद्र ने कहा कि सभी तथ्यों का अवलोकन करने और साक्ष्य के अभाव के कारण सभी पांचों आरोपियों शमशेर, असगर, बिच्छन निवासी ग्राम दुर्गजोत थाना बखिरा पवन बरनवाल निवासी थाना बखिरा व अवधेश उर्फ गब्बू ग्राम बेलौहा थाना खेसरहा जनपद सिद्धार्थनगर को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ पाते हुए दोष मुक्त कर दिया।
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संतकबीरनगर। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम गजेंद्र की अदालत ने डकैती व लूटी गई संपत्ति को बेइमानी से प्राप्त करने के मामले में आरोपी बनाए गए शमशेर, अवधेश उर्फ गब्बू, पवन बरनवाल, असगर, विछन को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ पाते हुए दोषमुक्त कर दिया।
राजदेव के प्रार्थनापत्र पर थाना धर्मसिंघवा में 2010 केस दर्ज हुआ। 11 अगस्त 2010 की रात लगभग 1:30 बजे राजदेव का परिवार घर में सोया था। घर के पीछे उसका लड़का राजकुमार राय को दरवाजे में खट-खट की आवाज सुनाई दी। देखा कि दरवाजा खुला है। कुछ बदमाश घर का सामान इधर-उधर कर रहे हैं। यह देख कर उसका परिवार जाग गया, तो टॉर्च और लैंप की रोशनी में उसके लड़के राजकुमार ने इटौवा के बैजनाथ व टुनटुन जो उसके गांव व आसपास के गांव आते-जाते हैं, को देखा और पहचाना अन्य की देखने के बाद पहचान की बात कही।
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बदमाश जाते समय उसके घर में लड़की की शादी के लिए रखा जेवर, रुपया 21000 नगद और उसकी पत्नी का जेवर और लगभग 25 साड़ियां उठा ले गए। विरोध करने पर रॉड व डंडे से प्रहार किया और उसके परिवार वालों को भी मारापीटा।
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तहरीर के आधार पर केस दर्ज हुआ। विवेचक ने दो आरोपियों बैजनाथ व टुनटुन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। परंतु दूसरे विवेचक ने दोनों आरोपियों का नाम विवेचना से निकाल दिया। पांच अन्य आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया।
अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम गजेंद्र की अदालत में पक्षों की दलील सुनने कहा कि डकैती में प्राप्त मोबाइल को कोर्ट में नहीं प्रस्तुत किया गया और न ही आरोपियों को गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी व कर्मचारी को और न ही मोबाइल की सीडीआर को प्रस्तुत किया। अपर सत्र न्यायाधीश गजेंद्र ने कहा कि सभी तथ्यों का अवलोकन करने और साक्ष्य के अभाव के कारण सभी पांचों आरोपियों शमशेर, असगर, बिच्छन निवासी ग्राम दुर्गजोत थाना बखिरा पवन बरनवाल निवासी थाना बखिरा व अवधेश उर्फ गब्बू ग्राम बेलौहा थाना खेसरहा जनपद सिद्धार्थनगर को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ पाते हुए दोष मुक्त कर दिया।