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Sant Kabir Nagar News: चकबंदी अधिकारियों ने मृतक प्रभुनाथ के परिजनों का दर्ज किया बयान, लेखपाल निलंबित
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संठी गांव में मृतक किसान प्रभुनाथ के मामले में जांच करते अधिकारी-संवाद
- शनिवार को चकबंदी प्रक्रिया से नाराज किसान प्रभुनाथ ने कर ली थी आत्महत्या
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। गलत चक निर्धारण के कारण जान गंवाने वाले किसान के मामले में यदि चकबंदी विभाग के लोग उसकी समस्याओं पर ध्यान देते तो उनकी जान नहीं जाती। शुक्रवार को गांव में जांच करने पहुंचे जांच अधिकारी के समक्ष गांव के लोगों ने इस तरह का बयान दिया। हालांकि चकबंदी लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है। चकबंदी अधिकारी खलीलाबाद व जांच अधिकारी ऐश मोहम्मद और सीओ चकबंदी उमेश चंद्र पांडेय सोमवार को संठी गांव पहुंचे। गांव के लोग एक स्वर में कहने लगे कि चकबंदी विभाग के लोग अगर प्रभुनाथ प्रजापति का चक गलत रूप से निर्धारण न करते तो शायद प्रभुनाथ जान नहीं देते।
प्रभुनाथ की पत्नी कमलेश ने बयान दर्ज कराया। कमलेश ने लेखपाल और एसीओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। गांव के लाेगों ने कहा कि इस मामले में चकबंदी विभाग के लोगाें ने काफी खेल किया है, जिसकी वजह से प्रभुनाथ ने जान दी है। गांव में पहुंचे जांच अधिकारी के सामने ग्रामीणों ने अपनी-अपनी नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने पुराने नक्शे को रद्द कर नए सिरे से चक का आवंटन कराए जाने की मांग की।
मृतक की पत्नी ने बयान में लिखा कि लेखपाल और एसीओ ने रिश्वत के साथ मेरे पति को मौत के घाट उतरवा दिया। चकबंदी अधिकारी उमेश पांडेय ने बताया कि लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है। उसे कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
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तहसीलदार पहुंचे पीड़ित घर, आर्थिक सहायता व खेत बहाली का दिया आश्वासन
धनघटा। क्षेत्र के संठी गांव में चकबंदी विभाग की कथित मनमानी से परेशान किसान प्रभुनाथ प्रजापति (47) की आत्महत्या के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। रविवार को तहसीलदार धनघटा रामजी मृतक के घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। तहसीलदार ने बताया कि पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष तथा विधायक विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता दिलाने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि चकबंदी के दौरान मृतक का खेत जिस स्थान पर था, उसे उसी स्थान पर बहाल कराया जाएगा। गौरतलब है कि शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद किसान का अंतिम संस्कार किया गया था। छोटे पुत्र अंकुश प्रजापति ने पिता को मुखाग्नि दी। मृतक परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत से माता-पिता, पत्नी और तीन बच्चों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। गलत चक निर्धारण के कारण जान गंवाने वाले किसान के मामले में यदि चकबंदी विभाग के लोग उसकी समस्याओं पर ध्यान देते तो उनकी जान नहीं जाती। शुक्रवार को गांव में जांच करने पहुंचे जांच अधिकारी के समक्ष गांव के लोगों ने इस तरह का बयान दिया। हालांकि चकबंदी लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है। चकबंदी अधिकारी खलीलाबाद व जांच अधिकारी ऐश मोहम्मद और सीओ चकबंदी उमेश चंद्र पांडेय सोमवार को संठी गांव पहुंचे। गांव के लोग एक स्वर में कहने लगे कि चकबंदी विभाग के लोग अगर प्रभुनाथ प्रजापति का चक गलत रूप से निर्धारण न करते तो शायद प्रभुनाथ जान नहीं देते।
प्रभुनाथ की पत्नी कमलेश ने बयान दर्ज कराया। कमलेश ने लेखपाल और एसीओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। गांव के लाेगों ने कहा कि इस मामले में चकबंदी विभाग के लोगाें ने काफी खेल किया है, जिसकी वजह से प्रभुनाथ ने जान दी है। गांव में पहुंचे जांच अधिकारी के सामने ग्रामीणों ने अपनी-अपनी नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने पुराने नक्शे को रद्द कर नए सिरे से चक का आवंटन कराए जाने की मांग की।
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मृतक की पत्नी ने बयान में लिखा कि लेखपाल और एसीओ ने रिश्वत के साथ मेरे पति को मौत के घाट उतरवा दिया। चकबंदी अधिकारी उमेश पांडेय ने बताया कि लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है। उसे कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
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तहसीलदार पहुंचे पीड़ित घर, आर्थिक सहायता व खेत बहाली का दिया आश्वासन
धनघटा। क्षेत्र के संठी गांव में चकबंदी विभाग की कथित मनमानी से परेशान किसान प्रभुनाथ प्रजापति (47) की आत्महत्या के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। रविवार को तहसीलदार धनघटा रामजी मृतक के घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। तहसीलदार ने बताया कि पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष तथा विधायक विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता दिलाने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि चकबंदी के दौरान मृतक का खेत जिस स्थान पर था, उसे उसी स्थान पर बहाल कराया जाएगा। गौरतलब है कि शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद किसान का अंतिम संस्कार किया गया था। छोटे पुत्र अंकुश प्रजापति ने पिता को मुखाग्नि दी। मृतक परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत से माता-पिता, पत्नी और तीन बच्चों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।