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मरीज को दो घंटे तक खोजते रहे सीएमएस
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मरीज को दो घंटे तक खोजते रहे सीएमएस
विधायक को फोन कर मरीज ने सुविधा न मिलने की शिकायत की थी
बाद में पता चला बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने गया था
संतकबीरनगर। सदर विधायक के फोन के बाद जिला अस्पताल के सीएमएस एक मरीज को दो घंटे तक खोजते रहे। मरीज खुद को कभी ओपीडी में बताता तो कभी जनरल वार्ड में। मरीज जहां-जहां खुद के होने की बात कहता, सीएमएस वहां-वहां उसे ढूंढने पहुंच जा रहे थे, लेकिन वह नहीं मिल रहा था। दो घंटे की इस लुकाछिपी के बाद पता चला मरीज बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में है। इसके बाद सीएमएस ने राहत की सांस ली।
दरअसल, मंगलवार सुबह नौ बजे किसी मरीज ने सदर विधायक अंकुर राज तिवारी को फोन कर बताया कि वह अस्पताल आया है और यहां पर कोई सुविधा नहीं मिल रही है। उसने यह नहीं बताया कि कौन से अस्पताल में है। इसके बाद विधायक ने मरीज को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल के सीएमएस को फोन कर दिया। विधायक के फोन के बाद सीएमएस हरकत में आ गए। उन्होंने मरीज के मोबाइल फोन कर कॉल कर उसे इमरजेंसी बुलाया। जब वह नहीं पहुंचा तो सीएमएस ने फिर फोन किया तो उसने बताया कि वह ओपीडी में है।
ओपीडी में सीएमएस पहुंचे तो वहां भी वह नहीं मिला। इसके बाद फोन किया तो पता चला जनरल वार्ड में है। जनरल वार्ड में भी वह नहीं मिला। इसके बाद फोन किया तो उसने सीटी स्कैन सेंटर में जांच कराने की बात कही। सीटी स्कैन सेंटर में जब सीएमएस पहुंचे तो वहां भी नहीं मिला। करीब दो घंटे तक मरीज की तलाश सीएमएस करते हैं। बाद में सीएमएस ने मरीज को फोन कर उसके साथ आए लोगों से बात कराने की बात कही। मरीज के साथ आए एक शख्स ने बताया कि वह बीआरडी मेडिकल कॉलेज में है।
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इतना कहते ही सीएमएस ने राहत की सांस ली और पूरे प्रकरण से विधायक को अवगत कराया। सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने बताया कि सदर विधायक ने एक मरीज के इलाज की व्यवस्था के लिए कहा था। मरीज को फोन किया तो उसने यह नहीं बताया कि वह मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में है। वह ओपीडी, इमरजेंसी, जनरल वार्ड का नाम लेता रहा। बाद में पता चला कि वह बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में है।
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विधायक को फोन कर मरीज ने सुविधा न मिलने की शिकायत की थी
बाद में पता चला बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने गया था
संतकबीरनगर। सदर विधायक के फोन के बाद जिला अस्पताल के सीएमएस एक मरीज को दो घंटे तक खोजते रहे। मरीज खुद को कभी ओपीडी में बताता तो कभी जनरल वार्ड में। मरीज जहां-जहां खुद के होने की बात कहता, सीएमएस वहां-वहां उसे ढूंढने पहुंच जा रहे थे, लेकिन वह नहीं मिल रहा था। दो घंटे की इस लुकाछिपी के बाद पता चला मरीज बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में है। इसके बाद सीएमएस ने राहत की सांस ली।
दरअसल, मंगलवार सुबह नौ बजे किसी मरीज ने सदर विधायक अंकुर राज तिवारी को फोन कर बताया कि वह अस्पताल आया है और यहां पर कोई सुविधा नहीं मिल रही है। उसने यह नहीं बताया कि कौन से अस्पताल में है। इसके बाद विधायक ने मरीज को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल के सीएमएस को फोन कर दिया। विधायक के फोन के बाद सीएमएस हरकत में आ गए। उन्होंने मरीज के मोबाइल फोन कर कॉल कर उसे इमरजेंसी बुलाया। जब वह नहीं पहुंचा तो सीएमएस ने फिर फोन किया तो उसने बताया कि वह ओपीडी में है।
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ओपीडी में सीएमएस पहुंचे तो वहां भी वह नहीं मिला। इसके बाद फोन किया तो पता चला जनरल वार्ड में है। जनरल वार्ड में भी वह नहीं मिला। इसके बाद फोन किया तो उसने सीटी स्कैन सेंटर में जांच कराने की बात कही। सीटी स्कैन सेंटर में जब सीएमएस पहुंचे तो वहां भी नहीं मिला। करीब दो घंटे तक मरीज की तलाश सीएमएस करते हैं। बाद में सीएमएस ने मरीज को फोन कर उसके साथ आए लोगों से बात कराने की बात कही। मरीज के साथ आए एक शख्स ने बताया कि वह बीआरडी मेडिकल कॉलेज में है।
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इतना कहते ही सीएमएस ने राहत की सांस ली और पूरे प्रकरण से विधायक को अवगत कराया। सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने बताया कि सदर विधायक ने एक मरीज के इलाज की व्यवस्था के लिए कहा था। मरीज को फोन किया तो उसने यह नहीं बताया कि वह मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में है। वह ओपीडी, इमरजेंसी, जनरल वार्ड का नाम लेता रहा। बाद में पता चला कि वह बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में है।