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Sant Kabir Nagar News: नहाय-खाय के साथ कल से शुरू होगा छठ महापर्व
Fri, 24 Oct 2025 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 24 Oct 2025 12:00 AM IST
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शहर के पक्का पोखरा पर वेदी बनाती महिला-संवाद
संतकबीरनगर। लोक आस्था का महापर्व छठ शनिवार से नहाय खाय के साथ शुरू हो रहा है। चार दिनों तक चलने वाले छठ की तैयारी तेजी से हो रही है। पोखरों और तालाबों के किनारे वेदी बनाने का काम महिलाओं ने किया। पोखरों की साफ-सफाई हो चुकी है, वहीं महापर्व के लिए बाजार भी सजने शुरू हो गए हैं, जहां पर शुक्रवार से महिलाएं खरीदारी में जुट जाएंगी।
इस साल 25 अक्तूबर शनिवार से नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय अनुष्ठान के साथ कार्तिक छठ पर्व शुरू हो रहा है। इस दिन छठ व्रती नियम-धर्म से सात्विक भोजन बनाकर प्रसाद स्वरूप ग्रहण करेंगी। छठी मैया को ध्यान कर छठ पूजा का संकल्प नहाय-खाय पर ही लेने का विधान है। इस दिन छठी मैया और आदित्य देव के लिए गीत गाकर उनका आह्वान किए जाने की परंपरा है। शहर के समय माता मंदिर स्थिति पक्का पोखरे पर सबसे ज्यादा भीड़ होती है। यहां पर पोखरे की साफ-सफाई व रंगाई-पुताई का कार्य हुआ है।
महिलाओं ने अपनी -अपनी जगहो पर वेदी बनाया है। जहां पर सोमवार की शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी उसके बाद मंगलवार की भोर में सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन होगा। समय माता मंदिर के पुजारी ब्रजेश मिश्र ने बताया कि 27 अक्तूबर सोमवार को अस्ताचलगामी भगवान भाष्कर को संध्याकालीन अर्घ्य अर्पण किया जाएगा। इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर छठ व्रती अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतति वृद्धि की कामना आदित्य देव से करते हैं।
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ऐसी मान्यता है कि ढलते सूरज को जल चढ़ाने से भगवान दिनकर छठ व्रती को भर-भरकर आशीष देते हैं। वहीं मंगलवार को उदीयमान सूर्य को प्रात:कालीन अर्घ्य दिया जाना है। इस दिन दीनानाथ के उगते स्वरूप का दर्शन कर छठ व्रती खुशहाली की कामना करती हैं। परिवार के लोग भी छठ व्रती को सामने से दूध-जल का अर्घ्य अपर्ण कर अपनी निष्ठा प्रकट करते हैं। छठी मैया से मंगल कामनाएं की जाती हैं। छठ पूजा का प्रसाद छठ घाट पर ही ग्रहण करने का विधान है। इसके साथ ही बाजार में सामानों की बिक्री के लिए दुकानें लगनी शुरू हो गई हैं। जहां पर तरह-तरह के फल आदि की लोग खरीदारी करेंगे।
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इस साल 25 अक्तूबर शनिवार से नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय अनुष्ठान के साथ कार्तिक छठ पर्व शुरू हो रहा है। इस दिन छठ व्रती नियम-धर्म से सात्विक भोजन बनाकर प्रसाद स्वरूप ग्रहण करेंगी। छठी मैया को ध्यान कर छठ पूजा का संकल्प नहाय-खाय पर ही लेने का विधान है। इस दिन छठी मैया और आदित्य देव के लिए गीत गाकर उनका आह्वान किए जाने की परंपरा है। शहर के समय माता मंदिर स्थिति पक्का पोखरे पर सबसे ज्यादा भीड़ होती है। यहां पर पोखरे की साफ-सफाई व रंगाई-पुताई का कार्य हुआ है।
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महिलाओं ने अपनी -अपनी जगहो पर वेदी बनाया है। जहां पर सोमवार की शाम को डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी उसके बाद मंगलवार की भोर में सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन होगा। समय माता मंदिर के पुजारी ब्रजेश मिश्र ने बताया कि 27 अक्तूबर सोमवार को अस्ताचलगामी भगवान भाष्कर को संध्याकालीन अर्घ्य अर्पण किया जाएगा। इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर छठ व्रती अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतति वृद्धि की कामना आदित्य देव से करते हैं।
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ऐसी मान्यता है कि ढलते सूरज को जल चढ़ाने से भगवान दिनकर छठ व्रती को भर-भरकर आशीष देते हैं। वहीं मंगलवार को उदीयमान सूर्य को प्रात:कालीन अर्घ्य दिया जाना है। इस दिन दीनानाथ के उगते स्वरूप का दर्शन कर छठ व्रती खुशहाली की कामना करती हैं। परिवार के लोग भी छठ व्रती को सामने से दूध-जल का अर्घ्य अपर्ण कर अपनी निष्ठा प्रकट करते हैं। छठी मैया से मंगल कामनाएं की जाती हैं। छठ पूजा का प्रसाद छठ घाट पर ही ग्रहण करने का विधान है। इसके साथ ही बाजार में सामानों की बिक्री के लिए दुकानें लगनी शुरू हो गई हैं। जहां पर तरह-तरह के फल आदि की लोग खरीदारी करेंगे।