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सावधान : सांप डसे तो झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, तुरंत पहुंचें अस्पताल
Wed, 12 Jul 2023 01:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 12 Jul 2023 01:44 AM IST
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संशोधित
फोटो अस्पताल की
- एंटी स्नैक बेनम इंजेक्शन ही कारगर उपाय, सरकारी अस्पताल में हर माह आते हैं चार से पांच केस
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अगर आपको सांप डसे तो झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, इससे जान जा सकती है। समय से अस्पताल पहुंच जाने वालों की जान बच जाती है। डॉक्टरों की सलाह है कि सांप डसने के तुरंत बाद अस्पताल पहुंचकर एंटी स्नैक बेनम इंजेक्शन लगवाना चाहिए। ऐसे मरीजों को छह घंटे तक चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाता है। इसके बाद कोई खतरा नहीं रहता है।
जिले में सांप डसने के चार से पांच केस हर माह में अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। सांप सबसे खतरनाक और ज़हरीला जीव माना जाता है। सांप का डसना घातक हो जाता है। कुछ सांप ज्यादा ज़हरीले होते हैं, तो कुछ कम। कम जहरीले सांप के डसने से भी स्थिति गंभीर हो सकती है।
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सांप डसने के लक्षण
सीएचसी खलीलाबाद के अधीक्षक डॉ राधेश्याम यादव ने बताया कि जहरीले सांप के डसने से बॉडी में कई तरह के लक्षण पैदा हो सकते हैं। डसने वाली जगह पर दर्द और सूजन, ऐंठन, मतली, उल्टी, अकड़न या कंपकंपी, एलर्जी, पलकों का गिरना, नींद आना, घाव के चारों ओर सूजन, जलन, लाल होना, त्वचा के रंग में बदलाव, दस्त, बुखार, सिरदर्द, जी मिचलाना, घाव से खून बहना, बहुत पसीना आना और अंगों के आसपास के हिस्से का सुन्न पड़ जाना शामिल है।
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लापरवाही ने ले ली थी छात्रा की जान
धनघटा क्षेत्र के नारायणपुर में 25 मई को 15 वर्षीय छात्रा शशिकला को रात में सांप ने डस लिया। इसके बाद उसे प्राइवेट चिकित्सक के पास ले गए। हालत बिगड़ी तो आजमगढ़ के अतरौलिया स्थित सरकारी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
कोट
सांप के डसने पर अगर तुरंत इलाज नहीं किया जाए तो जान जा सकती है। सांप डसने पर सबसे जरूरी है उसके लक्षणों की पहचान करना। सांप के डसने पर अस्पताल में अगर कोई मरीज आता है तो उसे पहले एंटी स्नेक बेनम का एक एमएल डोज लगाई जाती है। 15 से 20 मिनट तक देखा जाता है कि कहीं इसका कोई साइड इफेक्ट तो नहीं है। इसके बाद छह घंटे तक मरीज को निगरानी में रखा जाता है। अगर मरीज में कोई लक्षण दिखता है तो एंटी स्नेक बेनम की पर्याप्त मात्रा में डोज लगाई जाती है।
- डॉ राधेश्याम यादव, अधीक्षक सीएचसी खलीलाबाद
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सांप के डसने पर तुरंत करें यह काम
- सांप के डसने पर तुरंत इमरजेंसी ट्रीटमेंट के लिए मरीज को अस्पताल ले जाएं।
- जिस जगह पर सांप ने डसा है उस स्थान को बिल्कुल न हिलाएं।
- ब्लीडिंग होने पर खून को बहने दें। बीटाडीन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- पीड़ित व्यक्ति को शांत रखें। जितना संभव हो उसे स्थिर रखें।
- घाव को ढीली और साफ पट्टी से कवर कर दें।
- सांप के डसने के समय का ध्यान रखें।
-- -सांप के डसने के लक्षण
- दो नुकीले निशान या घाव जो छिद्रित दिखते हैं
- घाव से खून बहना, काटने के आसपास तेज दर्द
- काटने वाले स्थान पर सूजन, जलन और लाली
- त्वचा के रंग में बदलाव, दस्त और बुखार
- पेट दर्द और सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत
-- -- बारिश का पानी बिलों में घुसने से निकलते हैं सांप
बारिश का पानी सांप के बिलों में भर जाता है तो वे बाहर आकर सुरक्षित स्थान खोजते हैं। ऐसे में कई बार सांप लोगों के घरों में घुस जाते हैं। इससे सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बाहर खेतों में काम कर रहे किसान व मजदूर ज्यादातर सर्पदंश के शिकार होते हैं।
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सांप से इस तरह करें बचाव
डीएफओ आर जगदीश ने बताया कि जंगली और ऊंची घास वाले क्षेत्रों में जाने से बचने का प्रयास करें। सांप ऐसे स्थानों पर आसानी से छुप सकते हैं। बारिश के दिनों में घर के अंदर रहें और बाहर जाने से बचें। सांप इस समय अधिक गतिशील होते हैं। लंबे बूट पहनें, ताकि सांप आपके पैरों में न काट सके। गहरे गड्ढे और झरनों के पास से दूर रहें। अगर घर में सांप घुस जाए तो उसे छेड़ें नहीं, इसकी सूचना नजदीकी रेंज ऑफिस या डायल 112 पर दें। वनकर्मी सांप को पकड़कर ले जाएंगे।
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सांप काटने पर यह सावधानी बरतें
चिकित्सा अधीक्षक एचके मिश्रा ने बताया कि सांप के काटने पर घबराना नहीं चाहिए। काटे हुए स्थान को उचित एंटीसेप्टिक साबुन और गर्म पानी से धोना चाहिए। शीघ्र नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए। जिले की सभी सीएचसी व ब्लाॅक स्तरीय पीएचसी में एंटी स्नैक वेनम उपलब्ध है।
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फोटो अस्पताल की
- एंटी स्नैक बेनम इंजेक्शन ही कारगर उपाय, सरकारी अस्पताल में हर माह आते हैं चार से पांच केस
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अगर आपको सांप डसे तो झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, इससे जान जा सकती है। समय से अस्पताल पहुंच जाने वालों की जान बच जाती है। डॉक्टरों की सलाह है कि सांप डसने के तुरंत बाद अस्पताल पहुंचकर एंटी स्नैक बेनम इंजेक्शन लगवाना चाहिए। ऐसे मरीजों को छह घंटे तक चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाता है। इसके बाद कोई खतरा नहीं रहता है।
जिले में सांप डसने के चार से पांच केस हर माह में अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। सांप सबसे खतरनाक और ज़हरीला जीव माना जाता है। सांप का डसना घातक हो जाता है। कुछ सांप ज्यादा ज़हरीले होते हैं, तो कुछ कम। कम जहरीले सांप के डसने से भी स्थिति गंभीर हो सकती है।
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सांप डसने के लक्षण
सीएचसी खलीलाबाद के अधीक्षक डॉ राधेश्याम यादव ने बताया कि जहरीले सांप के डसने से बॉडी में कई तरह के लक्षण पैदा हो सकते हैं। डसने वाली जगह पर दर्द और सूजन, ऐंठन, मतली, उल्टी, अकड़न या कंपकंपी, एलर्जी, पलकों का गिरना, नींद आना, घाव के चारों ओर सूजन, जलन, लाल होना, त्वचा के रंग में बदलाव, दस्त, बुखार, सिरदर्द, जी मिचलाना, घाव से खून बहना, बहुत पसीना आना और अंगों के आसपास के हिस्से का सुन्न पड़ जाना शामिल है।
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लापरवाही ने ले ली थी छात्रा की जान
धनघटा क्षेत्र के नारायणपुर में 25 मई को 15 वर्षीय छात्रा शशिकला को रात में सांप ने डस लिया। इसके बाद उसे प्राइवेट चिकित्सक के पास ले गए। हालत बिगड़ी तो आजमगढ़ के अतरौलिया स्थित सरकारी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
कोट
सांप के डसने पर अगर तुरंत इलाज नहीं किया जाए तो जान जा सकती है। सांप डसने पर सबसे जरूरी है उसके लक्षणों की पहचान करना। सांप के डसने पर अस्पताल में अगर कोई मरीज आता है तो उसे पहले एंटी स्नेक बेनम का एक एमएल डोज लगाई जाती है। 15 से 20 मिनट तक देखा जाता है कि कहीं इसका कोई साइड इफेक्ट तो नहीं है। इसके बाद छह घंटे तक मरीज को निगरानी में रखा जाता है। अगर मरीज में कोई लक्षण दिखता है तो एंटी स्नेक बेनम की पर्याप्त मात्रा में डोज लगाई जाती है।
- डॉ राधेश्याम यादव, अधीक्षक सीएचसी खलीलाबाद
सांप के डसने पर तुरंत करें यह काम
- सांप के डसने पर तुरंत इमरजेंसी ट्रीटमेंट के लिए मरीज को अस्पताल ले जाएं।
- जिस जगह पर सांप ने डसा है उस स्थान को बिल्कुल न हिलाएं।
- ब्लीडिंग होने पर खून को बहने दें। बीटाडीन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- पीड़ित व्यक्ति को शांत रखें। जितना संभव हो उसे स्थिर रखें।
- घाव को ढीली और साफ पट्टी से कवर कर दें।
- सांप के डसने के समय का ध्यान रखें।
- दो नुकीले निशान या घाव जो छिद्रित दिखते हैं
- घाव से खून बहना, काटने के आसपास तेज दर्द
- काटने वाले स्थान पर सूजन, जलन और लाली
- त्वचा के रंग में बदलाव, दस्त और बुखार
- पेट दर्द और सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत
बारिश का पानी सांप के बिलों में भर जाता है तो वे बाहर आकर सुरक्षित स्थान खोजते हैं। ऐसे में कई बार सांप लोगों के घरों में घुस जाते हैं। इससे सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बाहर खेतों में काम कर रहे किसान व मजदूर ज्यादातर सर्पदंश के शिकार होते हैं।
सांप से इस तरह करें बचाव
डीएफओ आर जगदीश ने बताया कि जंगली और ऊंची घास वाले क्षेत्रों में जाने से बचने का प्रयास करें। सांप ऐसे स्थानों पर आसानी से छुप सकते हैं। बारिश के दिनों में घर के अंदर रहें और बाहर जाने से बचें। सांप इस समय अधिक गतिशील होते हैं। लंबे बूट पहनें, ताकि सांप आपके पैरों में न काट सके। गहरे गड्ढे और झरनों के पास से दूर रहें। अगर घर में सांप घुस जाए तो उसे छेड़ें नहीं, इसकी सूचना नजदीकी रेंज ऑफिस या डायल 112 पर दें। वनकर्मी सांप को पकड़कर ले जाएंगे।
सांप काटने पर यह सावधानी बरतें
चिकित्सा अधीक्षक एचके मिश्रा ने बताया कि सांप के काटने पर घबराना नहीं चाहिए। काटे हुए स्थान को उचित एंटीसेप्टिक साबुन और गर्म पानी से धोना चाहिए। शीघ्र नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए। जिले की सभी सीएचसी व ब्लाॅक स्तरीय पीएचसी में एंटी स्नैक वेनम उपलब्ध है।