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सावधान: फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचाते हैं रासायनिक रंग

Wed, 12 Mar 2025 11:25 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 12 Mar 2025 11:25 PM IST
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Caution: Chemical colours also harm the lungs
बैंक चौराहे पर रंग-गुलाल की खरीदारी करते लोग। 
संतकबीरनगर। होली पर अपनों को ऐसे रंगों से रंगने की चाहत सभी की होती है जो कई दिनों तक न छूटे। यह चाहत यदि अमल में लाई जाए तो अपनों की सेहत को काफी नुकसान पहुंच सकता है। लंबे समय तक न छूटने वाले रंग लगाने की चाहत में कई बार लोग रासायनिक रंगों का इस्तेमाल करते हैं। यह रासायनिक रंग त्वचा और आंखों को ही नहीं बल्कि फेफड़े और पेट के आंतरिक हिस्से को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये खराब रंग 25 ग्राम की पैकिंग में 25 से 35 रुपये में मिल रहे हैं। जबकि इतने की वजन के हर्बल रंगों के पैकेट की कीमत 90 से 130 रुपये तक है।
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त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले इन रंगों को तैयार करने के लिए सिल्क (चांदी की तरह दिखने वाला ) व सीसा मिलाया जाता है। होली के दिन कई उत्साही युवक चेहरे पर सिल्क का लेप पोत लेते हैं। सीसा और सिल्क सांस के जरिये अंदर चला जाए तो फेफड़ों और पेट को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बाजार में ऐसे रासायनिक रंगों की भरमार है। दुकानदार होली के अवसर पर इसे बेचने की तैयारी में लगे हैं। हालांकि रंगों की दुकान भी बाजार में सज गई हैं। जहां अबीर-गुलाल से लेकर पारंपरिक रंग तक उपलब्ध हैं।
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बीते वर्ष होली पर लोगों ने एक-दूसरे को चटक रंग लगाया था तो जिन लोगों को यह रंग लगाए गए उन्हें आंखों और त्वचा में दिक्कत हुई थी। वहीं, त्वचा पर फफोले जैसे मामले सामने आए थे। ऐसी घटनाएं हर वर्ष सामने आती हैं। इसके बावजूद लोग रासायनिक रंग इस्तेमाल करते हैं। फिर से होली नजदीक आ गई है, ऐसे में थोक बाजार में रंगों का भारी स्टॉक किया गया है।
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यह सावधानी बरतें..

- होली पर रंग खेलने से पहले अपने शरीर पर नारियल या सरसों का तेल लगा लें।
- फुल आस्तीन के कपड़े पहने ताकि त्वचा पर रंग कम ही पड़े।
- रंग खेलने से पहले आंखों पर चश्मा लगाएं और मास्क पहनें।
- हर रंग में अलग-अलग रासायनिक तत्व होते हैं।
- हरा रंग बनाने में कॉपर सल्फेट का इस्तेमाल होता है, जो आंखों में एलर्जी के साथ अंधा भी कर सकता है। इससे बचने की कोशिश करें।
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रासायनिक रंगों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से आंखों में लंबे समय तक किरकिरी होती रहती है। आंखों को जोर से रगड़ने पर कार्नियल इपीथिलियम को नुकसान होता है। इससे आंखों की रोशनी भी प्रभावित होती है। रासायनिक तत्वों के फेफड़ों में पहुंचने से सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है।
-डॉ. कुमार सिद्धार्थ, फिजिशियन, जिला अस्पताल
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