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प्राइवेट अस्पताल के प्रबंधक, डॉक्टर और आशा कार्यकर्ता के खिलाफ केस दर्ज

Wed, 20 Oct 2021 11:36 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 20 Oct 2021 11:36 PM IST
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case against hospital manager doctor and asha
प्राइवेट अस्पताल के प्रबंधक, डॉक्टर और आशा कार्यकर्ता के खिलाफ केस दर्ज
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अस्पताल में अंग को निकाल कर बेच देने और बच्चे को गायब करने का मढ़ा आरोप
एक सप्ताह पूर्व ऑपरेशन के बाद हो गई थी प्रसूता मौत
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। एक सप्ताह पूर्व ऑपरेशन के दौरान लापरवाही की वजह से प्रसूता की हुई मौत से नाराज पीड़ित परिजनों ने प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर, प्रबंधक, स्टाफ और आशा कार्यकर्ता पर गंभीर आरोप मढ़े। परिजनों ने शव को जलाने की बजाए दफन किया है। इस मामले को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट में पहुंचे काफी संख्या में ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया और अपर एसडीएम को मांगपत्र देकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने संबंधित अस्पताल के डॉक्टर, प्रबंधक, स्टाफ और आशा कार्यकर्ता के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, साजिश, बच्चे को गायब करने, अपशब्द कहने और जानमाल की धमकी देने का केस दर्ज किया।

बूधा कला गांव निवासी राम किशोर पुत्र विक्रम प्रसाद का आरोप है कि उसकी पत्नी सुनीता गर्भवती थी और उसके पेट में दो बच्चे थे। नौ अक्तूबर को प्रसव के लिए पत्नी को एंबुलेंस से गांव की आशा कार्यकर्ता के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चुुरेब ले गए, जहां सुबह करीब दस बजे नार्मल एक बच्ची पैदा हुई। थोड़ी देर बाद उसे बताया गया कि दूसरा बच्चा उल्टा है और पत्नी को किसी और अस्पताल ले जाना पड़ेगा। वह अपनी पत्नी को लेकर मेंहदावल बाईपास से 100 कदम पश्चिम बस्ती-गोरखपुर रोड खलीलाबाद स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में ले गया। वहां उसकी पत्नी को भर्ती कर लिया गया। करीब दो बजे उसे बताया गया कि सुनीता काफी गंभीर हाल में है और अब इलाज के लिए गोरखपुर ले जाना पड़ेगा। आरोप है कि उसकी पत्नी जब उस हॉस्पिटल से गोरखपुर ले जाने के लिए निकाली गई तो बिलकुल शांत थी। वह अपनी पत्नी को लेकर तारामंडल गोरखपुर स्थित एक अस्पताल में ले गया, जहां बाहर से ही देखकर डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज गोरखपुर ले जाने का सुझाव दिया। वह अपनी पत्नी को लेकर जैसे ही मेडिकल कॉलेज के लिए चला तो आशा कार्यकर्ता व एंबुलेंस चालक ने बताया कि उसकी पत्नी की मृत्यु हो गई है। वह पत्नी को लेकर घर चला आया। अंतिम संस्कार के लिए नहलाने के दौरान महिलाओं ने देखा कि सुनीता का पेट चीरा गया है। आरोप है कि उसे पूरा विश्वास है कि खलीलाबाद स्थित अस्पताल के डॉक्टर, प्रबंधक व स्टाफ और आशा कार्यकर्ता ने साजिश कर उसकी पत्नी का ऑपरेशन कर बच्चा और अन्य अंग निकाल लिया। आरोप है कि उसकी पत्नी की हत्या कर दी। उसे दूसरा बच्चा भी नहीं दिया गया। उसे पेट चीरने की जानकारी हुई तो पत्नी के शव को जलाने की बजाय दफन किया है। उसने जब खलीलाबाद स्थित अस्पताल के डॉक्टर से जानकारी करनी चाही तो वह अपशब्द कहते हुए जान से मारने की धमकी देकर भगा दिए। उसे विश्वास है कि अस्पताल के डॉक्टर, प्रबंधक, स्टाफ और आशा कार्यकर्ता ने मिलकर उसके बच्चे को रख लिया है और उसकी पत्नी सुनीता का अंग निकाल कर बेच दिया। आरोप है कि कार्रवाई करने की बात कही तो उस पर सुलह-समझौते का दबाव बना रहे हैं। कोतवाल अनिल कुमार ने बताया कि अस्पताल के डॉक्टर, प्रबंधक, स्टाफ और आशा कार्यकर्ता के खिलाफ गैरइरादतन हत्या, साजिश, अपशब्द कहने और जानमाल की धमकी देने का केस दर्ज कर लिया गया है। विवेचना से जो तथ्य सामने आएगा, आगे उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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