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मन को छू गई बेबसी तो खुद के रकम से बनवा दिया घर

Mon, 09 Nov 2020 11:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 09 Nov 2020 11:27 PM IST
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Built a house own money
विकास खंड नाथनगर के चंदापार गांव में दिलीप मिश्रा बन कर तैयार हुआ मकान। - फोटो : KHALILABAD
मन को छू गई बेबसी तो खुद की रकम से बनवा दिया घर
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संतकबीरनगर। गरीब परिवार की बेबसी देखी तो समाजसेवी डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेेदी के मन को छू गई। करीब 30 साल से ठंड, गर्मी और बारिश की मार को टूटी-फूटी झोपड़ी में एक गरीब परिवार सहन कर रहा था। इस परिवार के हालात न तो प्रशासन को नजर आई और न ही जनप्रतिनिधियों को। डॉ. उदय ने झोपड़ी की जगह खुद के रकम से गरीब का मकान बनवाने की ठान ली। करीब छह लाख रुपये खर्च हुए और तीन महीने का वक्त लगा। गरीब का आशियाना अब बनकर तैयार हो गया। इस बार दीपावली गरीब परिवार की जिंदगी में रोशनी लेकर आई है।
नाथनगर विकास खंड के चंदापार गांव निवासी दिलीप मिश्र के परिवार में पांच सदस्य हैं। गरीबी की वजह से पन्नी तानकर परिवार के लोग लंबे समय से गुजारा कर रहे थे। ठंड और गर्मी का मौसम तो परिवार के लोग गुजार लेेते थे, लेकिन बारिश में पानी की टपकती बूंदे परिवार के लोगों की रात में नींद हराम कर देती थी। पूरी रात बैठकर परिवार को गुजारना पड़ता था। वैसे तो सरकार की ओर से आवास की योजनाएं संचालित हैं, लेकिन जिम्मेदारों की नजर इस परिवार पर नहीं पड़ी। कोरोना संक्रमण काल में समाजसेवी डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी जब क्षेत्र में जरूरतमंदों की मदद में निकले तो उन्हें चंदापार के दिलीप मिश्र के परिजनों की समस्या से लोगों ने अवगत कराया। जब गरीब के घर पहुंचे और हालात देखा तो उनके मन में गरीबी के दर्द का अहसास हुआ। चतुर्वेदी बताते हैं कि दिलीप मिश्र का मकान खुद के रकम से बनवाने की ठान ली। मकान निर्माण में तीन महीने का वक्त लगा और करीब छह लाख रुपये खर्च हुए। दो कमरा, किचन, स्नानघर, बरामदा और शौचालय का निर्माण कराया गया है। 11 नवंबर को पूजा-पाठ के साथ गृहप्रवेश का कार्यक्रम है। उसके बाद गरीब परिवार खुद के मकान में जिंदगी गुजारेगा। इस परिवार की आगे भी हर संभव मदद करेंगे। दिलीप मिश्र बताते हैं कि लंबे समय से पत्नी और बच्चों का अपने घर का इंतजार था, लेकिन गरीबी की वजह से सपना साकार नहीं हो रहा था। डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी ने उनके परिवार की ओर ध्यान दिया तो उन्हें भी घर नसीब हो गया। दिवाली पर वह अपने घर में दीए जलाएंगे।
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बेसहारा भाई-बहनों की परवरिश का भी उठाया जिम्मा
नाथनगर विकास खंड के ही तरयापार गांव निवासी बेसहारा 12 वर्षीय हर्षिता और आठ वर्षीय आयुष को समाजसेवी डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी ने गोद ले लिया है। इन बच्चों की मां नूतन की चार साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। पिता नितीश की डेढ़ साल पहले हादसे में मौत हो गई थी। बुजुर्ग बाबा राममिलन पांडेय और दादी इंद्रावती पोते-पोती की परवरिश कर रहे थे। इसी बीच दादा रामलिन पांडेय का भी निधन हो गया। बुजुर्ग दादी के जिम्में भाई-बहन की देखरेख की जिम्मेदारी आ गई। जानकारी होने पर डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी ने बुजुर्ग परिवार की आर्थिक मदद की। इसके साथ ही भाई-बहन की पढ़ाई का जिम्मा उठा लिया। दोनों का दाखिला भी एसआर इंटर नेशनल एकेडमी में करवा दिया।
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