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‘मानसिकता बदलने से ही महिलाएं बनेंगी अपराजिता’
संतकबीरनगर
Updated Sat, 01 Dec 2018 11:32 PM IST
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‘मानसिकता बदलने से ही महिलाएं बनेंगी अपराजिता’
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। समाज की पुरुषवादी सोच में परिवर्तन से ही महिलाओं की स्थिति में बदलाव आएगा। परिवर्तन हो भी रहा है. लेकिन अंतर इतना ज्यादा था कि बराबरी दिखने में अभी कुछ और वक्त लगेगा। यह सौभाग्य है कि भारत की महिलाओं को यूरोप व एशिया के कई प्रगतिशील देशों से पहले ही बराबरी का अधिकार मिल गया था। यह कहना है कि एचआरपीजी कॉलेज की मनोविज्ञान की शिक्षक डॉ. मंजू मिश्रा का। उन्होंने यहां अमर उजाला दफ्तर में अपराजिता अभियान के तहत आयोजित महिला सशक्तिकरण गोष्ठी को संबोधित किया।
डॉ. मंजू मिश्रा ने कहा कि महज एक दशक पहले स्कूल-कॉलेजों में लड़कियां सहमी हुई रहती थीं, लेकिन अब वे लड़कों की तरह ही स्वतंत्रता व स्वाभिमान के साथ पढ़ाई करती हैं। परिवर्तन घरों में भी आया है। एक पीढ़ी पहले तक सास-बहू के बीच जो दूरी थी वह अब कम हुई है। महिला एसओ अनीता यादव ने अपनी संघर्ष गाथा सुनाते हुए कहा कि जब वे गांव से गोरखपुर विश्वविद्यालय में पढ़ने गईं थी तो ऐसा करने वाली अपने गांव की पहली लड़की थीं लेकिन अब तमाम लड़कियां उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। स्कूल-कॉलेजों के साथ-साथ समाज के अन्य क्षेत्रों में भी महिलाओं की संख्या बढ़ी है। नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी बीना सिंह ने कहा कि महिलाएं तेजी से समाज में अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं। बदलाव की बयार तेज हो रही है, परंतु अभी बहुत कार्य बाकी है। इसी का असर है कि अब हर कार्यक्रम में महिलाओं की हालत पर ही चर्चा हो रही है। जिला अस्पताल की काउंसलर मुमताज खातून ने कहा कि बदलाव की शुरूआत महिलाओं को घर से ही करनी होगी।
घर की बड़ी महिलाएं ही लड़कियों को इतना दबा देती हैं, कि वे खुलकर अपनी बात नहीं रख पातीं। अगर घर में ही महिलाओं को आजादी नहीं मिलेगी तो बाहर उन्हें कहां अवसर मिलेगा। इसलिए महिलाओं को घर में खुलकर विचार रखने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जागरूकता से ही महिलाओं में आत्मविश्वास आएगा। कार्यक्रम में आशा संघ की जिलाध्यक्ष सरोज यादव, शिक्षक मीरा भारती, बिंदू यादव, अनीता वर्मा, सुनीता मोदनवाल, हरजीत कौर, दीक्षा, ऋचा, कमलावती आदि ने भी अपने विचार रखे।
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डॉ. मंजू मिश्रा ने कहा कि महज एक दशक पहले स्कूल-कॉलेजों में लड़कियां सहमी हुई रहती थीं, लेकिन अब वे लड़कों की तरह ही स्वतंत्रता व स्वाभिमान के साथ पढ़ाई करती हैं। परिवर्तन घरों में भी आया है। एक पीढ़ी पहले तक सास-बहू के बीच जो दूरी थी वह अब कम हुई है। महिला एसओ अनीता यादव ने अपनी संघर्ष गाथा सुनाते हुए कहा कि जब वे गांव से गोरखपुर विश्वविद्यालय में पढ़ने गईं थी तो ऐसा करने वाली अपने गांव की पहली लड़की थीं लेकिन अब तमाम लड़कियां उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। स्कूल-कॉलेजों के साथ-साथ समाज के अन्य क्षेत्रों में भी महिलाओं की संख्या बढ़ी है। नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी बीना सिंह ने कहा कि महिलाएं तेजी से समाज में अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं। बदलाव की बयार तेज हो रही है, परंतु अभी बहुत कार्य बाकी है। इसी का असर है कि अब हर कार्यक्रम में महिलाओं की हालत पर ही चर्चा हो रही है। जिला अस्पताल की काउंसलर मुमताज खातून ने कहा कि बदलाव की शुरूआत महिलाओं को घर से ही करनी होगी।
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घर की बड़ी महिलाएं ही लड़कियों को इतना दबा देती हैं, कि वे खुलकर अपनी बात नहीं रख पातीं। अगर घर में ही महिलाओं को आजादी नहीं मिलेगी तो बाहर उन्हें कहां अवसर मिलेगा। इसलिए महिलाओं को घर में खुलकर विचार रखने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जागरूकता से ही महिलाओं में आत्मविश्वास आएगा। कार्यक्रम में आशा संघ की जिलाध्यक्ष सरोज यादव, शिक्षक मीरा भारती, बिंदू यादव, अनीता वर्मा, सुनीता मोदनवाल, हरजीत कौर, दीक्षा, ऋचा, कमलावती आदि ने भी अपने विचार रखे।
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