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एक ही जगह कर सकते हैं वेदों और कुरान का अध्ययन
Sant kabir nagar
Updated Mon, 28 Oct 2013 05:39 AM IST
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संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के नूरी मस्जिद के सामने की लाइब्रेरी में सभी धर्मों की किताबें उपलब्ध हैं। लाइब्रेरी में कुरान के साथ-साथ वेदों के अध्ययन करने वालों के लिए किताबों का संग्रह भी मौजूद है। बिना किसी सरकारी मदद के लाइब्रेरी का संचालन कर रहे मौलाना साबिर अली कासमी चतुर्वेदी किताबों को संजोने में लगे रहते हैं।
दारूल इफ्ता व इमाम अबू हनीफा नाम की यह लाइब्रेरी कुछ लोगाें के चंदे और सहयोग से चल रहा है। इस लाइब्रेरी ने कुछ किताबें स्वयं भी छापी हैं। जिसे अन्य जगहोें पर बेचा भी गया है। जिसमें मक्का या मुक्तेश्वर, कल्कि अवतार कौन है, नराशंस कौन है, पुरुष मेधा या बकरी, ईद आदि किताबें प्रमुख हैं। इसके अलावा चारों वेद यहां मौजूद हैं। कुरान का हिंदी अनुवाद कर पुस्तक प्रेमियों को बिल्कुल मुफ्त दिया जाता है। चाहे जिस धर्म का व्यक्ति हो, उसे किताबें दी जाती है। लाइब्रेरी चलाने वाले मौलाना साबिर अली कासमी चतुर्वेदी चारो वेदों के ज्ञाता हैं। लाइब्रेरी के सह संचालक मौलाना अब्दुल हफीज कासमी और मौलाना नूरूलहक साहब कासमी ने बताया कि लाइब्रेरी हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई सभी के लिए खुली रहती है। लाइब्रेरी चलाने में शहर के मास्टर अख्तर आलम, डॉक्टर हामिद अंसारी, मौलाना शाहिद सहित कुछ अन्य लोग मदद करते हैं। इस लाइब्रेरी में एक हजार से अधिक पुस्तकें हैं। जहां पर बैठ कर आसानी से पुस्तकों का अध्ययन किया जा सकता है। इसके अलावा पुस्तकों को घर ले जाकर भी अध्ययन किया जा सकता है। अगर इस लाइब्रेरी को सरकारी मदद मिले तो यह लाइब्रेरी एक मिसाल कायम करेगी।
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दारूल इफ्ता व इमाम अबू हनीफा नाम की यह लाइब्रेरी कुछ लोगाें के चंदे और सहयोग से चल रहा है। इस लाइब्रेरी ने कुछ किताबें स्वयं भी छापी हैं। जिसे अन्य जगहोें पर बेचा भी गया है। जिसमें मक्का या मुक्तेश्वर, कल्कि अवतार कौन है, नराशंस कौन है, पुरुष मेधा या बकरी, ईद आदि किताबें प्रमुख हैं। इसके अलावा चारों वेद यहां मौजूद हैं। कुरान का हिंदी अनुवाद कर पुस्तक प्रेमियों को बिल्कुल मुफ्त दिया जाता है। चाहे जिस धर्म का व्यक्ति हो, उसे किताबें दी जाती है। लाइब्रेरी चलाने वाले मौलाना साबिर अली कासमी चतुर्वेदी चारो वेदों के ज्ञाता हैं। लाइब्रेरी के सह संचालक मौलाना अब्दुल हफीज कासमी और मौलाना नूरूलहक साहब कासमी ने बताया कि लाइब्रेरी हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई सभी के लिए खुली रहती है। लाइब्रेरी चलाने में शहर के मास्टर अख्तर आलम, डॉक्टर हामिद अंसारी, मौलाना शाहिद सहित कुछ अन्य लोग मदद करते हैं। इस लाइब्रेरी में एक हजार से अधिक पुस्तकें हैं। जहां पर बैठ कर आसानी से पुस्तकों का अध्ययन किया जा सकता है। इसके अलावा पुस्तकों को घर ले जाकर भी अध्ययन किया जा सकता है। अगर इस लाइब्रेरी को सरकारी मदद मिले तो यह लाइब्रेरी एक मिसाल कायम करेगी।
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