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दूसरे अर्घ्य के साथ संपन्न हुई छठ पूजा
Sant kabir nagar
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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संतकबीरनगर। भगवान भाष्कर को उगते समय अर्घ्य देने के लिए तड़के घाट पर पहुंच कर व्रती महिलाओं ने पूजन स्थल पर वेदी सजा दिए। गन्ने के मंडप में गीत गाते हुए छठी मैया की विधिवत पूजा की। उन्हें चावल का पीला अच्छत, चंदन, पुष्प, सिंदूर से पूजकर नारियल, शरीफा, ठेकुआ चढ़ाया। दीप जलाए और मन्नतें मांगी।
भगवान भाष्कर को अर्घ्य अर्पित करने के बाद महिलाएं पूजा मंडप में पुन: मां के सामने पहुंचीं। देवी की वेदी के सामने आरती उतार प्रणाम कर मनोवांछित वर मांगा। फिर पति के हाथाें प्रसाद ग्रहण किया। इस बीच घाट पर पहुंचे सभी लोग अपने परिजनों के साथ अलग-अलग इस परंपरा को निभाने में लगे रहे। हर मंडप में देवपुरी सा दृश्य उपस्थित था। खलीलाबाद के कोतवाली के उत्तर पोखरे पर हर वर्ष की भांति छठ माता की मूर्ति भी बनाई गई थी। नगरपालिका प्रशासन के साथ जिला प्रशासन ने प्रकाश के साथ पेयजल और सुरक्षा का बंदोबस्त किया था। पुलिस भी लगी रही। इसी प्रकार सुगर मिल कालोनी के सरोवर और बिधियानी मां समय जी के पोखरे पर जुटे श्रद्धालुआें ने भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिए ओर छठ मैया के गीताें के बीच पूजा अर्चना की। छत्तीस घंटे का कठोर निर्जल व्रत करते हुए सूर्य देवता को अपनी श्रद्धा अर्पित करने वाले भक्तों ने पूजा स्वीकार करने की कामना की। धनघटा के बिड़हरघाट, हरिहरपुर नगरपंचायत के पोखरे और कुआनो नदी के किनारे राजघाट और मुखलिसपुर मंदिर के पास, बखिरा के भंगेश्वरनाथ, मेंहदावल के कुबेरनाथ पोखरे तथा राप्ती नदी के तट पर श्रद्धालुओं ने प्रात:काल उदय होते सूर्य को अर्घ्य दिए। पूजा स्थलों पर पुलिस सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही।
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भगवान भाष्कर को अर्घ्य अर्पित करने के बाद महिलाएं पूजा मंडप में पुन: मां के सामने पहुंचीं। देवी की वेदी के सामने आरती उतार प्रणाम कर मनोवांछित वर मांगा। फिर पति के हाथाें प्रसाद ग्रहण किया। इस बीच घाट पर पहुंचे सभी लोग अपने परिजनों के साथ अलग-अलग इस परंपरा को निभाने में लगे रहे। हर मंडप में देवपुरी सा दृश्य उपस्थित था। खलीलाबाद के कोतवाली के उत्तर पोखरे पर हर वर्ष की भांति छठ माता की मूर्ति भी बनाई गई थी। नगरपालिका प्रशासन के साथ जिला प्रशासन ने प्रकाश के साथ पेयजल और सुरक्षा का बंदोबस्त किया था। पुलिस भी लगी रही। इसी प्रकार सुगर मिल कालोनी के सरोवर और बिधियानी मां समय जी के पोखरे पर जुटे श्रद्धालुआें ने भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिए ओर छठ मैया के गीताें के बीच पूजा अर्चना की। छत्तीस घंटे का कठोर निर्जल व्रत करते हुए सूर्य देवता को अपनी श्रद्धा अर्पित करने वाले भक्तों ने पूजा स्वीकार करने की कामना की। धनघटा के बिड़हरघाट, हरिहरपुर नगरपंचायत के पोखरे और कुआनो नदी के किनारे राजघाट और मुखलिसपुर मंदिर के पास, बखिरा के भंगेश्वरनाथ, मेंहदावल के कुबेरनाथ पोखरे तथा राप्ती नदी के तट पर श्रद्धालुओं ने प्रात:काल उदय होते सूर्य को अर्घ्य दिए। पूजा स्थलों पर पुलिस सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही।
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