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शौचालय घपले में फंसे प्रधान-सचिव
Sant kabir nagar
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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संतकबीरनगर। विकास खंड हैंसर बाजार के ग्राम पंचायत आगापुर उर्फ गुलरिहा में शौचालय की जांच में 2.62 लाख का घपला उजागर हुआ है। जांच में प्रधान, वर्तमान सचिव और दो पूर्व सचिव दोषी पाए गए हैं। डीएम ने इन्हें नोटिस भेजकर 15 दिवस में स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब न देने पर कार्रवाई की जा सकती है।
ग्रामीण ओमप्रकाश, रामतीरथ आदि ने ग्राम पंचायत आगापुर उर्फ गुलरिहा में गांव में शौचालय मद में घपला किए जाने का आरोप लगाते हुए शपथ पत्र के साथ डीएम को आवेदन दिया था। डीएम ने प्रकरण की जांच जिला परियोजना समन्वयक निर्मल भारत अभियान संतकबीरनगर से कराया। जांच अधिकारी ने जांच रिपोर्ट में कहा है कि ग्राम पंचायत आगापुर उर्फ गुलरिहा में 101 व्यक्तिगत शौचालय के लिए 3,220 रुपये प्रति शौचालय की दर से 30 मार्च 2012 को चेक संख्या 1,16,735 के जरिए तीन लाख तेईस हजार दो सौ रुपये नाम ग्राम पंचायत को आवंटित किया गया था। शौचालय मद में दिए गए समस्त धनराशि को ग्राम प्रधान और सचिव ने ग्राम पंचायत के खाते से आहरण कर लिया। गांव में सिर्फ 196 व्यक्तिगत शौचालय का ही निर्माण कराया गया। शेष धनराशि दो लाख 62 हजार 400 रुपये का गबन / दुर्विनियोग कर लिया गया। जांच में प्रधान रामसुरेश, सचिव इंद्रेश कुमार और तत्कालीन सचिव अशोक कुमार गुप्त तथा दिवाकर सिंह प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए। डीएम राजेश कुमार ने बताया कि शौचालय मद की धनराशि के घपले के दोषी पाए गए प्रधान, सचिव और दो तत्कालीन सचिव को नोटिस भेजकर 15 दिवस के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। संतोषजनक जवाब न देने पर ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार को अतिक्रमित कर दिया जाएगा और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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ग्रामीण ओमप्रकाश, रामतीरथ आदि ने ग्राम पंचायत आगापुर उर्फ गुलरिहा में गांव में शौचालय मद में घपला किए जाने का आरोप लगाते हुए शपथ पत्र के साथ डीएम को आवेदन दिया था। डीएम ने प्रकरण की जांच जिला परियोजना समन्वयक निर्मल भारत अभियान संतकबीरनगर से कराया। जांच अधिकारी ने जांच रिपोर्ट में कहा है कि ग्राम पंचायत आगापुर उर्फ गुलरिहा में 101 व्यक्तिगत शौचालय के लिए 3,220 रुपये प्रति शौचालय की दर से 30 मार्च 2012 को चेक संख्या 1,16,735 के जरिए तीन लाख तेईस हजार दो सौ रुपये नाम ग्राम पंचायत को आवंटित किया गया था। शौचालय मद में दिए गए समस्त धनराशि को ग्राम प्रधान और सचिव ने ग्राम पंचायत के खाते से आहरण कर लिया। गांव में सिर्फ 196 व्यक्तिगत शौचालय का ही निर्माण कराया गया। शेष धनराशि दो लाख 62 हजार 400 रुपये का गबन / दुर्विनियोग कर लिया गया। जांच में प्रधान रामसुरेश, सचिव इंद्रेश कुमार और तत्कालीन सचिव अशोक कुमार गुप्त तथा दिवाकर सिंह प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए। डीएम राजेश कुमार ने बताया कि शौचालय मद की धनराशि के घपले के दोषी पाए गए प्रधान, सचिव और दो तत्कालीन सचिव को नोटिस भेजकर 15 दिवस के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। संतोषजनक जवाब न देने पर ग्राम प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार को अतिक्रमित कर दिया जाएगा और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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