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छठ की तैयारियां पूरी, पहला अर्घ्य आज
Sant kabir nagar
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
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संतकबीरनगर। छठ पूजा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला मुख्यालय समेत सभी ग्रामीण क्षेत्रों के पोखरे और नदी के किनारे स्थित पूजन स्थलों पर साफ-सफाई के बाद प्रकाश आदि की व्यवस्था कर दी गई। श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने पूजन सामग्री में डलिया, नारियल, सभी प्रकार के फल, आदि की खरीददारी की। खरना में खीर, पूरी का भोजन करेंगी। उसके बाद 36 घंटे का निर्जल व्रत शुरू हो जाएगा।
नगरपालिका के ईओ के अनुसार खलीलाबाद के कोतवाली के उत्तर के पोखरे, शुगर मिल और बिधियानी के पोखरे के पास साफ-सफाई कराकर चूना डाल दिया गया है। विद्युत व्यवस्था की जा रही है, जो सोमवार तक पूरी करा दी जाएगी। मगहर में आमी नदी के किनारे शिव मंदिर से बाईपास तक घाट के किनारे प्रकाश की व्यवस्था कराई जा रही है। इसी प्रकार मेंहदावल में कुबेर नाथ, बखिरा में भंगेश्वरनाथ, हरिहरपुर में कठिनइया के किनारे और धनघटा में घाघरा के तटों पर लोगों ने अपने-अपने लिए पूजा स्थल निर्धारित किए। राप्ती के तट पर भी ग्रामीणाें द्वारा अपने स्तर से जगह-जगह पूजा स्थलों की सफाई की गई।
सूर्य की उपासना के लिए कठोर तप
छठ पूजा के लिए रविवार की शाम को खरना के बाद महिलाओं ने 36 घंटे का कठोर निर्जल व्रत शुरू किया। खलीलाबाद की सुमन तिवारी ने कहा कि सोमवार को दिनभर जल की बूंद भी ग्रहण नहीं करेंगी। सायंकाल दिन रहते ही पूजन सामग्री लेकर सरोवर के घाट पर जाएंगी औरपानी मे खड़े होकर अस्ताचल गामी भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के बाद रात्रि जागरण और फिर मंगलवार भोर में पूजन सामग्री लेकर गन्ने से बने मंडप के तले मिट्टी की वेदी बनाकर छठी माता का पूजन करेंगी। प्रात: उगते सूर्य को जल देने के बाद ही वेदी पर आरती करने बाद ही प्रसाद ग्रहण करेंगी।
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सूरज डूबने के पहले घाट पर पहुंचे
कर्मकांडी विद्वान राजकिशोर मिश्र ने बताया कि सोमवार को सायंकाल 5.22 बजे सूर्यास्त होगा। अत: सूरज डूबने के पहले सरोवर या नदी के घाट पर पहुंच कर अपना स्थान निर्धारित कर लेें। इसी प्रकार पंचांग के अनुसार मंगलवार को प्रात: 6.39 बजे सूर्योदय होगा अत: रात रहते ही भोर मे उसी स्थान पर पहुंच कर अर्घ्य दें और घाट पर बेदी बनाकर छठमाता का पूजन करें।
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नगरपालिका के ईओ के अनुसार खलीलाबाद के कोतवाली के उत्तर के पोखरे, शुगर मिल और बिधियानी के पोखरे के पास साफ-सफाई कराकर चूना डाल दिया गया है। विद्युत व्यवस्था की जा रही है, जो सोमवार तक पूरी करा दी जाएगी। मगहर में आमी नदी के किनारे शिव मंदिर से बाईपास तक घाट के किनारे प्रकाश की व्यवस्था कराई जा रही है। इसी प्रकार मेंहदावल में कुबेर नाथ, बखिरा में भंगेश्वरनाथ, हरिहरपुर में कठिनइया के किनारे और धनघटा में घाघरा के तटों पर लोगों ने अपने-अपने लिए पूजा स्थल निर्धारित किए। राप्ती के तट पर भी ग्रामीणाें द्वारा अपने स्तर से जगह-जगह पूजा स्थलों की सफाई की गई।
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सूर्य की उपासना के लिए कठोर तप
छठ पूजा के लिए रविवार की शाम को खरना के बाद महिलाओं ने 36 घंटे का कठोर निर्जल व्रत शुरू किया। खलीलाबाद की सुमन तिवारी ने कहा कि सोमवार को दिनभर जल की बूंद भी ग्रहण नहीं करेंगी। सायंकाल दिन रहते ही पूजन सामग्री लेकर सरोवर के घाट पर जाएंगी औरपानी मे खड़े होकर अस्ताचल गामी भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने के बाद रात्रि जागरण और फिर मंगलवार भोर में पूजन सामग्री लेकर गन्ने से बने मंडप के तले मिट्टी की वेदी बनाकर छठी माता का पूजन करेंगी। प्रात: उगते सूर्य को जल देने के बाद ही वेदी पर आरती करने बाद ही प्रसाद ग्रहण करेंगी।
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सूरज डूबने के पहले घाट पर पहुंचे
कर्मकांडी विद्वान राजकिशोर मिश्र ने बताया कि सोमवार को सायंकाल 5.22 बजे सूर्यास्त होगा। अत: सूरज डूबने के पहले सरोवर या नदी के घाट पर पहुंच कर अपना स्थान निर्धारित कर लेें। इसी प्रकार पंचांग के अनुसार मंगलवार को प्रात: 6.39 बजे सूर्योदय होगा अत: रात रहते ही भोर मे उसी स्थान पर पहुंच कर अर्घ्य दें और घाट पर बेदी बनाकर छठमाता का पूजन करें।