{"_id":"66-53190","slug":"Sant-kabir-nagar-53190-66","type":"story","status":"publish","title_hn":"...बेवफा अपने माली को कहना पड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...बेवफा अपने माली को कहना पड़ा
Sant kabir nagar
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
संतकबीरनगर। हीरालाल रामनिवास इंटर कालेज में रविवार को जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने अपनी पंक्तियां पढ़ी।
गोष्ठी के मुख्य अतिथि शायर अब्दुल मजीद अंसारी ने शायरी पढ़ते हुए कहा कि इस चमन की बदलती रबिश देखकर बेवफा अपने माली को कहना पड़ा...। अलख निरंजन लाल पथिक ने दीपावली पर अपने शेर पढ़े। वरिष्ठ रचनाकार अवधेश पांडेय ने ‘बहुत दिनों के बाद आज पानी बरसा है‘ सुनाकर खुशियों का इजहार किया। आचार्य रामरक्षा भारती ने कर्महीन राजनीति पर नही रहा विश्वास पर अपनी शायरी पढ़ी। युवा कवि श्याम कार्तिकेय ने ‘गांधी आजाद गायब है किताबों से’ सुनाकर शिक्षा व्यवस्था पर चोट किया। संस्था के महामंत्री सूफी बस्तवी ने ‘जिनकी नजरों में मेरी कुछ नहीं कीमत’ सुनाई। राधेश्याम मिश्र, सारिक खलीलाबादी ने भी अपनी शायरी पढ़ी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नरसिंह नारायण कमल ने ‘जलते दीपक रोज पर’ सुनाकर तम को भगाने का आह्वान किया। इस अवसर पर पवन सबां, बलभद्र तिवारी, जगदंबिका प्रसाद शुक्ल ने भी कविता पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन मजहर खलीलाबादी ने किया।
विज्ञापन
गोष्ठी के मुख्य अतिथि शायर अब्दुल मजीद अंसारी ने शायरी पढ़ते हुए कहा कि इस चमन की बदलती रबिश देखकर बेवफा अपने माली को कहना पड़ा...। अलख निरंजन लाल पथिक ने दीपावली पर अपने शेर पढ़े। वरिष्ठ रचनाकार अवधेश पांडेय ने ‘बहुत दिनों के बाद आज पानी बरसा है‘ सुनाकर खुशियों का इजहार किया। आचार्य रामरक्षा भारती ने कर्महीन राजनीति पर नही रहा विश्वास पर अपनी शायरी पढ़ी। युवा कवि श्याम कार्तिकेय ने ‘गांधी आजाद गायब है किताबों से’ सुनाकर शिक्षा व्यवस्था पर चोट किया। संस्था के महामंत्री सूफी बस्तवी ने ‘जिनकी नजरों में मेरी कुछ नहीं कीमत’ सुनाई। राधेश्याम मिश्र, सारिक खलीलाबादी ने भी अपनी शायरी पढ़ी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नरसिंह नारायण कमल ने ‘जलते दीपक रोज पर’ सुनाकर तम को भगाने का आह्वान किया। इस अवसर पर पवन सबां, बलभद्र तिवारी, जगदंबिका प्रसाद शुक्ल ने भी कविता पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन मजहर खलीलाबादी ने किया।
विज्ञापन