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30 बसों में गया धाम गए श्राद्धकर्ता

Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
Sant kabir nagar
Sant kabir nagar Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
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संतकबीरनगर। पितृऋण से उद्धार पाने के लिए जनपद के शहरी और ग्रामीण अंचलों से सैकड़ों तीर्थयात्री गया धाम की यात्रा के लिए मंगलवार को निकले। खलीलाबाद, धनघटा और मेंहदावल तहसील क्षेत्र से लगभग तीस बसों से यात्री दल ने मंगलवार की रात में प्रस्थान किया।
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खलीलाबाद के यात्रा दल लेकर जा रहे एक दल के संयोजक पंडित रामबिलास द्विवेदी ने बताया कि हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार पुत्र के लिए अपने मृत माता-पिता और पिता और माता पक्ष की तीन पीढ़ियाें के अलावा कुल में असमय काल कवलित हुए परिजन और नि:संतान गुजर चुके आत्मीय, दुर्घटना में मरे हित, मित्र के अलावा घर के सेवकों की आत्मा की शांति के लिए गया धाम में पिंडदान किया जाता है। इससे पितर तृप्त होते हैं और उन्हें देवता का दर्जा मिलता है। ठाकुरद्वारा जगन्नाथ धाम को कहते हैं। बहुधा लोग इन दोनाें स्थानों की यात्रा एक साथ करते हैं। पितराें के संतुष्ट होने पर वंश वृद्धि, परिवार में सुख, शांति आती है। यात्री बस के संचालक भोलू चौरसिया ने बताया कि काशी के पिशाच मोचन, बिहार प्रांत के पुनपुन, गया धाम में पित्रश्राद्ध करने और पिंडदान के बाद, फाल्गु नदी के तट पर बालुका से पिंडदान देने के बाद प्रेतशिला पर पितरों के लिए सत्तू उड़ाया जाता है। उसके बाद यात्रियों का दल भुवनेश्वर, गंगासागर, कोलकाता, उड़ीसा में जगन्नाथ पुरी, विंध्याचल, चित्रकूट, प्रयाग, अयोध्या होकर पुन: वापस जनपद में लौटेगा। अयोध्या के भदरसा में पिंडदान होगा। अंतिम पिंडदान बद्रीनाथ में किया जाता है। जिसकी यात्रा गर्मियाें में होगी। यात्री दल में खलीलाबाद से कृष्ण मुरारी मिश्र, मेहदावल से आेंकारनाथ शुक्ल, धनघटा तहसील क्षेत्र से सत्यराम त्रिपाठी समेत अन्य लोग रहे।
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धर्मसिंहवा से भी जगन्नाथ मिश्र के नेतृत्व में एक बस यात्रियों को लेकर देर शाम में गया के लिए रवाना हुई। लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला बैंडबाजों के साथ श्रद्धालुओं ने गांव के मंदिरों में दर्शन किया व गांव के अन्य लोगों के घरों में जाकर अच्छत फेंका। घनश्याम वर्मा, ओंकार नाथ शुक्ल, राजेश्वर पांडेय, लालमन, तीरथ, वंशी, चुन्नीलाल, रुदल, श्रीराम, रामसुधि, अंगद, धनपत आदि इस यात्रा में शामिल हुए।
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