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जिगिना ताल का मामला
Updated Tue, 11 Dec 2018 11:16 PM IST
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बोई गई फसल पर प्रशासन ने चलवाया ट्रैक्टर
- जिगिना ताल की जमीन पर हुई थी खेती, नाराज किसानों ने किया प्रदर्शन
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
हैंसर। धनघटा तहसील क्षेत्र के जिगिना ताल की करीब 200 बीघा जमीन पर खेती कर रहे सैकड़ों किसानों की बोई गई फसल पर प्रशासन ने मंगलवार को ट्रैक्टर चलवा दिया। मौके पर गए कर्मचारियों का कहना था कि ताल की जमीन पर अवैध कब्जा कर खेती करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। दूसरी तरफ किसानों ने इस कार्रवाई को प्रशासनिक मनमानी करार देते हुए नष्ट की गई फसलों के साथ प्रदर्शन किया।
प्रधान प्रदीप यादव, पूर्व प्रधान भाने निषाद, चंद्रभान, ज्ञानदास, भालचंद, चौथी, रामरुप, पन्नेलाल आदि का कहना है कि वह लोग वर्षों से जिगीना ताल में फसल की बुआई करते चले आ रहे हैं। प्रशासन ने आज तक आपत्ति नहीं की। इस वर्ष भी उन लोगों ने गेहूं बोया था। मंगलवार को लेखपाल और चकबंदी विभाग के लोग पहुंचे और ट्रैक्टर से फसल की जुताई करा दी। किसानों का कहना है कि करीब 200 बीघा फसल बर्बाद हुई है। प्रशासन की इस मनमानी से गरीब किसानों को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। नाराज किसानों ने प्रदर्शन किया और कहा कि यदि प्रशासन को ताल की जमीन खाली ही कराना था तो यह काम बुआई से पहले कराया जाना चाहिए था। इस संबंध में एसडीएम बाबूराम चौधरी ने कहा कि जल संरक्षण के लिए ताल की जमीन का खाली रहना जरूरी होता है। किसी को भी ताल की जमीन पर अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। प्रशासन को कार्रवाई अतिक्रमण हटाने के लिए करना पड़ा।
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- जिगिना ताल की जमीन पर हुई थी खेती, नाराज किसानों ने किया प्रदर्शन
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अमर उजाला ब्यूरो
हैंसर। धनघटा तहसील क्षेत्र के जिगिना ताल की करीब 200 बीघा जमीन पर खेती कर रहे सैकड़ों किसानों की बोई गई फसल पर प्रशासन ने मंगलवार को ट्रैक्टर चलवा दिया। मौके पर गए कर्मचारियों का कहना था कि ताल की जमीन पर अवैध कब्जा कर खेती करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। दूसरी तरफ किसानों ने इस कार्रवाई को प्रशासनिक मनमानी करार देते हुए नष्ट की गई फसलों के साथ प्रदर्शन किया।
प्रधान प्रदीप यादव, पूर्व प्रधान भाने निषाद, चंद्रभान, ज्ञानदास, भालचंद, चौथी, रामरुप, पन्नेलाल आदि का कहना है कि वह लोग वर्षों से जिगीना ताल में फसल की बुआई करते चले आ रहे हैं। प्रशासन ने आज तक आपत्ति नहीं की। इस वर्ष भी उन लोगों ने गेहूं बोया था। मंगलवार को लेखपाल और चकबंदी विभाग के लोग पहुंचे और ट्रैक्टर से फसल की जुताई करा दी। किसानों का कहना है कि करीब 200 बीघा फसल बर्बाद हुई है। प्रशासन की इस मनमानी से गरीब किसानों को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। नाराज किसानों ने प्रदर्शन किया और कहा कि यदि प्रशासन को ताल की जमीन खाली ही कराना था तो यह काम बुआई से पहले कराया जाना चाहिए था। इस संबंध में एसडीएम बाबूराम चौधरी ने कहा कि जल संरक्षण के लिए ताल की जमीन का खाली रहना जरूरी होता है। किसी को भी ताल की जमीन पर अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। प्रशासन को कार्रवाई अतिक्रमण हटाने के लिए करना पड़ा।
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