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जिले में 27 हजार बच्चे कुपोषित

Mon, 03 Dec 2018 12:08 AM IST
संतकबीरनगर
संतकबीरनगर Updated Mon, 03 Dec 2018 12:08 AM IST
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27 thousand children in the district are malnourished
जिले में 27 हजार बच्चे कुपोषित - फोटो : अमर उजाला
संतकबीरनगर। कुपोषण रोकने के लिए शासन स्तर से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। बावजूद इसके कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। अक्तूबर में हुए सर्वे में जिले में 27576 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। सांथा ब्लॉक में सर्वाधिक 4420 बच्चे कुपोषित हैं। यह आंकड़े और बढ़ सकते हैं। कुपोषित बच्चों की देखभाल यदि सही से नहीं हुई तो उनका बौद्धिक विकास तो रुकेगा ही साथ में बौनापन की आशंका बनी रहेगी। 
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से जुड़े कर्मियों पर बच्चों में कुपोषण की जांच करने और उसकी रोकथाम की जिम्मेदारी है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर इसके लिए बेबी मशीन उपलब्ध कराई गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रदेश में 40 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं। जबकि जिले में इनकी संख्या 22 प्रतिशत है। जिले में 1765 आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित है। अक्तूबर में हुए सर्वे के आंकड़ों पर गौर करें तो शून्य से छह वर्ष तक के जिले में 164393 बच्चे हैं। इनमें 27,576 बच्चे कुपोषित पाए गए। राष्ट्रीय पोषण मिशन के नोडल अधिकारी एके सिंह ने बताया कि अति कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई है। जहां बेबी मशीन ठीक नहीं है, वहां तो बदलवा दिए जाएंगे। कुपोषण रोकने के लिए शासन बेहद गंभीर है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी राय ने बताया कि कुपोषण बच्चों के स्वास्थ के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इनके मानसिक और शारीरिक विकास पर बुरा प्रभाव डालता है। बच्चों का दिमाग 80 प्रतिशत तक पहले तीन साल में ही विकसित हो जाता है। यदि बच्चा कुपोषित होगा तो उसकी बौद्धिक क्षमता कम होगी। बौनापन और कमजोर होगा। 
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