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परदेशियों की बेरुखी से कम हो रहा मतदान प्रतिशत
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परदेशियों की बेरुखी से कम हो रहा मतदान प्रतिशत
संभ्रांत घरों की महिलाएं भी नहीं जातीं वोट डालने
कम मतदान प्रतिशत का कारण जानने को प्रशासन ने कराया सर्वे
लोगों की राय के आधार पर बनाई जा रही रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। होने जा रहे लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने को लिए प्रयासरत प्रशासन ने पहले कम मतदान प्रतिशत का कारण खोजना शुरू किया है। इसके लिए चिन्हित 144 बूथों पर सर्वे कराया जा रहा है। डिस्ट्रिक कम्युनिकेशन प्लान के तहत मिले मोबाइल नंबरों पर बात करके प्रशासन ने एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें मतदान प्रतिशत कम रहने की सबसे बड़ी वजह रोजगार के सिलसिले में देश के दूसरे हिस्से में गए लोगों की मतदान के प्रति दिखाई जा रही उदासीनता को माना गया है। दूसरे नंबर पर संभ्रांत घरों की महिलाओं की मतदान में रुचि नहीं होने को कारण माना गया है।
जिले में एक लोकसभा व तीन विधानसभा क्षेत्र में हैं। होने जा रहे लोकसभा चुनाव के लिए जिले के 1420 बूथों पर कुल 1244278 मतदाता हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में यहां औसतन 53.61 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसके बाद वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी 52.74 फीसदी ही मतदान हुआ। प्रशासन ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए बहुत जोर लगाया लेकिन इस बार भी कुल मतदान प्रतिशत 53.01 प्रतिशत पर आकर रुक गया।
डीएम/जिला निर्वाचन अधिकारी रवीश गुप्ता ने इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए अन्य सारे उपाय अपनाने के साथ ही इस बात का पता लगाने का भी प्रयास शुरू किया कि आखिर मतदान प्रतिशत कहां और कैसे कम हो रहा है। इसका तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए बूथवार मतदान प्रतिशत का आंकड़ा चेक किया गया। इसमें कुल 144 बूथ ऐसे मिले जहां मतदान प्रतिशत औसत से काफी कम है। इसके बाद इन चिन्हित बूथों पर मतदान प्रतिशत कम रहने की वजह तलाशने का कार्य शुरू हुआ। डीपीआरओ/स्वीप प्रभारी आलोक प्रियदर्शी के अनुसार मंगलवार 26 मार्च को कम मतदान प्रतिशत वाले बूथ सिकरी, निघुरी, राजेडीहा, बेलराई, शिवापार, उचहरा खुर्द आदि 144 बूथों पर कम मतदान प्रतिशत का कारण जानने हेतु डिस्ट्रिक कम्युनिकेशन प्लान के माध्यम से उपलब्ध मोबाइल नंबरों पर कॉल करके बातचीत की गई। यह फोन कॉल ग्राम पंचायत के संभ्रांत व्यक्तियों, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य आदि के पास किया गया। लोगों से बातचीत करने पर जो जानकारी मिली उसके अनुसार मतदान प्रतिशत कम होने का सबसे बड़ा कारण आजीविका की की तलाश में दूसरे स्थानों पर गए वे लोग हैं जो लोकसभा या विधानसभा चुनाव में मतदान करने नहीं आते। इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा कारण संभ्रांत घरों की महिलाओं द्वारा मतदान नहीं किया जाना बताया गया। लोगों का कहना था कि अभी भी संभ्रांत परिवार की महिलाएं लाइन में लगकर वोट देने को उचित नहीं मानतीं। इसके अलावा कई लोगों ने उचित प्रत्याशी के अभाव में मतदान नहीं करने तो कुछ ने वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने के कारण मतदान प्रतिशत कम रहने की बात कही।
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डीएम रवीश गुप्ता ने बताया कि प्रयास किया जा रहा है कि पहले कारण तलाश किए जाएं और मतदान दिवस से पूर्व सरकारी प्रयास के अलावा राजनैतिक व सामाजिक संगठनों की मदद से लोगों को वोट का महत्व समझाते हुए मतदान के लिए प्रेरित किया जाए। इसके अलावा प्रशासन इन विशेष चिह्नित बूथों पर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
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संभ्रांत घरों की महिलाएं भी नहीं जातीं वोट डालने
कम मतदान प्रतिशत का कारण जानने को प्रशासन ने कराया सर्वे
लोगों की राय के आधार पर बनाई जा रही रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। होने जा रहे लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने को लिए प्रयासरत प्रशासन ने पहले कम मतदान प्रतिशत का कारण खोजना शुरू किया है। इसके लिए चिन्हित 144 बूथों पर सर्वे कराया जा रहा है। डिस्ट्रिक कम्युनिकेशन प्लान के तहत मिले मोबाइल नंबरों पर बात करके प्रशासन ने एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें मतदान प्रतिशत कम रहने की सबसे बड़ी वजह रोजगार के सिलसिले में देश के दूसरे हिस्से में गए लोगों की मतदान के प्रति दिखाई जा रही उदासीनता को माना गया है। दूसरे नंबर पर संभ्रांत घरों की महिलाओं की मतदान में रुचि नहीं होने को कारण माना गया है।
जिले में एक लोकसभा व तीन विधानसभा क्षेत्र में हैं। होने जा रहे लोकसभा चुनाव के लिए जिले के 1420 बूथों पर कुल 1244278 मतदाता हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में यहां औसतन 53.61 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसके बाद वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी 52.74 फीसदी ही मतदान हुआ। प्रशासन ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए बहुत जोर लगाया लेकिन इस बार भी कुल मतदान प्रतिशत 53.01 प्रतिशत पर आकर रुक गया।
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डीएम/जिला निर्वाचन अधिकारी रवीश गुप्ता ने इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए अन्य सारे उपाय अपनाने के साथ ही इस बात का पता लगाने का भी प्रयास शुरू किया कि आखिर मतदान प्रतिशत कहां और कैसे कम हो रहा है। इसका तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए बूथवार मतदान प्रतिशत का आंकड़ा चेक किया गया। इसमें कुल 144 बूथ ऐसे मिले जहां मतदान प्रतिशत औसत से काफी कम है। इसके बाद इन चिन्हित बूथों पर मतदान प्रतिशत कम रहने की वजह तलाशने का कार्य शुरू हुआ। डीपीआरओ/स्वीप प्रभारी आलोक प्रियदर्शी के अनुसार मंगलवार 26 मार्च को कम मतदान प्रतिशत वाले बूथ सिकरी, निघुरी, राजेडीहा, बेलराई, शिवापार, उचहरा खुर्द आदि 144 बूथों पर कम मतदान प्रतिशत का कारण जानने हेतु डिस्ट्रिक कम्युनिकेशन प्लान के माध्यम से उपलब्ध मोबाइल नंबरों पर कॉल करके बातचीत की गई। यह फोन कॉल ग्राम पंचायत के संभ्रांत व्यक्तियों, ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य आदि के पास किया गया। लोगों से बातचीत करने पर जो जानकारी मिली उसके अनुसार मतदान प्रतिशत कम होने का सबसे बड़ा कारण आजीविका की की तलाश में दूसरे स्थानों पर गए वे लोग हैं जो लोकसभा या विधानसभा चुनाव में मतदान करने नहीं आते। इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा कारण संभ्रांत घरों की महिलाओं द्वारा मतदान नहीं किया जाना बताया गया। लोगों का कहना था कि अभी भी संभ्रांत परिवार की महिलाएं लाइन में लगकर वोट देने को उचित नहीं मानतीं। इसके अलावा कई लोगों ने उचित प्रत्याशी के अभाव में मतदान नहीं करने तो कुछ ने वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने के कारण मतदान प्रतिशत कम रहने की बात कही।
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डीएम रवीश गुप्ता ने बताया कि प्रयास किया जा रहा है कि पहले कारण तलाश किए जाएं और मतदान दिवस से पूर्व सरकारी प्रयास के अलावा राजनैतिक व सामाजिक संगठनों की मदद से लोगों को वोट का महत्व समझाते हुए मतदान के लिए प्रेरित किया जाए। इसके अलावा प्रशासन इन विशेष चिह्नित बूथों पर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।